Uttar Pradesh News बिना संस्कृत वाले भी शास्त्री व आचार्य में ले सकेंगे प्रवेश, जल्द समाप्त हो सकती है संस्कृत में अर्हता की बाध्यता

रिपोर्टर विवेक सिन्हा वाराणसी उत्तर प्रदेश
वाराणसी संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में शास्त्री व आचार्य में प्रवेश के लिए संस्कृत की अर्हता की बाध्यता जल्द समाप्त हो सकती है। प्रवेश समिति की बैठक में इस मुद्दे पर विचार किया गया। ब्रिज कोर्स के बाद प्रवेश पर जल्द ही सहमति बनने के आसार हैं। शास्त्री, आचार्य, डिप्लोमा व सभी प्रमाणपत्रीय कोर्स में प्रवेश की अवधि को बढ़ाकर 20 अगस्त तक कर दिया गया है। शास्त्री और आचार्य में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत बिंदुवार संशोधन करने के लिए प्रोफेसर हरिशंकर पांडेय, प्रो. हीरक क्रांति चक्रवर्ती, प्रो. विजय कुमार पांडेय और उपेंद्रनाथ द्विवेदी की समिति बनाई गई है। विश्वविद्यालय परिसर में शास्त्री प्रथम, द्वितीय व तृतीय, ग्रंथालय व सूचना विज्ञान शास्त्री (बीलिव), विदेशी भाषा डिप्लोमा प्रथम वर्ष, संगीत प्रमाण पत्रीय, संस्कृत प्रमाण पत्रीय समेत अन्य पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए 20 अगस्त तक तारीखें बढ़ा दी गई हैं। विश्वविद्यालय में गृह विज्ञान और पर्यटन के पाठ्यक्रमों की भी पढ़ाई होगी। इसके लिए पाठ्यक्रम तैयार कर प्रस्ताव देने के लिए निर्देश दिया गया है।



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