Uttar Pradesh News : इकलौते चिराग की मौत के बाद न्याय की पहली सीढ़ी पर भी संघर्ष, रक्षाबंधन के दिन घंटों कोतवाली में धरने पर बैठे परिजन!
रिपोर्टर योगेश कुमार फतेहपुर, यू.पी.
फतेहपुर। एक मां-बाप ने अपना इकलौता बेटा खो दिया। घर का वह चिराग, जिससे परिवार की उम्मीदें जुड़ी थीं, अचानक बुझ गया। बेटे की मौत के गम में डूबे परिजनों को जहां इस मुश्किल घड़ी में सहारे और संवेदना की जरूरत थी, वहीं न्याय की पहली सीढ़ी चढ़ने के लिए उन्हें शहर कोतवाली में घंटों संघर्ष करना पड़ा। खूब हो-हल्ला हुआ, पुलिस कर्मियों से नोकझोंक की नौबत आई और अंततः पीड़ित परिवार को प्रबंधक राकेश त्रिवेदी और प्रधानाचार्य सक्षम त्रिवेदी पर मुकदमा दर्ज कराने में सफलता मिल ही गई। मामला सरस्वती बाल मंदिर इंटर कॉलेज कक्षा 12 के छात्र तेजस की मौत से जुड़ा है। परिजनों ने स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही और बदइंतजामी के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि विद्यालय में हुई घटना के बाद तेजस की हालत बिगड़ी और इलाज के लिए ले जाते समय उसकी मौत हो गई। बेटे की मौत ने परिवार को भीतर तक तोड़ दिया है।
सबसे मार्मिक तस्वीर रक्षाबंधन के दिन सामने आई। जिस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र की दुआ कर रही थीं, उसी दिन तेजस के घर में मातम पसरा था। जिस भाई की कलाई पर राखी बांधने का सपना बहनों ने संजोया था, वह भाई अब उनके बीच नहीं था। वहीं परिवार न्याय की आस में कोतवाली पहुंचकर धरने पर बैठा था।
सवाल केवल एक मुकदमा दर्ज होने का नहीं है। सवाल यह भी है कि जिस परिवार ने अपना इकलौता बेटा खो दिया, उसे अपनी फरियाद सुनाने के लिए घंटों धरना क्यों देना पड़ा? क्या किसी पीड़ित परिवार को न्याय की मांग के लिए पुलिस की चौखट पर संघर्ष करना चाहिए? क्या पुलिस और पीड़ित के बीच भरोसे की वह कड़ी कमजोर हो रही है, जिसे मजबूत करना व्यवस्था की पहली जिम्मेदारी है? कभी शिक्षा को समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण का माध्यम माना जाता था। शिक्षक और विद्यालय बच्चों के भविष्य के निर्माण की जिम्मेदारी उठाते थे। लेकिन शिक्षा के बढ़ते व्यवसायीकरण को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।

तेजस की मौत के मामले ने भी शिक्षा व्यवस्था और स्कूल प्रबंधन की जवाबदेही को लेकर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन एक बच्चे की मौत और उसके बाद न्याय के लिए परिवार का संघर्ष समाज के सामने कई सवाल छोड़ गया है। जरूरत इस बात की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो, दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई हो और ऐसी व्यवस्था बने जिसमें किसी दूसरे परिवार को अपने बच्चे की मौत के बाद न्याय के लिए कोतवाली में धरना देने को मजबूर न होना पड़े। तेजस अब वापस नहीं आएगा। लेकिन उसकी मौत से उठे सवालों का जवाब मिलना जरूरी है—ताकि किसी और मां की गोद और किसी और बहन की राखी यूं अधूरी न रह जाए।



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