Madhya Pradesh News सप्ताहिक श्रीमद् भागवत कथा की अमृत माई कथा का रसपान करने के लिए भक्तों का जनसैलाब उमड़ा

रिपोर्टर मुहम्मद ख्वाजा टीकमगढ़ मध्यप्रदेश
ग्राम आलमपुरा में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के माध्यम से उमड़ा भक्तों का महान सैलाब कथा व्यास परम पूज्य अमन कृष्ण जी महाराज के मुखारविंद से कथा का रसपान कराया जा रहा है पूजा व्यास जी ने बताया भक्ति एक ऐसी औषधि है के प्रभाव से ब्रह्म को भी न जाया जा सकता हैके प्रभाव से ब्रह्म को भी नचाया जा सकता है 5 वर्ष के बालक ध्रुव जी महाराज ने घोर तप करके अक्ल कोटी ब्रह्मांड नायक अपने समकक्ष आने के लिए बिवस कर दिया ऐसी कथा को सुनकर भक्त मन मुक्त हो गए एवं आनंद रूपी सागर में भक्ति रूपी गोता लगाने लगे पूज्य महाराज श्री ने ध्रुव चरित के उपरांत भक्त पहलाद के के चरित्र का वर्णन किया पूज्य महाराज श्री ने बताया कि भक्त के बस में भगवान होते हैं बिना भक्तों के भगवान भी प्रसन्न नहीं है एवं गजेंद्र मोक्ष की कथा को श्रवण कराया पूज्य महाराज श्री ने कहा जीवन रूपी गज को माया रूपी गृह ने पकड़ लिया हम और आप भी उस गज के समान जीवात्मा हैं माया रूपी अजगर शनै शनै हमें पकड़ता जा रहा है गजराज के समान बलशाली पूरे 1 में कोई नहीं था 50 पत्नियां डेढ़ सौ बच्चों का परिवार गजेंद्र का था जब गजेंद्र के पैर को ग्राह पढ़ लिया गजेंद्र ने अपने पुत्रों से सहायता मांगी पत्नी से सहायता मांगी पुत्र कुछ दिन तक पिता को निकालने का प्रयास करते रहे लेकिन एक पल भर ना हिला पाए प्यारे बंधुओं हमारी और आपकी भी इस गज रूपी हाथी के समान स्थिति है हम और आप अपने बच्चों के लिए अपने जीवन को भ्रमित कर देते हैं माया रूपी धन इकट्ठा करने में और वह बच्चे हमें छोड़ कर के चले जाते हैं मात पिता को अपने आप से अलग कर देते हैं जो 50 पत्नियां गजेंद्र के की थी जो सुलक्ष्मी भारी आए होती हैं अपने पति कोही अपना सर्वस्य मानकर उनके साथ अपना जीवन व्यतीत करती हैं जो कुलक्षणी स्त्री होती हैं उन्हें कितनी भी सुख सुविधा दी जावे फिर भी वह उस घर परिवार को त्याग देती है गजेंद्र के की जो 50 पत्नियां थी कुछ कुलक्षणी थी उस गजेंद्र को छोड़कर चली गई सुलक्ष्मी भार्या गजेंद्र के पास रुदन करती हुई बैठी रही जब प्यारे संसार हमें ठुकरा देता है तब हमें परमात्मा की याद आती है
गजेंद्र ने परमात्मा को पुकारा है कि हरगोविंद अब मेरे प्राणों की रक्षा करो गोविंद ने आकर के गजराज को ग्रह से मुक्त कराया और गजेंद्र के ऊपर अपनी कृपा की आगे कथा का वर्णन करते हुए पूज्य महाराज श्री ने समुद्र मंथन एवं बलि बामन चरित्र की कथा को सुनाया की अक्ल कोटी ब्रह्मांड नायक स्वयं राजा बली के बली के घर दीक्षा मांगने के लिए पहुंचे बली ने बामन को तीन पग भूमिका दान किया दो पैग में भगवान ने समस्त लोगों को नाप लिया तीसरा पग भगवान ने बलि से पूछा कहां रखूं तो बलि कहते हैं महाराज दान बड़ा होता है या दानी बली ने कहा महाराज मैं रानी हूं आप अपना तीसरा पग मेरे सर पर रखें गोविंद ने बलि के ऊपर अपनी कृपा की रामचरितमानस की कथा को श्रवण कराते हुए कृष्ण जन्म की कथा व्यास जी ने सुनाया पूज्य महाराज श्री ने बताया कि जब-जब धर्म की हानि होगी अभिमानी बढ़ जाएंगे तब तब प्रभु अपने भक्तों के कष्ट का हरण करने के लिए अवतार लेंगे कंस बड़ा दुराचारी था जिस का उद्धार करने के लिए परमात्मा स्वयं देवकी वासुदेव के यहां अवतार हुए कंस ने देवकी एवं वासुदेव को कारागृह में बंदी बना करके रखा था जैसे ही परमात्मा का प्राकट्य हुआ वसुदेव ने परमात्मा को लिया तो महाराज माया रूपी बंधन परमात्मा के स्पर्श मात्र से खुल जाते हैं और सुख में बिठाकर के नंद राय के भवन में यशोदा के पास अपने बालक को थोड़ा आते हैं और वहां से कन्या को लेकर उन्हें कंस के कारागृह में आप समस्त कथा को छोड़ कर आते हुए भक्तजन के भीतर परम सुख की अनुभूति हुई कथा मुख्य यजमान कंबोद साहू के सुपुत्र मनीष साहू जी के निज निवास पर श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा का वाचन की जा रही है


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