Chhattisgarh News केएसके महानदी पावर प्रोजेक्ट कंपनी गेट के पास रोड डिवाइडर नहीं है और ना ही पानी की व्यवस्था है।

रिपोर्टर राकेश कुमार साहू जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़
जांजगीर जिले के अकलतरा विकासखंड के अंतर्गत आने वाली पावर प्रोजेक्ट का नाम है केएसके महानदी पावर प्रोजेक्ट जहां की सड़कों पर रोड डिवाइडर नहीं है जिससे राहगीरों को परेशानी होती है राह चलने पर कभी भी दुर्घटना घट सकती है अप्रिय घटना कंपनी प्रबंधन द्वारा रोड डिवाइडर का निर्माण करने का वादा किया है मगर रोड डिवाइडर का निर्माण नहीं किया जा रहा है राहगीरों को परेशान होनी पड़ती है एवं सड़कों के दोनों ओर गाड़ियों की लंबी लाइन लगी रहती है हाईवा है जैसी भी है कैप्सूल वाहन है डंपर हैं इससे राहगीरों को बहुत परेशानी होती है ट्रक की यारड भी नहीं बनाया है। एवं कंपनी प्रबंधन के द्वारा उचित पेयजल की व्यवस्था भी नहीं है क्योंकि हर कंपनी गेट के पास में हेडपंप रहती है या नल जल योजना के अंतर्गत में पानी टंकी बनी रहती है मगर इस कंपनी गेट के पास अगर कोई भी राहगीर राह चलते अगर बेहोश हो जाए और उसे पानी की जरूरत पड़े तो पानी मिलना मुश्किल हो जाती है पानी के लिए सो डेढ़ सौ मीटर किसी अन्य जगह से लाया जाता है यहां पर ईडी का छापा पड़ा था मगर छापे के दौरान कितनी संपत्ति मिली है ईडी के द्वारा पता भी नहीं चला मगर कंपनी अंदर घोटाले बाजी हो रही है। प्रशासन आंख मूंदकर बैठी है जहां पर से बड़े बड़े अधिकारी आना-जाना करते हैं मगर उन जगहों को अनदेखा कर चले जाते हैं कि रोड डिवाइडर क्यों नहीं बनवा रहे हो कर कर भी नहीं बोलते और ना ही यहां कंपनी गेट के पास में आपने राहगीरों एवं कंपनी कर्मचारियों को उचित पेयजल की व्यवस्था क्यों नहीं की है यह क्वेश्चन कंपनी प्रबंधन के खिलाफ में प्रशासन द्वारा नहीं लगाई जाती है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इस कंपनी में शासकीय जमीन 330 एकड़ जमीन को अधिग्रहण किया जो कि सरकारी जमीन था जिसे भेजा हरकत कर पूर्व सरपंचों के द्वारा अधिग्रहण करवा दिया गया जिससे यहां पर बेरोजगारों की संख्या बढ़ती जा रही है राज्य शासन अगर चाहे तो 323 एकड़ जमीन जो कंपनी द्वारा अधिग्रहण किया गया है उसके एवज में गांव के शिक्षित बेरोजगारों को नौकरी दिला सकता है राज्य शासन की जमीन को अधिग्रहण करने के एवज में मगर राज्य शासन ही खुद अनदेखा कर चली जा रही है।
कंपनी प्रबंधन द्वारा बाहरी व्यक्तियों को नौकरी दिया जा रहा है गांव के व्यक्तियों को शिक्षित बेरोजगारों को सर्विस नहीं दिया जाता अगर जिस किसी का भी आवेदन जाता है तो सिफारिश की मांग करते हैं अगर कोई मंत्री का रिश्तेदार है तो उसका नौकरी लग जाएगा विधायक का रिश्तेदार है तो नौकरी लग जाएगा सांसद का रिश्तेदार है तो नौकरी लग जाएगा मगर एक आम नागरिक को नौकरी पर नहीं रखा जाता बल्कि उसके आवेदनों को कूड़ेदान में फेंक दिया जाता है। कंपनी द्वारा हॉस्पिटल का भी निर्माण नहीं किया है अगर कोई भी श्रमिक एक्सीडेंट हो जाता है या अंदर कंपनी अंदर काम के दौरान कुछ भी घटना का शिकार हो जाता है तो उसे बिलासपुर ले जाया जाता है इलाज के लिए जबकि कंपनी प्रबंधन अधिनियम के अंतर्गत हॉस्पिटल अनिवार्यता है कंपनी के पास में होना अनिवार्य है। कंपनी के द्वारा वेतन विसंगति भी विद्यमान हैं इस चीज के लिए लेबर कमिश्नर लेबर ऑफिस कर्मचारी जब जाता है कि मेरी वेतन इतनी है और उसकी पेमेंट ज्यादा है क्यों है कैसे हैं तो उस पर विचार नहीं किया जाता स्थानीय रोजगार प्राप्त श्रमिकों का वेतन निर्धारित दर से कम रहता है और बाहरी व्यक्तियों का और सिफारिश वाले व्यक्तियों के लगे अभ्यार्थियों का वेतन ज्यादा रहता है यह कंपनी प्रबंधन की कहानी। अगर रोड डिवाइडर का निर्माण नहीं किया जाता है तो कंपनी को तत्काल बंद किया जाए एवं वेतन विसंगति को भी दूर किया जाए उचित पेयजल की व्यवस्था कंपनी गेट के पास में की जाए हॉस्पिटल का भी निर्माण तत्काल किया जाए श्रमिकों के हित हेतु कंपनी शासन प्रशासन से मिली जुली कर भेदभाव वाली कार्य कर रही है।


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