Rajasthan News : बीछ बारस पर महिलाओं ने गाय और बछड़े की पूजकर सुनी कहानी

रिपोर्टर सूरजमल वैष्णव सवाई माधोपुर राजस्थान
तहसीलों और आसपास के सभी गांवों में 8 सितंबर को बछ बारस (गोवत्स द्वादशी) का त्योहार श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। भाद्रपद कृष्ण द्वादशी पर मनाया जाने वाला यह पर्व राजस्थान में खास महत्व रखता है। सुबह से ही गांवों में गाय और बछड़े को सजाकर उनकी पूजा की गई। माताओं ने अपनी संतान की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य के लिए व्रत रखा। ऐसी मान्यता है कि इस दिन गौ माता में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है। गाय और बछड़े की पूजा करने से भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद मिलता है। इस त्योहार पर महिलाएं सुबह नहाकर गाय और बछड़े को तिलक लगाती हैं। उन्हें बाजरा, मोठ, अंकुरित मूंग और गुड़ का भोग चढ़ाया जाता है। इस दिन चाकू-कैंची से कटी हुई चीजें, गेहूं और गाय के दूध से बनी चीजें नहीं खाई जाती हैं।

महिलाएं बाजरे का सोगरा, अंकुरित अनाज की कढ़ी और हाथ से तोड़ी हुई सब्जियां खाती हैं। मिट्टी और गोबर से बनी तलाई की पूजा करके बछ बारस की कहानी सुनी जाती है। साथ ही, सास को बायना भी दिया जाता है। पंचांग के मुताबिक, द्वादशी तिथि 7 सितंबर की शाम 5:03 बजे से शुरू होकर 8 सितंबर की दोपहर 2:42 बजे तक थी। उदयातिथि के कारण यह व्रत 8 सितंबर को ही मनाया गया।


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