Madhya Pradesh News खटोला हर कोई जानने को है हैरान रहस्य

रिपोर्टर पवन रैकवार छतरपुर मध्य प्रदेश
बड़ामलहरा इक्कीसवीं सदी में मुख्यालय से महज सात किलो मीटर दूर महराजगंज ग्राम पंचायत अंतर्गत ग्राम खटोला में आज भी कुशवाहा जाति के अलावा कोई अन्य जाति नही रहती है । इतिहास के पन्नो में पन्द्रहवी सोलहवीं सदी के मध्य राजा दलपत शाह की बेटी तथा गढ़ा कोटा राज्य के गोंड़ शासक राजा ह्रदय शाह की पत्नी महारानी दुर्गावती के शासन काल मे खटोला परगना का उल्लेख मिलता है जो चंदेली शासन की सीमा पर बसा हुआ गोंड़वाना राज्य के बुन्देलखण्ड में खटोला और शाहगढ़ में मशहूर सीमावर्ती गोंडवाना राज्य के किले हुआ करते थे जो आज भग्नावशेष है खटोला किले में सेनापति सूरजशाह तथा शाहगढ़ में बख्तब्ली शाह को सूबेदार के रूप में तैनात किया गया था अकबर की सेना से युद्ध के दौरान महारानी दुर्गावती के मारे जाने के6 बाद सूरज शाह और बख्त बली शाह ने अपने अपने राज्य घोषित कर खटोला और शाहगढ़ को स्वतंत्र गोंड़वाना राज्य घोषित कर स्वयं राजा बन गए और प्रजा व राज्य की देख रेख करने लगे उस समय खटोला महराजगंज में राज्यवासियों को पानी उपलब्ध कराने के लिए बावन कुएं चौरासी बावड़ी व सात तालाबो का निर्माण कराया गया था जिनके जीर्ण शीर्ण अवशेष उस समय प्रजा को पानी उपलब्ध कराने के लिए शासक कितने जिम्मेदार होते थे उसकी तस्बीर बयाँ करते है । जिस जगह कभी राजसी गतिविधियां संचालित होती थी वह आज गुंजन पहाड़ के नाम से इलाके में विख्यात है जहाँ बने राजा सूरज शाह के किले के अंदर राजा की मर्जी के बगैर कोई परिंदा भी अंदर नही जा सकता था राजा अपनी धार्मिक व न्याय प्रिय कौमी एकता को लेकर काफी लोकप्रिय हो चुके थे उनके राज्य में सभी धर्म और वर्ग के लोगो का समावेश था जिसको लेकर अकबर शासन काल मे विलय हो चुके अन्य राज्यो के राजा सूरज शाह से जलने लगे थे । इसी दौरान देवगिरि से युद्ध और लूट पाट कर खटोला के रास्ते वापिस दिल्ली जा रहे अकबर के सेनापति आसिफ खान व उसकी सेना को युद्ध मे मारकर व लूटा हुआ समान लूट कर महारानी दुर्गावती की मौत का बदला सूरज शाह ने अपने सैनिकों के बल पर ढाई पहर के युद्ध में लिया जिसमे सवा पहर का समय आसिफ खान से लूटे हुए जवाहरात को समेटने में लगा जबकि किवदंती ये है कि सूरज शाह राजा अपने किले की सात मंजिला छत पर रानी के साथ बैठे थे उसी समय किले के सामने तालाब पर एक बृद्ध महिला नहा रही थी उसके तन पर जो साड़ी थी उसको आधा पहने थी और आधा सुखा रही थी जिसे देख राजा रानी द्रवित हो गए और सेनिको को बुलाकर अपनी आंखों में पिसी हुई लाल मिर्च की पट्टी बंधवा ली तभी उनकी कुल देवी चोरासन ने उनसे ऐसा ना करने को कहा तो राजा ने उनसे पहले सवा पहर सोने की बरसात करने को कहा तब सोने की बरसात हुई और राज्य के लोग समृद्ध हो गए जबकि कुछ लोग कहते है कि उस समय खटोला राज्य में भीषण सूखा पड़ा तालाब कुएं बावड़ी सूख गए लोग पानी को त्राहि त्राहि कर अन्य राज्यो को पलायन करने लगे जानवर प्यासे मरने लगे तब राजा ने कुल देवी की पूजा की और उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर इतनी तेज मूसलाधार बारिश हुई कि सवा पहर में खटोला राज्य के सभी जल स्रोत कुएं बावड़ी तालाब पानी से लबालब हो गए और लोग खुशहाल हो गए ।उक्त राज्य में खुशहाली का ये आलम था कि खटोला में सप्ताह के सातों दिन बाजार लगते थे और बाहरी राज्यो के सौदागर सेठ साहूकार खरीद दारी करने आते थे गोंड़ राज्य में लोहा अयस्क प्रचुर मात्रा में पाया जाता था जिसकी भट्टियां भी कई जगह संचालित थी राज्य की समृद्धता को देखते हुए पड़ोसी राज्य के शासक राजा सूरज शाह से जलने लगे थे उस समय एक अफवाह फैलाई गई कि सूरज शाह के राज्य में गौवंश के ऊपर अत्याचार हो रहा है जिसको लेकर ओरछा राज्य के बुंदेली शासक राजा बीरसिंह जू देव ने मथुरा विन्द्रावन से वापिस आकर खटोला पर चढ़ाई करने के लिए अपनी फ़ौज लाव लश्कर के साथ महाराज गंज आ गए और जहाँ सूरज शाह के घोड़ो के लिये घुड़साल बनी थी वही बाहर बने एक परकोटा में ठहर गए लेकिन छः माह बीत जाने के बावजूद भी वह खटोला किले के पास जाने में कामयाब नही हुए तो उन्होंने अपने गुप्तचरों के माध्यम से राजा सूरज शाह के किले के अंदर काम करने वाली महिला के सहारे किले के अंदर गुप्त रास्ते से सेना सहित राजा के किले में राजा के पास पहुँच गए जहाँ राजा रानी किले के ऊपर बैठे थे अपने पास राजा बीर सिंह जू देव को देखकर गोंड़ शासक हक्का बक्का रह गए और रानी समेत किले की सातवीं मंजिल से छलांग लगा दी बुंदेली सेना और गोंड़ सेना में भयंकर युद्ध हुआ मारकाट हुई लूट पाट करते हुए बुंदेली सेना ने राजा बीरसिंह जू देव के नेतृत्व में नर्मदा नदी के किनारे वरमान तक फैले गोंडवाना राज्य को ध्वस्त कर दिया और उस तोप को जिसका गोंडवाना राज्य को ध्वस्त करने में इस्तेमाल किया गया था माँ नर्मदा के दिये गए स्वप्न के अनुसार राजा बीरसिंह जू देव ने नर्मदा की गोद मे विसर्जित कर दिया था ।

युद्ध के बाद वापिस लौटते वक्त उन्होंने महाराज गंज में किले का निर्माण करा कर अपनी सेना के बलशाली योग्य सेनापति जोगी को महराजगंज से खटोला के बाशिंदों की देख रेख को नियुक्त कर दिया अब खटोला का संचालन महाराज गंज से होने लगा था जिससे खटोला के लोग अपने आप को उपेक्षित महसूस करने लगे और खटोला को छोड़कर अन्य जगह रानीताल सेंधपा बंधा फुटवारी मखनपुरा आदि जगहों में जाकर बस गए खटोला को छोड़कर केवल कुशवाहा ( काछी) जाति के लोग नही गए कहते है कि बुंदेली सेना से युद्ध मे गोंड़ सेना का साथ कुशवाहा (काछी) जाति ने दिया था । जिसके चलते आज भी जो कभी गोंडवाना राज्य हुआ करता था
अब महज खटोला गांव में चार सौ की आबादी में पूरे परिवार कुशवाहा के हैं ।किवंदन्ति है कुशवाहा जाति के अलावा कोई अन्य जाति का व्यक्ति मकान बना कर खटोला में नही रह सकता किसी ने अगर कोसिस की तो उसके साथ अनर्थ हुआ उसे अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है उक्त अनजाने भय के चलते कोई सरकारी कर्मचारी भी खटोला में निवास नही करता हालांकि उक्त घटना से गुजरे हुए ऐसे किसी शख्स के बारे में पता नही चल सका (रात्रि के अंधेरे में दफ़ीना खोदने वाले हो जाते है सक्रिय ) किले क्षेत्र में जगह जगह खोदे गए गड्ढे इस बात की गवाही दे रहे है कि जमीन में दबा हुआ दफीना खोदने वाले सक्रिय है जो रात के अंधेरे में अपने काम को अंजाम देते है । (मंडला जबलपुर वरमान के लोग आते है पूजा करने) खटोला देवी चोरासन देवी फूटा मामा की पूजा करने बड़ी संख्या में लोग गोंड़ वंश का वंशज बताते हुए पूजा करने आते है । (बावड़ी कुँए छतिग्रस्त तालाब अभी है जीवित) खटोला राज्य में बनाई गई 84 बावड़ी 52 कुँए और सात तालाबो में से सभी कुँए बावड़ी छतिग्रस्त हो गयी है जबकि सात तालाबो में नया ताल गढ़ी ताल कनकुवा ताल खटोला ताल जीवित अवस्था मे है जबकि तालर ताल फूटा ताल डेरा ताल के मात्र अवशेष बचे है जिस पर ग्रामीण कब्जा कर खेती कर रहे है ।



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