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Chhattisgarh News देवपहरी वाटर फॉल में फिर लापरवाही, तेज बहाव में बह गया एक टूरिस्ट, तलाश जारी

रिपोर्टर सलीम कुमार कोरबा छत्तीसगढ़

देवपहरी वाटर फॉल में फिर लापरवाही, तेज बहाव में बह गया एक टूरिस्ट, तलाश जारीपड़ोसी जिला जांजगीर-चांपा के अकलतरा से घूमने पहुंचे थे तीन पर्यटक, मुसलाधार बारिश के असर से फिर उफान पर है गोविंद झुंझ का झरना

 कोरबा  अभी चार लोगों को मौत के मुंह से बाहर निकले ठीक से चार दिन भी नहीं बीते थे कि देवपहरी के वाटर फॉल में खतरा नजरअंदाज कर एक बार फिर लापरवाही की एक नई खबर सामने आई है। शुक्रवार को यहां घूमने आए तीन लोगों में एक टूरिस्ट झरने के तेज बहाव में बह गया है। रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है और उसकी तलाश जारी है। बताया जा रहा कि क्षेत्र में मूसलाधार बारिश हो रही है, जिसके असर से एक बार फिर झरने का जल स्तर बढ़ गया और नदी में उफान आ गया, जिससे टूरिस्ट फंस गए। सुदूर वनांचल क्षेत्र लेमरु की इस घटना की सूचना मिलने पर पुलिस समेत बचाव दल पहंुच चुका है और यहां रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। लेमरू थाना क्षेत्र अंतर्गत देवपहरी मनोरम झरने में पड़ोसी जिले से घूमने आए 3 लोग वाटरफॉल में अचानक पानी का बहाव तेज हो जाने के कारण फंस गए है। इन लोगों में अकलतरा जिला जांजगीर-चांपा में रहने वाले आयुष जैन पिता अजय जैन उम्र 25 वर्ष, लक्ष्मीकांत शर्मा पिता रामा अवतार शर्मा उम्र 45 वर्ष व सत्य जीत राहा पिता स्व ए बी राहा उम्र करीब 55 वर्ष शामिल हैं। झरने से बह रही नदी में पानी उफान पर होने के बाद भी वे सभी जल प्रपात के काफी अंदर चले गए। जहां पानी के तेज बहाव में सत्य जीत राहा बह गए हैं। इस घटना की सूचना लेमरू थाना में दी गई। जिसमें अभी स्थानीय ग्रामीणों के मदद से रेस्क्यू का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही नगर सेना कोरबा एसडीआरएफ को सूचित किया गया है। सुरक्षा इंतजाम नदारद, रोमांच के लिए खतरे के बीच चले जाते हैं सैलानी यह पहली बार नहीं है, जो देवपहरी के झरने में किसी की जिंदगी खतरे में पड़ी हो। अभी कुछ दिनों पहले भी एक दंपती समेत जांजगीर जिले के चार युवा यहां घूमने आए थे। इस बीच नदी का जल स्तर अचानक बढ़ जाने से वे भी घंटों फंसे रहे। करीब छह घंटे रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर उन्हें बाहर निकाला जा सका और उनकी जान बची थी। देवपहरी के पर्यटन स्थल की बात करें, तो यहां आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा केवल पत्थरों व चट्टानों में अंकित चेतावनी के भरोसे छोड़ दिया गया है। न तो यहां पर्यटकों की रोक-टोक का कोई इंतजाम है और न ही उन पर नजर रखने वाला कोई सुरक्षा गार्ड ही रखा गया है। नियमानुसार ऐसे खतरे भरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित होनी ही चाहिए और खासकर यहां, जहां कई जाने जा चुकी हों, वहां गंभीरता लाजमी हो जाता है।

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