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Chhattisgarh News : सड़क की मांग अब संसद तक: कोटा क्षेत्र में जनप्रतिनिधियों से जवाब मांगने का अभियान शुरू

ब्यूरोचीफ राकेश कुमार साहू जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़

बेलगहना-// बिलासपुर-// जांजगीर चांपा दारसागर मार्ग के चौड़ीकरण और राष्ट्रीय मार्ग का दर्जा देने की मांग तेज, सोशल मीडिया से उठेगी आवाज बिलासपुर/कोटा विधानसभा क्षेत्र में लंबे समय से खराब सड़कों और अपेक्षित विकास कार्यों की कमी को लेकर अब सड़क का मुद्दा एक जनअभियान का रूप लेता दिखाई दे रहा है। लगातार जर्जर सड़कों, आवागमन की परेशानी और जनप्रतिनिधियों की कथित चुप्पी के बाद सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप कुमार शर्मा ने सड़क के मुद्दे को लेकर व्यापक अभियान शुरू करने की बात कही है। अभियान के तहत अब प्रतिदिन जनप्रतिनिधियों से सवाल पूछे जाएंगे और सोशल मीडिया के माध्यम से क्षेत्र की सड़कों की वास्तविक स्थिति सामने रखी जाएगी। अभियान का मुख्य उद्देश्य जोबाटोला (गौरेला-पेंड्रा-मरवाही) से खोंगसरा, कोंचरा, बेलगहना होते हुए दारसागर तक मार्ग के चौड़ीकरण, मजबूतीकरण तथा इसे प्रमुख मार्ग के रूप में विकसित करने की मांग को सरकार और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाना है। “अब सिर्फ राजनीति नहीं, काम का हिसाब चाहिए” प्रदीप कुमार शर्मा का कहना है कि क्षेत्र की जनता अब केवल राजनीतिक नारों और आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होगी। जनता यह जानना चाहती है कि पिछले दो वर्षों से अधिक समय में क्षेत्र के लिए कौन-कौन सी बड़ी योजनाएं लाई गईं, सड़क के लिए किस जनप्रतिनिधि ने क्या प्रयास किया और आने वाले समय में क्या ठोस कार्ययोजना है। उन्होंने कहा कि अब जनता के बीच यह सवाल भी उठाया जाएगा कि आखिर कोटा विधानसभा क्षेत्र को बड़ी विकास योजनाओं में लगातार पीछे क्यों रखा जा रहा है? शर्मा ने कहा कि जनप्रतिनिधि किसी भी राजनीतिक दल के हों, उनका मूल्यांकन उनके काम के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लक्जरी वाहनों में क्षेत्र का दौरा कर राजनीति चमकाने के बजाय जनता की वास्तविक समस्याओं के बीच पहुंचकर उनका समाधान कराने वाले जनप्रतिनिधियों को ही सम्मान मिलना चाहिए। “जनप्रतिनिधियों का खुलकर विरोध नहीं, जवाबदेही तय होगी” उन्होंने स्पष्ट किया कि अभियान किसी एक राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है। जो भी जनप्रतिनिधि जनता के मुद्दों पर काम नहीं करेगा, उससे सवाल किए जाएंगे—चाहे वह किसी भी दल का क्यों न हो। उनका कहना है कि सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के सवालों पर अब चुप्पी स्वीकार नहीं की जाएगी। जनता के सामने यह भी रखा जाएगा कि किसने क्या प्रयास किया और किसने इस महत्वपूर्ण सड़क के लिए आवाज उठाई।

सड़क का मुद्दा अब संसद तक पहुंचाने की तैयारी जोबाटोला से खोंगसरा, कोंचरा, बेलगहना होते हुए दारसागर तक का मार्ग क्षेत्रीय आवागमन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यह मार्ग मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच संपर्क को मजबूत करने की क्षमता रखता है। ऐसे में इस मार्ग को चौड़ा और मजबूत करने के साथ राष्ट्रीय राजमार्ग का दर्जा देने की मांग भी उठाई जा रही है। शर्मा का कहना है कि सड़क की मांग को अब केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रखा जाएगा। सड़क की आवाज संसद तक पहुंचाई जाएगी और जनप्रतिनिधियों से पूछा जाएगा कि इस मार्ग के विकास के लिए अब तक क्या प्रयास किए गए। सांसद से भी सवाल—“पहले सांसद, फिर मंत्री” अभियान में केंद्रीय मंत्री एवं बिलासपुर सांसद तोखन साहू को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। प्रदीप कुमार शर्मा ने कहा कि मंत्री बनने के बाद भी उन्हें बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र की जनता और ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा, “बिलासपुर की जनता ने उन्हें सांसद चुनकर दिल्ली भेजा है। पहले वे क्षेत्र के सांसद हैं, उसके बाद केंद्रीय मंत्री। जनता से दूरी किसी भी जनप्रतिनिधि के लिए ठीक नहीं है।” यह बयान शर्मा की ओर से राजनीतिक टिप्पणी के रूप में सामने आया है। विधायक अटल श्रीवास्तव की भूमिका पर भी सवाल शर्मा ने कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि क्षेत्र की समस्याओं को लेकर जिस स्तर की सक्रियता दिखाई देनी चाहिए, वह नजर नहीं आ रही है। उनका कहना है कि विधायक का कार्यकाल क्षेत्र की समस्याओं को सरकार तक मजबूती से पहुंचाने और विकास योजनाएं लाने का भी होता है। ऐसे में कोटा विधानसभा की सड़क और अन्य बुनियादी समस्याओं को लेकर विधायक की सक्रियता पर जनता सवाल कर रही है।

लोक निर्माण विभाग और डिप्टी सीएम से भी जवाब की मांग सड़क एवं लोक निर्माण विभाग से जुड़े मंत्री तथा बिलासपुर जिले के उपमुख्यमंत्री की भूमिका पर भी शर्मा ने सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि वर्तमान विधानसभा क्षेत्र में सड़कों को प्राथमिकता मिल रही है, जबकि कोटा विधानसभा क्षेत्र की सड़क समस्याओं को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिल रही। शर्मा ने कहा कि यदि यह धारणा गलत है तो सरकार और विभाग को आंकड़ों तथा स्वीकृत योजनाओं के साथ जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। “आखिर किसके कार्यकाल में कोटा की सड़क बनेगी मुख्य मार्ग?” सड़क अभियान का सबसे बड़ा सवाल यही है कि— जोबाटोला–खोंगसरा–कोंचरा–बेलगहना–दारसागर मार्ग का चौड़ीकरण आखिर कब होगा? राष्ट्रीय मार्ग का दर्जा आखिर कब मिलेगा? इस मार्ग के लिए अब तक किस जनप्रतिनिधि ने क्या प्रयास किया? बड़ी विकास योजना कोटा क्षेत्र में कब आएगी? और सबसे बड़ा सवाल— “आखिर किस विधायक, सांसद और मुख्यमंत्री के कार्यकाल में कोटा विधानसभा का यह आदिवासी अंचल बेहतर सड़क के माध्यम से विकास की मुख्यधारा से मजबूती से जुड़ पाएगा?” प्रदीप कुमार शर्मा ने कहा कि अब सड़क का मुद्दा दबने वाला नहीं है। सोशल मीडिया से लेकर जनप्रतिनिधियों के कार्यालय और जरूरत पड़ने पर संसद तक इस मांग को पहुंचाया जाएगा। जनता को यह जानने का अधिकार है कि उसके क्षेत्र के विकास के लिए उसके प्रतिनिधियों ने क्या किया और आगे क्या करने वाले हैं। फिलहाल इस सड़क और जिम्मेदार अधिकारियों की शिकायत CM हेल्पलाइन के माध्यम से करते हुए हल्लाबोल दिया गया है।

देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई का सपना था की संपूर्ण भारत में सड़कों की जाल बिछा दूंगा और सड़कों की रखरखाव करना राज्य शासन एवं केंद्र सरकार का जिम्मेदारी होता है मगर राज्य शासन के अधिकारी कर्मचारी इस सड़कों पर ध्यान नहीं देते अगर सड़क रहेगी तो जनता को तकलीफ नहीं होगी लेकिन लोकसभा सांसद राज्यसभा सांसद विधायक भी उसे मार्ग से आना-जाना करते हैं मगर ध्यान नहीं देते क्योंकि वह लोग एयर कंडीशनर गाड़ी में आना-जाना करते हैं तो उनको तकलीफ नहीं होता कलेक्टर है कलेक्टर को भी ध्यान नहीं है जनता परेशान रहे नेता अधिकारी मालामाल रहे जैसी स्थिति है छत्तीसगढ़ राज्य की जंगलों को तो काट कर बड़े-बड़े उद्योग धंधे वालों को समर्पित कर रहा है पूरा छत्तीसगढ़ को मगर वहीं पर उद्योग लगाने वाले लोगों को सड़कों का निर्माण एवं रखरखाव के लिए कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है छत्तीसगढ़ राज्य में कहा जाता है धान का कटोरा मगर चरस अफीम गांजे का कारोबार एवं शराब का कारोबार करने वाले हैं नेता अधिकारी कर्मचारी लोग ऐसी स्थिति है छत्तीसगढ़ राज्य की। इसी तरह जांजगीर चांपा जिले में भी सड़क तो है मगर सड़क खेती किसानी करने के लायक हो चुका है क्योंकि जनता सड़कों में धान रोपाई करने लगे हैं सड़क की दुर्दशा भयानक है गड्ढे वाली है एवं सड़क की देखरेख करने में लोक निर्माण विभाग सुस्त है लोक निर्माण मंत्री केवल हेलीकॉप्टर और अपने एयर कंडीशनर गाड़ी में आना-जाना करते हैं इसलिए उनको तकलीफ कहां होगा ऐसा कहा जाता है भारतीय जनता पार्टी मतलब बिजनेसमैन जनता पार्टी है पैसा कमाना जानती है पैसा का सदुपयोग करना नहीं जानती छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्यमंत्री के कार्यकाल में अब तक किसी भी सड़क का मरम्मत नहीं हुआ है नई सड़कों का निर्माण नहीं हुआ है बिल पास हो जाता है मगर ठेकेदार की कमाई हो जाती है दो नंबर का सड़क बनता है। “अब केवल आश्वासन नहीं—सड़क चाहिए, विकास चाहिए और काम का हिसाब चाहिए।” कार्य का हिसाब लेने के लिए सूचना का अधिकार कानून का उपयोग किया जाता है मगर उसके अधीन भी सही समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं होती लीपा पोती करके जवाब दे देते हैं गोलमोल।

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