Bihar News मिट्टी भराई कर ऊँची ऊँची इमारते इसे नाला का रूप दे चुकी है

रिपोर्टर अमित कुमार सिंह पूर्वी चंपारण बिहार
बिहार चंपारण सत्याग्रह की पावणभूमि रास्ट्रपिता महात्मा गॉंधी की कर्म भूमि पूर्वीचम्पारण का मुख्यालय मोतिहारी शहर की प्राकृतिक द्वारा रचित उपहार धनौती नदी पर स्थित मोतीझील आम जनता द्वारा अतिक्रमण का शिकार बनता जा रहा है प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में प्रातः चार बजे से जबतक शहर में नोइंट्री नही लग जाती तबतक बेलबनवा वार्ड संख्या 23. के चरखापार्क के पश्चिमी शड़क जो पूरे मुहले से होकर मिटी लोड किये ट्रैक्टरों को गुजारा जाता है मूहले वासी अपने घर थके हारे अपने कार्य से निपटकर रात को आराम मिले अपने कानों को ढक कर सोने को मजबूर है उक्त नदी के दूसरे छोर पर जानपुल मुहल्ला बसा है जिसको नदी कहना तथा दूसरा छोर कहना गलत है क्यूँकि मिट्टी भराई कर ऊँची ऊँची इमारते इसे नाला का रूप दे चुकी है सरकार, स्थानिये सांसद, विधायकों, एवं प्रसासन द्वारा इसे काशमीर का डलझील बनाने के लिए लाखों लाख रुपये तथा तत्परता एवं कड़ी मेहनत पर पानी फेरते हुए आम जनता, सरकारी अधिकारी, कर्मचारी तथा धनाध्य लोगों द्वारा दो से छः तल्ला इमारत का निर्माण धड़ले से हो रही है
जो तस्वीरों में बयाँ करती है जमीन मालिकों से पूछने पर निजी जमीन बतलाया जाता है पता नहीं उक्त नदी निजी कैसे हो गई सरकार किस नियम के तहत प्रतिदिन उक्त जमीन रजिस्ट्री कर रही है जनता का शवाल् है जो सोंचनीया है आए दिन चार बजे प्रातः से ट्रैक्टरों की गर्जना से मुहल्ले वासियों और ट्रैक्टर ड्रायवरों में नोक झोंक होते रहती है इसी मुहले में स्थानीय पुलिस अधिकारी तथा कर्मचारी जो रात्रि गस्ती से थकेहारे अपने आवास पर आराम करने आते हैं उन्हे भी काफी परेसानी होती है बताते चले की मिटी लोड ट्रैक्टरों मे पीछे डाले मे ढकन नहीं होता जो शडक पर मिटी गिरते हुए जाता है हल्की वारिस मे शडक पर किंचड़ जमा हो जाता है अक्सर नवालिक ड्रायवरों को चलाते हुए देख सकते हैं तथा रजिस्ट्रेशन नम्बर भी नही के बराबर मिल जाती है जो सोंचनिय है।


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