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Haryana News सीएम के आदेश के बाद भी ब्लड कैंसर का उपचार नहीं मिलने पर सिहमा के प्रवीण ने दम तोड़ा 5 दिन पहले सिहमा में सीएम ने जनसवांद कार्यक्रम में मरीज का इलाज करवाने के सीएमओं को निर्देश दिये थे

तहसील-उपतहसील का खेल खेलते रह गए और लाचार प्रवीण मुख्यमंत्री के आश्वासन पर उपचार की बाट जोहता हुआ जिंदगी की लड़ाई हार

रिपोर्टर सतीश नारनौल हरियाणा

गांव सिहमा में 25 मई को सीएम मनोहरलाल के जनसंवाद में कार्यक्रम में आयोजित ब्लड कैंसर से पीड़ित प्रवीण कुमार का इलाज स्वास्थ्य विभाग करवाने के आदेश के बावजूद 5 दिन बाद भी इलाज नहीं मिलने मरीज ने दम तोड़ दिया। ब्लड कैंसर से पीड़ित सिहमा निवासी 33 वर्षीय प्रवीण कुमार की तबियत बिगड़ने के बाद उसके परिजन अपने खर्चे से नारनौल लेकर गए स्थिति ज्यादा खराब होने पर डॉक्टरों ने पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया। रोहतक अस्पताल के गेट पर जीवन की अंतिम सांस ली। 27 वर्ष पूर्व मृतक लड़के के पापा शिवकुमार तथा 6 माह पूर्व मां मुन्नी देवी सडक़ दुर्घटना में मौत हो गई थी। अनुसूचित जाति से संबंध रखने वाला यह परिवार बीपीएल धारक है। गांव सिहमा में 25 मई को आयोजित सीएम मनोहरलाल के जनसंवाद में कार्यक्रम में पीड़ित चचेरी बहन ने मुख्यमत्री के सम्मुख अपने भाई का इलाज के करवाने के लिए फरियाद लगाई थी। जनसंवाद के 4 दिन बीत जाने के बाद भी सिविल सर्जन की ओर से कोई उपचार सुविधा नहीं मिली । कैंसर से पीड़ित मरीज की मौत होने गांव व परिवार में दु:ख का पहाड़ टूट गया है। अगर मरीज को जनसवांद के बाद ही नारनौल अस्पताल उपचार मुहैया करवा देते तो मरीज काल का ग्रास नहीं बनता। मृतक लड़के के छोटे भाई राहुल बौद्ध ने बताया कि अभी 11 मई को मेरा भाई कंपनी में काम करकर रेवाड़ी आ रहा था तभी रास्ते में चक्कर आ कर नीचे गिर पड़ा। वहां उपस्थित लोगों ने रेवाड़ी में निजी अस्पताल में भर्ती करवा दिया। अस्पताल में टेस्ट के दौरान हमें ब्लड कैंसर की सूचना मिली थी। उसके 2 दिन बाद ही हम झज्जर एम्स में गए जहां हमारी नहीं सुनी गई। ना तो हमारा आयुष्मान कार्ड मान्य किया ना ही हमारा बीपीएल राशन कार्ड मान्य किया।अभी मुख्यमंत्री के जनसंवाद कार्यक्रम में मेरी चचेरी बहन द्वारा मुख्यमंत्री के सामने कैंसर पीड़ित मेरे भाई की मदद के लिए गुहार लगाई। मुख्यमंत्री ने हमें आश्वासन दिया था सरकारी अस्पताल में आपका मुफ्त इलाज करवाएंगे। मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद चार बार हमने झज्जर एम्स के निजी खर्चे से चक्कर लगाए। स्वास्थ्य विभाग से हमें किसी प्रकार की कोई मदद नहीं मिली। मंगलवार को सीहमा के श्मशान घाट में कैंसर पीड़ित प्रवीन उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। बता दे कि आपको मृतक प्रवीण अपने पीछे दो छोटे भाई छोड़कर चला गया। मृतक का परिवार बेहद गरीब है। मृतक प्रवीण कंपनी में कार्य कर कर अपने परिवार का पेट पालता था। उसकी अंतिम यात्रा में ग्रामीणों के अलावा अनेक गणमान्य लोगों ने पहुंच कर श्रद्धांजली अर्पित की। फोटो- मृतक प्रवीण बाक्स- नेता और अधिकारी तहसील-उपतहसील का खेल खेलते रह गए और लाचार प्रवीण मुख्यमंत्री के आश्वासन पर उपचार की बाट जोहता हुआ जिंदगी की लड़ाई हार गया। क्या जनसंवाद कार्यक्रम महज आश्वासन के लिए हैं ? या मुख्यमंत्री के अनुसार अधिकारी उनको गुमराह कर रहे हैं। जो भी हो प्रवीण की मौत की जिम्मेदारी कौन लेगा, मुख्यमंत्री या अधिकारी।

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