IC News and Media House Private Limited


छत्तीसगढ़ब्रेकिंग न्यूज़राज्य

Chhattisgarh News रीपा के माध्यम से वनोपज संग्रह कर महिलाएं बन रही उद्यमी समूह ने अब तक विक्रय किया 25000 रुपये का झाडू

रिपोर्टर आतिक अफरोज सूरजपुर छत्तीसगढ़

सुरजपुर  जिले के दूरस्थ आदिवासी क्षेत्र ओड़गी के अधिकांश ग्रामीण परिवार का जीवन कृषि कार्य के साथ-साथ वनों पर निर्भर है। इस विकासखण्ड के ग्रामीण परिवारों द्वारा कई पिढ़ियों से गैर इमारती वनोपज जैसे महुआ, हर्रा, बहेरा, तेंदू पत्ता, नागरमोथा एवं अन्य वन्य उत्पादों का संग्रहण एवं व्रिकय कर अपनी आजीविका चलाया जा रहा है। कुछ परिवार इसी वनोपजों में से क्षेत्र विशेष में पैदा होने वाले जंगली घांस से सिंक एवं फूल झाडू का निर्माण कर स्थानीय बाजार में विक्रय करते आ रहे हैं। झाडू निर्माण हेतु कच्चे सामग्री की उपलब्धता को देखते हुए कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देशन एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री लीना कोसम के मार्गदर्शन में ओड़गी विकासखण्ड के ग्राम पंचायत खर्रा में विकसित किये जा रहे महात्मा गांधी ग्रामीण औद्योगिक पार्क (रीपा) अंर्तगत झाडू निर्माण की गतिविधि प्रारंभ की गयी है। इस गतिविधि में बिहान योजना से गठित सरस्वती महिला स्व सहायता समूह की 08 महिलाओं के द्वारा झाडू निर्माण का कार्य किया जा रहा है। समूह की सदस्य मीना राजवाड़े के द्वारा यह बताया गया कि हम पूर्व में हाथ से झाडू की बुनाई करते थे, जिसमें बहुत अधिक समय लग जाता था। अब रीपा द्वारा मिले आर्थिक सहायता से झाडू बनाने के लिए मशीन का क्रय करने से झाडू बनाने में लगने वाला समय एक चौथाई से भी कम हो गया है।

मशीन के माध्यम से तार द्वारा टाईट बांधा जाता है जिससे झाडू लम्बे समय तक चलता है एवं इसका मूल्य भी पहले तैयार झाडू से अधिक प्राप्त होता है। पहले फूल झाड़ू भी हाथ से ही बीनकर तैयार किया जाता था। जिसे अब मशीन के माध्यम से बहुत आसानी से तैयार कर लिया जा रहा है एवं रीपा से प्राप्त राशि से हम लोग प्लास्टिक हैंडल भी क्रय कर बाजार में बिकने वाल फूल झाडू के समान क्वालिटी का झाड़ू का निर्माण कर रहे हैं। हाथ से बने झाड़ू जहां 15 से 20 रुपये में बिकते थे, वहीं मशीन से तैयार किये गये झाड़ू 30 से 40 रुपये में होलसेल(थोक) दर पर विक्रय किया जा रहा है। समूह के 08 महिलाओं के द्वारा बहुत कम समय में ही अब तक 1500 से अधिक लगभग 50 हजार रुपये मूल्य का झाडू का निर्माण किया गया एवं 25000 रुपये से अधिक मूल्य के झाड़ू का विक्रय भी किया जा चुका है। रीपा के माध्यम से महिलाओं के वनोपज संग्राहक से उद्यमी बनने का सपना साकार हुआ है। पहले हमारे समूह के सदस्य वनोपज संग्रहण करते थे अब अन्य वनोपज संग्राहकों से झाडू निर्माण हेतु कच्चा माल खरीद कर झाडू बनाने का कार्य कर रहे हैं। बिहान योजना के विकासखंड परियोजना प्रबन्धक संतोष राजवाड़े द्वारा यह जानकारी दिया गया कि ग्राम पंचायत खर्रा में विकसित किए जा रहे रुरल इंडस्ट्रियल पार्क अंतर्गत झाड़ू निर्माण के साथ ही जिले का पहला कोदो प्रसंकरण इकाई स्थापित किया गया है। विकासखंड के कई ग्रामों में माइनर मिलेट्स कोदो, कुटकी, सामा बहुतायत में पाया जाता है लेकिन इसके प्रसंस्करण के लिए जिले में कोई भी इकाई स्थापित नहीं थी न ही इसके प्रसंस्करण के लिए संभाग में किसी भी दुकान में इसकी मशीन उपलब्ध थी। इस कारण अप्रसंस्कृत कोदो विक्रय करना ग्रामीणो की मजबूरी थी। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वकांक्षी रुरल इंडस्ट्रियल पार्क के निर्माण से कोदो प्रसंकरण इकाई स्थापित होने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इसके अतिरिक्त रीपा अंतर्गत मिट्टी के बर्तन निर्माण एवं लकड़ी के फर्नीचर निर्माण जैसे गुड़ी गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

ChatGPT Image Jun 19, 2026, 03_57_34 PM

Related Articles

Back to top button