Rajasthan News अपनी प्रोफेशनल लाइफ में देश के विभिन्न क्षेत्रों में रहते हुए वहाँ की संस्कृति और खानपान में अत्यंत रुचि रखने का एक अलग ही आनंद है.

रिपोर्टर संजय मीणा किशोरपुरा झुंझुनू राजस्थान
इसी सिलसिले में आज से करीब 36 साल पहले मेवाड़ क्षेत्र में चित्तौड़ सीमेंट वर्क्स प्रवास के दौरान चित्तौड़ शहर में रहने का सौभाग्य मिला. खानपान के शौकीन होने के कारण हमने ये अनुभव किया कि मेवाड़ और मारवाड़ के ज़ायके में ज्यादा अंतर नहीं है. सिर्फ मोटा अनाज में जहां मेवाड़ में मक्की खाई जाती है तो मारवाड़ में बाजरा. अन्य कोई फर्क नहीं. इस दौरान हमने वहां पर खजूर के पेड़ के तने का रस “नीरा” पीने का बहुत आनंद लिया. ठंडा मीठा पौष्टिकता से भरपूर ये पेय गर्मी के मौसम में बहुत स्थानों पर उपलब्ध होता है, जिस प्रकार कई जगह गन्ने के रस की रेहड़ी लगाते है उसी प्रकार नीरा की भी घुमटी लगाते है. इस प्राकृतिक पौष्टिक पेय नीरा पीने को लेकर समाज में कई तरह की भ्रांतियां हैं. कोई इसे नशीला बताता है तो इसे ताड़ी ही कहता है. नीरा का सेवन मेवाड़ , गुजरात के तटीय इलाकों में या दक्षिण भारत में ही नहीं श्रीलंका, इंडोनिशिया, थाईलैंड, कंबोडिया में बड़े पैमाने पर किया जाता है. आखिर ये नीरा है क्या और नीरा और ताड़ी में क्या अंतर है ? नीरा पीना क्यों स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है ? आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ताड़ और खजूर के पेड़ से निकलने वाले ताजे रस को नीरा कहा जाता है. जब यही रस काफी देर तक बाहर रह जाता है तो इसमें फर्मेटेशन (खमनीकरण) हो जाता है तो ये “ताड़ी” बन जाता है.
नीरा क्या है ?
ताड़ व खजूर के वृक्षों से निकलने वाले ताजे रस को नीरा कहते है. इसमें शकर्रा (Sugar) और खनिज तत्व भरपूर मात्रा मे मिलते है. यह पीने मे मीठा और स्वादिष्ट होता है, तथा इसको पीने से ताजगी आती है और मन खुश रहता है. नीरा पीने से ताजगी महसूस होती है.जबकि ताड़ी पीने से हल्का नशा होता है. नीरा पीने में मीठा होता है जबकि ताड़ी खट्टा और कड़वा लगता है.
नीरा में पाए जाने वाला पौष्टिक तत्व:
नीरा में 84.72 फीसदी जल रहता है, जबकि कार्बोहाइड्रेट 14.35 फीसदी, प्रोटीन- 0.10 फीसदी, वसा- 0.17 फीसदी, मिनरल- 0.66 फीसदी होता है. मिनरल्स में कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम, सोडियम और फॉस्फोरस की भरपूर मात्रा होती है. साथ ही विटामिन सी और विटामिन बी कॉम्पलेक्स भी भरपूर मात्रा में मौजूद होता है. यानि 100 ml नीरा से 110 कैलोरी एनर्जी मिलती है. नीरा न तो अम्लीय है और न ही क्षारीय है ये पानी से कुछ ही भारी है.
नीरा पीने फायदे:
नीरा डायबिटीज के रोगियों के लिए लाभकारी है. नीरा पीने से पाचक-रस (digestive juices) की वृद्धि होने के साथ कब्ज की शिकायत भी दूर हो जाती है. इसलिए इसके सेवन से पेट सम्बन्धी रोग (Stomach disease) दूर हो जाते है. नीरा के सेवन से रक़्त मे हीमोग्लोबिन की वृद्धि होती है. इसलिए रक़्त (Blood) की कमी से ग्रस्त रोगियों के लिए इसका सेवन गुणकारी है. पीलिया की यह बहुत अच्छी दवा मानी जाती है. इसलिए यह पतले-दुबले लोगों के लिए एक अच्छा शक्तिवर्धक औषध है. यह मूत्रवर्धक है और मूत्र मार्ग मे होने वाली जलन को शाँत करता है. गुर्दे सम्बन्धी रोग और आँख के रोगों मे भी नीरा बेहद लाभकारी सिद्ध हुआ है. नीरा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पोषण देने के साथ-साथ रोग से छुटकारा दिलाने की अदभुत क्षमता होती है. गन्ने के रस की तुलना मे नीरा बहुत गुणकारी होता है, क्योंकि नीरा और गन्ने के रस मे शकर्रा की मात्रा क्रमशः 14.35 और 21.8 प्रतिशत होती है तथा खनिज लवण की मात्रा क्रमशः 0.66 प्रतिशत और 0.30 प्रतिशत होती है. नीरा इतना पौष्टिक होता है कि दोपहर के समय यदि स्कूली बच्चों को रोज एक गिलास नीरा पिलाया जाए तो, उनकी आम खुराक मे किसी भी पौष्टिक तत्व की कमी को पूरा किया जा सकता है. सुबह के वक़्त नीरा पीने से न केवल न केवल छोटी आँत का कृमि निकलता है, बल्कि दोबारा उत्पन्न होने से रुक सकता है. गर्भवती स्त्रियों द्वारा नीरा का सेवन करने से न केवल पैदा होने वाले बच्चें का रंग बहुत साफ होता है, बल्कि पैदा होने के बाद जच्चा-बच्चा दोनों का स्वास्थ्य भी ठीक रहता है. यह खमीर और विटामिन बी कॉम्प्लेक्स का अच्छा स्रोत है.
नीरा और ताड़ी मे अंतर:
ताड़ व खजूर के ताजे रस को नीरा कहते है, लेकिन अगर इसे खुला रख दिया जाए, तो इसमें अपने-आप ही खमीरीकरण या किण्वन के चलते झाग और गैस निकलने लगती है. इस तरह नीरा कुछ देर के बाद ताड़ी मे बदल जाता है. नीरा पीने से जरा-सा भी नशा नहीं होता है, लेकिन ताड़ी पीने से कुछ नशा हो जाता है, क्योंकि खमीरीकरण या किण्वन के चलते इसमें लगभग 4 % एल्कोहल पैदा हो जाता है. ताड़ व खजूर के ताज़ा रस मे पुरानी ताड़ी का गाद खमीर के रूप मे मिला दिया जाए तो खमीरीकरण या किण्वन की प्रक्रिया तेज हो जाती है और एल्कोहल भी 4 % से अधिक बनता है. कुछ लोग इसी ताड़ी को मादक-पेय के रूप मे इस्तेमाल करते है. नीरा स्वाद मे मीठा होता है, लेकिन ताड़ी ) खट्टी होती है. ताड़ी की अपेक्षा नीरा (ताजे रस) मे जीवनोपयोगी तत्व अधिक होते है! नीरा का ताज़ा रस पीने मे ज्यादा देर न करें, क्योंकि बीतते समय के साथ ज्यादा बाहरी हवा लगने से नीरा अपने-आप ही धीरें-धीरें ताड़ी मे बदलने लगता है. एल्कोहल की मौजूदगी के चलते सामान्य मात्रा मे ताड़ी पीने से नशा होता है, लेकिन शराब जितना नहीं. पर बहुत अधिक मात्रा मे ताड़ी पीने से शराब जैसा ही नशा आ जाता है. लिहाजा ताड़ व खजूर का ताज़ा रस यानि नीरा ही पीना चाहिए, ताड़ी ) नहीं पीनी चाहिए. सच्चाई तो यह है कि नीरा क्षय रोग (T.B.) की रामबाण दवा है. क्षय रोग (T.B.) के इलाज के लिए इस्तेमाल मे लाई जाने वाली जितनी भी ऐलोपेथिक दवाएं है, सब-की-सब नीरा के सामने बहुत ही कमतर साबित हुई है. रोज सुबह-शाम 1½ गिलास नीरा पीने से दो-तीन महीने मे क्षय रोग (T.B.) के मरीज बगैर कोई ऐलोपेथिक दवा लिए ठीक हो जाते है. केवल एक बात का ध्यान रखना चाहिए कि नीरा का सेवन तुरंत करना चाहिए, क्योंकि ज्यादा देर तक बाहर रहने पर ये ताड़ी का रूप लेने लग जाता है. इसीलिए नीरा विक्रेता इसे एकदम ठंडा यानी चिल्ड ही रखते हैं.

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