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Madhya Pradesh News सुरक्षित मातृत्व दिवस 11 अप्रैल को “राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस” मनाया गया

स्वास्थ्य, पोषण एवं वित्तीय सहायता के प्रति गर्भवती महिलाओं को जागरूक किया गया

✍🏻 रिपोर्टर देवेन्द्र कुमार जैन भोपाल मध्यप्रदेश

गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की उचित देखभाल और प्रसव संबंधी जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से हर साल 11 अप्रैल को राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस मनाया जाता है। गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाएं प्रदान करने के लिए सुरक्षित मातृत्व दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य संस्थाओं में जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गई। जिले के समस्त उप स्वास्थ्य केंद्रों एवं हेल्थ एंड वैलनेस केंद्रों में गर्भवती महिलाओं की डिजिटल हिमोग्लोबीनोमीटर द्वारा हिमोग्लोबिन की जांच की गई। स्वास्थ्य केंद्रों में ब्लड ग्रुपिंग टाइपिंग, हेपेटाइटिस बी, यूरिन एल्ब्यूमिन, शुगर ,एचआईवी ओरल ग्लूकोस टोलरेंस टेस्ट, वीडीआरएल की जांच की गई। इस दौरान गर्भवती महिलाओं को जननी सुरक्षा योजना, मुख्यमंत्री श्रमिक सेवा प्रसूति सहायता योजना, मातृ वंदना योजना की जानकारी एवं योजना हेतु आवश्यक दस्तावेजों के संबंध में अवगत करवाया गया।गर्भावस्था के दौरान पोषण आहार, आईएफए गोलियों एवं कैल्शियम के सेवन एवं उनसे होने वाले लाभों के संबंध में प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। परामर्श पत्रों के माध्यम से गर्भावस्था के दौरान उच्च जोखिम के लक्षणों के बारे में बताया गया । सुरक्षित मातृत्व सेवाओं के द्वारा मातृ मृत्यु दर को कम किया जा सकता है। साथ ही गर्भवती महिला एवं उसके बच्चे को सुरक्षित एवं स्वस्थ जीवन दिया जा सकता है। मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए उच्च जोखिम की गर्भवती महिलाओं का सही समय पर चिह्नांकन किया जाना बेहद आवश्यक है। जिससे उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं को विशेष देखभाल एवं चिकित्सा की सुविधा सही समय पर उपलब्ध करवाई जा सके। गंभीर एनीमिया, उच्च रक्तचाप, डायबिटीज मेलिटस, रिएक्टिव एचआईवी, सिफलिस, हाइपरथायराइड, टीबी, मलेरिया, पूर्व में ऑपरेशन द्वारा प्रसव इत्यादि लक्षणों वाले गर्भवती महिलाओं को हाई रिस्क की श्रेणी में रखा जाता है। उच्च जोखिम की गर्भवती महिलाओं को नियमित चार जांचों के अलावा न्यूनतम 3 अतिरिक्त जांच की सेवाएं स्त्री रोग विशेषज्ञ, स्किल लैब एवं दक्षता प्रशिक्षित चिकित्सक द्वारा प्रदान की जाती है। शासन द्वारा प्रसव काल के दौरान एवं प्रसव पश्चात पर्याप्त पोषण आहार प्रदान करने के उद्देश्य से आर्थिक सहायता भी उपलब्ध करवाई जाती है। जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत स्वास्थ्य संस्थाओं तक पहुंचाने के लिए परिवहन, प्रसव के दौरान उपचार, दवा व पौष्टिक भोजन एवं प्रसव पश्चात देखभाल निशुल्क प्रदान की जाती है। पंजीकृत असंगठित श्रमिक कर्मकार परिवारों के लिए प्रसूति के दौरान कार्य से अनुपस्थित रहने के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान की प्रतिपूर्ति के लिए 16 हजार रुपए की राशि दो किस्तों में प्रदान की जाती है।

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