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Uttar Pradesh News  वाराणसी अंतरराज्यीय बच्चा चोर गिरोह के 10 आरोपित बंदी, मासूम के मिलने पर माता-पिता के चेहरे पर लौटी रौनक कमिश्नरेट पुलिस ने अंतरराज्यीय बच्चा चोर गिरोह का राजफाश किया है।

रिपोर्टर निखिलेश कुमार मिश्रा वाराणसी उत्तर प्रदेश

 इस गिरोह के 10 सदस्यों को झारखंड राजस्थान व बनारस से गिरफ्तार कर उनके कब्जे व निशानदेही पर अगवा कर बेचे गए तीन बच्चों को बरामद किया अंतरराज्यीय बच्चा चोर गिरोह के 10 आरोपित बंदी, मासूम के मिलने पर माता-पिता के चेहरे पर लौटी रौनक अंतरराज्यीय बच्चा चोर गिरोह के 10 आरोपित बंदी, मासूम के मिलने पर माता-पिता के चेहरे पर लौटी रौनक

वाराणसी : कमिश्नरेट पुलिस ने अंतरराज्यीय बच्चा चोर गिरोह का राजफाश किया है। इस गिरोह के 10 सदस्यों को झारखंड, राजस्थान व बनारस से गिरफ्तार कर उनके कब्जे व निशानदेही पर अगवा कर बेचे गए तीन बच्चों को बरामद किया गया। आरोपितों में मास्टर माइंड समेत तीन महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस ने एक कार भी बरामद की है जिससे रामचंद्र शुक्ल चौराहे से एक बच्चे को अगवा किया गया था। पुलिस को यह सफलता 100 से अधिक सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रानिक सर्विलांस की मदद से मिली। पुलिस आयुक्त मुथा अशोक जैन ने पुलिस टीम को एक लाख रुपये से पुरस्कृत करने की घोषणा की। सबसे पहले हाथ लगा कार ड्राइवर बच्चा चोर गिरोह की पहली सफलता कार ड्राइवर के रूप में पुलिस को मिली। दरअसल, 14 मई की रात भेलूपुर के रवींद्रपुरी के रामचंद्र शुक्ल चौराहे पर अपने माता – पिता के साथ सो रहे चार वर्षीय बच्चे को कार सवारों ने अगवा कर लिया था। दो दिन तक बच्चे के माता- पिता उसे तलाशते रहे।
इस बीच दारोगा शिवम श्रीवास्तव को पता चला कि एक दंपती अपने बच्चे की तलाश में परेशान है। इसके बाद दारोगा ने सीसीटीवी कैमरे की फुटेज को देखा तो पता चला कि कार सवार बच्चे को अगवा कर ले गए हैं। इसके बाद सीसीटीवी फुटेज से अटिंगा कार का नंबर यूपी65ईआर5183 का पता चला।

इसके जरिए पुलिस कार मालिक के पास पहुंची तो पता चला कि कार किराए पर दी गई है। हालांकि कार मालिक की इसमें संलिप्तता नहीं मिली। कार मालिक से मिली जानकारी के आधार पर किराए पर कार चलाने वाले मंडुआडीह के शिवदासपुर स्थित सिंदुरिया पोखरी निवासी आरोपित ड्राइवर संतोष गुप्ता पुलिस के हाथ लग गया।
घटना के समय संतोष की कार चला रहा था। कार में उसका साथी विनय मिश्रा मौजूद था। विनय ने ही बच्चे को उसके माता-पिता के बीच से उठाया था। राजस्थान व झारखंड माड्यूल का पता चला पूछताछ में कार ड्राइवर ने पुलिस को बताया कि हम लोगों का एक गिरोह है। हम लोग गरीब व भिक्षा मांग कर जीवन यापन करने वाले परिवार के बच्चों को निशाना बनाते हैं। ऐसे परिवार पुलिस तक नहीं पहुंच पाते हैं। इन बच्चों की चोरी कर राजस्थान, झारखंड व बिहार में दलालों के माध्यम से दो से पांच लाख रुपये में निसंतान दंपती या जरूरत मंद लोगों को बेच देते हैं। जो पैसा मिलता है उसे बांट लेते हैं। mरामचंद्र शुक्ल चौराहे से अगवा बच्चे को अपनी साली शिखा के पास रखा था। शिखा ही गिरोह की मास्टरमाइंड है। महिला ने बच्चे को राजस्थान भेज दिया। इसी तरह चौकाघाट से एक बच्ची, नदेसर से एक लड़का, नगवा से एक बच्ची, प्रयागराज के अलोपीबाग ओवरब्रिज के नीचे से एक बच्चा व विंध्याचल स्टेशन के पास से भाई-बहन को अगवा कर बेच दिए हैं। 7 बच्चों को किया गया अगवा पूछताछ के आधार पर झारखंड के हजारीबाग से यशोदा देवी को एक बच्चे के साथ गिरफ्तार किया गया। यह बच्चा विंध्याचल से अगवा किया था। इसकी बहन का पता लगाया जा रहा है। भीलवाड़ा, राजस्थान से गिरोह के भवर लाल को गिरफ्तार किया गया। उसके कब्जे से लंका के नगवा से अगवा की गई बच्ची बरामद की गई। अब तक सात बच्चों को अगवा करने की जानकारी मिली है।

एसीपी अपराध व मुख्यालय संतोष कुमार सिंह ने मीडिया को बताया कि गिरोह के अन्य सदस्यों के बाबत जानकारी की जा रही है। झारखंड, राजस्थान, गुजरात, व उत्तर प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर अन्य अगवा बच्चों की तलाश व आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। माता-पिता के चेहरे पर लौटी रौनक चार वर्षीय मासूम के मिल जाने से उसकी माता चंदा और पिता संजय के चेहरे पर रौनक लौट आई। वे अपने बच्चे को सामने देखकर काफी प्रसन्न हो गए। एक सप्ताह बाद बेटे को देखकर गले से लिपटा लिया। बेटा भी खूब रोया। मां ने बताया कि गरीबी के कारण ठौर -ठिकाना नहीं होने से इधर – उधर मांगकर पेट पालन करना पड़ता है। पिता संजय भी खुश हैं। बताया कि वह नगर निगम में सफाई कर्मी हैं। गटर में उतर कर सीवर व नालों की सफाई करने पर जो मिल जाता है, उसी से काम चल जाता है।
मोबाइल से खुला राज गिरफ्तार शिखा गिरोह की मास्टरमाइंड बताई जा रही है। वह आरोपित मनीष जैन के साथ तय करती थी कि बच्चे को कहां और कितने में बेचना है। शिखा ने कहने को तो अपनी बेटी की शादी राजस्थान में की थी लेकिन पुलिस की जांच में पता चला कि उसने अपनी बेटी का भी सौदा किया था। जब लिंक मिलना शुरू हुआ तो मनीष जैन का पता चला जो ग्राहक सेट करता था। बच्चे को सौंपने में पहचान पत्र बना अड़ंगा बच्चे मिलनी की खुशी तो है लेकिन उसे प्राप्त करने में परेशानी हो रही है। यह विडंबना है कि माता- पिता का कोई पहचान पत्र नहीं है। उनका कोई निश्चित ठिकाना नहीं होने से न तो आधार कार्ड बन पाया है और न ही कोई अन्य विकल्प। इसी कारण पुलिस ने उन्हें जब से बच्चा गायब हुआ है तभी से थाने पर बैठा रखा है। कारण यह है कि माता-पिता का ठौर-ठिकाना न होने से बच्चा मिल जाने पर उन्हें खोजने की जहमत न उठानी पड़ जाए। जब बच्चा मिल गया तो माता-पिता को सौंपने में पहचान पत्र की अनिवार्यता ने उन्हें काफी परेशान कर रखा है। वैसे भेलूपुर पुलिस बच्चे को राम कटोरा स्थित काशी अनाथालय ले जाने का प्रबंध कर रही है। जबतक कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाएगी, बच्चा अनाथालय के संरक्षण में रहेगा।

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