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Haryana News मनुमुक्त ट्रस्ट द्वारा हिंदी पत्रकारिता-दिवस पर विचार-गोष्ठी आयोजित

इलेक्ट्राॅनिक और सोशल मीडिया के दौर में भी कम नहीं हुआ है प्रिंट मीडिया का महत्त्व : कांता भारती

रिपोर्टर सतीश नारनौल हरियाणा

नारनौल  समकालीन परिदृश्य में मीडिया की भूमिका महत्त्वपूर्ण ही नहीं, बहुआयामी भी है। यह कहना है पाक्षिक ‘पक्षधर’ और दैनिक ‘नित्य हलचल’ की पूर्व संपादक कांता भारती का। मनुमुक्त ‘मानव’ मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा हिंदी पत्रकारिता-दिवस के उपलक्ष्य में ‘समकालीन परिदृश्य में मीडिया की भूमिका’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय विचार-गोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता उन्होंने कहा कि भले ही आज इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया का दौर है, लेकिन प्रिंट मीडिया का महत्त्व भी कम नहीं हुआ है। किशनलाल पब्लिक काॅलेज, रेवाड़ी के प्रोफेसर एवं पत्रकारिता के शोधार्थी मुकुट अग्रवाल ने पत्रकारिता में निष्पक्षता और पारदर्शिता को जरूरी बताते हुए कहा कि सुविधा-भोगी और अवसरवादी पत्रकारिता से न तो स्वस्थ लोकमत का निर्माण होता है और न ही लोकतंत्र का हित। सिंघानिया विश्वविद्यालय, पचेरी बड़ी (राजस्थान) के कुलपति डॉ उमाशंकर यादव ने स्पष्ट किया कि आज अधिकतर समाचार-पत्र और न्यूज चैनल राजनीतिक दलों के पक्षधर और प्रवक्ता बनकर रह गये हैं, जिसके कारण जनता तक सही सूचनाएं नहीं पहुंच पा रही हैं। अतः पत्रकारों के लिए आत्मचिंतन करना जरूरी है। प्रसार भारती, नई दिल्ली के पूर्व संयुक्त निदेशक डाॅ राजेंद्र उपाध्याय ने मीडिया को लोकतंत्र का प्रहरी और चौथा स्तंभ बताते हुए अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि जनतंत्र में जनमत को अभिव्यक्ति मीडिया द्वारा ही मिलती है, अतः मीडिया का सशक्त होना आवश्यक है। उन्होंने ग्रामीण पत्रकारिता के विकास पर भी बल दिया। इससे पूर्व विषय-प्रवर्तन करते हुए चीफ ट्रस्टी और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ रामनिवास ‘मानव’ ने जोर देकर कहा कि मीडिया की भूमिका निष्पक्ष और रचनात्मक होनी चाहिये। फेक न्यूज, गलाकाट प्रतियोगिता और मीडिया ट्रायल ने मीडिया की प्रतिष्ठा को धूमिल किया है। उन्होंने ‘पत्रकारिता : तब और अब’ शीर्षक से अपने दोहे भी प्रस्तुत किये। उनका एक दोहा देखिये- “राजनीति हो, खेल हो, या कोई व्यापार। सबकी उन्नति के लिए, सर्वोत्तम अखबार।।” इस अवसर पर अटेली के साहित्यकार और शिक्षाविद् डॉ छतरसिंह वर्मा ने हिंदी पत्रकारिता के विकास-क्रम पर प्रकाश डालते हुए इसके महत्त्व को रेखांकित किया, वहीं विचार-गोष्ठी के अंत में अंगवस्त्र, सम्मान-पत्र और स्मृति-चिह्न भेंट कर ट्रस्ट द्वारा डाॅ राजेंद्र उपाध्याय को, हिंदी पत्रकारिता के विकास में उनके विशिष्ट योगदान के दृष्टिगत, सम्मानित भी किया गया।

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