Chhattisgarh News नहर मार्ग पर चखना सेंटर संचालित है जहां से राहगीरों को चलने में परेशानी होती है खासतौर से महिला वर्ग को।

रिपोर्टर राकेश कुमार साहू जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़
जांजगीर जिले के अकलतरा विकासखंड के ग्राम पंचायत नरियारा के सिंचाई कॉलोनी के अंतर्गत नरियारा के मुख्य मार्ग से थोड़ी ही दूर में नाहर का पुल है जो मार्ग नरियारा से ब्यासनगर की ओर जाता है वह नहर मार्ग है और नाहर मार्ग में चखना सेंटर संचालित है जहां से चलना मुश्किल हो जाता है राहगीरों को तथा नाहर में चखना सेंटरों में जो उपयोग आता है डिस्पोजल पानी पाउच शराब की बोतलें आदि को फेंक दिया जाता है तथा अव्यवस्था का आलम रहता है। यह की नाहर में पानी पाउच डिस्पोजल गिलास शराब की बोतलें आदि फेंक दी जाती है एवं जब कोई नहाने को नाहर में उतरता है तो नहाने के दौरान उसे कांच चुभ जाती है जिससे परेशानी होती है एवं सायंकाल गांव के व्यक्ति घूमने को निकलते हैं तो उस जगह से गुजर ना मुश्किल हो जाता है जहां पर चखना सेंटर संचालित है जहां पर शराबियों का अड्डा बना हुआ रहता है खासतौर से महिला वर्ग उस मार्ग से बड़ी लाज शर्म से जाते जाते हैं शराबियों के द्वारा अभद्र गालियां वहां पर संचालित हो जाती है शराब पीने के बाद बहुत जाते हैं इनकी रखरखाव संबंधित अधिकारी द्वारा कर्मचारी नियुक्त किया जाता है मगर उन कर्मचारियों द्वारा इसका विरोध नहीं किया जाता बल्कि उन जगहों पर जाकर कर्मचारी गण मदिरापान कर अपने घर को चले जाते हैं मगर उन्हें यह भी पता नहीं उन जगहों पर से महिला है कि लड़की है की अन्य राहगीर आना-जाना करते हैं नरियारा से व्यास नगर होते हुए नाहर तो नहर क्या नाहर से लगे हुए खेतों में पानी पाउच डिस्पोजल शराब की शीशियां को फेंक दी जाती है मगर चखना सेंटर द्वारा उन सामग्रियों को नशटीकरण नहीं करता जिससे सफाई व्यवस्था का आलम और व्यवस्था बदस्तूर जारी है। यह की यह कोई व्यवसायिक स्थल नहीं है जहां पर व्यवसाय कर सके क्योंकि यह मार्ग है मार्ग अवरुद्ध हो जाता है चखना सेंटरों के द्वारा खोले जाने के कारण। आसपास खेत भी है जहां पर प्रयुक्त सामग्री को फेंक दिया जाता है खेती करने वाले किसान मजदूर के पैरों में कांच चुभ जाते हैं। तत संबंधित क्षेत्र का अधिकारी कर्मचारी निरीक्षण करते नहीं है बल्कि निरीक्षण करने के दौरान उन जगहों पर से मदिरापान कर चले जाते हैं। विडंबना यह है कि नरियारा की नहरों की तथा कांटा नालियों का सफाई भी नहीं हुआ है जिससे पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पाता सफाई के नाम से राज्य शासन द्वारा राशि जारी होती है मगर उन राशियों का बंदरबांट कर कागजों में सफाई हो गया कह कर फाइल को नस्तीबद्ध बंद कर दिया जाता है। यह सब कार्य अधिकारी कर्मचारी की मिलीभगत से चखना सेंटर संचालित है कभी भी अप्रिय घटना यहां पर घट सकती है अगर चखना सेंटरों के विरुद्ध कार्यवाही नहीं की जाती है


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