Bihar News विश्वमें अकेला ब्राह्मण ही चाहता है की आपके घरमें शुभ कार्य होते रहे।
एक वकील ये आशा करता है की आप किसी मुसीबतमें फँसे।

रिपोर्टर गौतम कुमार झा बेगूसराय बिहार
एक डॉक्टर ये आशा करता है की आप बीमार हो।एक मक़ान मालिक ये आशा करता है की आप अपना घर ना खरीदे।एक दन्त चिकित्सक ये आशा करता है की आपके दाँत ख़राब हो।एक यन्त्र विज्ञानी ये चाहता है की आपकी गाड़ी ख़राब हो जाए। एक पत्रकार ये उम्मीद करता है की कोई घटना घट जाए।परन्तु केवलएक ब्राह्मण ये उम्मीद करता है की आपके परिवार में कोई न कोई शुभ कार्य हो।ब्राह्मण धन का भूखा नही,सम्मान का भूखा होता है। “ब्राह्मण” क्या है? कौन है?भगवन कृष्णने क्या कहा है?बनिया धनका भूखा होता है।क्षत्रिय दुश्मन के रक्त का प्यासा होता है।गरीब अन्नका भूखा होता है।पर ब्राह्मण?ब्राह्मण केवल प्रेम और सम्मान का भूखा होता है।ब्राह्मणको सम्मान दे दो तो वो तुम्हारे लिए जान देने को तैयार हो जायेगा।अरे दुनिया वालो आजमाकर तो देख लो हमारी दोस्ती को।मुस्लमान अशफाक उल्लाखान हाथ बढ़ाता है, हम बिस्मिल बनकर गले लगा लेते है। क्षत्रिय चन्द्रगुप्त बनकर पैर छु लेता है, हम चाणक्य बनकर पूरा भारत जितवा देते है।शिख भगतसिंह बनकर हमारे पास आता है, हम चंद्रशेखर आजाद बनकर उसे निडर बना देते है। कोई वैश्य गाँधी बनकर हमे गुरु मान लेता है, हम गोपाल कृष्ण गोखले बनकर उसे महात्मा बना देते है।और कोई शुद्र शबरी बनकर हमसे वर मांगती है, तो हम उसे भगवान से मिलवा देते है।अरे एक बार तो सम्मान देकर देखो हमे कर्त्तव्य ना पूरा करे तो कहनाजय जय श्रीराम। जय जय श्री परशुराम।। पुराणों में कहा गया है विप्राणां यत्र पूज्यंते रमन्ते तत्र देवता lअर्थात्जिस स्थान पर ब्राह्मणों का पूजन हो वहा देवता भी निवाश करते है अन्यथा ब्राह्मणोंके सम्मानके बिना देवालय भी शून्य है।इसलिए ब्रह्मणातिक्रमो नास्ति विप्रा वेद विवजीरताःश्री कृष्ण ने कहा है- ब्राह्मण यदि वेद से हिन् है तब पर भी उसका अपमान नही करना चाहिए।क्योंकि तुलसीका पत्ता क्या छोटा क्या बड़ा वह हर अवस्था में कल्याण ही करता है ब्राह्मणोस्य मुखमासीद्वेदों ने कहा है ब्राह्मण विराट पुरुष भगवानके मुखमें निवास करते है इनके मुखसे निकले हर शब्द भगवान् का ही शब्द है, जैसा की स्वयं भगवान् ने कहा है कीविप्र प्रसादात् धरणी धरोहमविप्र प्रसादात् कमला वरोहम
विप्र प्रसादात् अजिता$जितोहमविप्र प्रसादात् मम् राम नामम् । अर्थात ब्राह्मणोंके आशीर्वादसे ही मैंने धरती को धारण कर रखा है अन्यथा इतना भार कोई अन्य पुरुष कैसे उठा सकता है, इन्ही के आशीर्वादसे नारायण होकर मैंने लक्ष्मीको वरदानमें प्राप्त किया है, इन्हीके आशीर्वादसे मैं हर युद्ध जित गया और ब्राह्मणों के आशीर्वाद से ही मेरा नाम “राम” अमर हुआ है, अतः ब्राह्मण सर्व पुज्यनीय है। कृपया प्रत्येक ब्राह्मण कम से कम 11 ब्राह्मणों को भेजें

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