Jharkhand News : गांवों में साइबर ठगी के खिलाफ जागरूकता की नई पहल, ‘साइबर सखी’ बनेंगी पुलिस की ताकत
महिला पर्यवेक्षिकाओं और सेविकाओं को मिला साइबर सुरक्षा का प्रशिक्षण, घर-घर पहुंचाएंगी सतर्कता का संदेश

ब्यूरो चीफ मिथिलेश पांडे धनबाद झारखण्ड
धनबाद। साइबर अपराधियों के बढ़ते जाल के बीच धनबाद पुलिस ने अब ग्रामीण क्षेत्रों में साइबर जागरूकता की पहुंच मजबूत करने की पहल शुरू की है। पुलिस की इस मुहिम में महिला पर्यवेक्षिकाओं और सेविकाओं को जोड़ा गया है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ये महिलाएं अपने-अपने कार्यक्षेत्र में ‘साइबर सखी’ की भूमिका निभाते हुए गांवों और घरों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाएंगी। इसी उद्देश्य से शुक्रवार को धनबाद पुलिस केंद्र में महिला पर्यवेक्षिकाओं एवं सेविकाओं के लिए विशेष साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व ग्रामीण एसपी एस. मोहम्मद याकूब ने किया। प्रशिक्षण में साइबर डीएसपी प्रदीप कुमार साव समेत बड़ी संख्या में महिला पर्यवेक्षिकाएं और सेविकाएं शामिल हुईं। बदलते तौर-तरीकों से कराया गया अवगत प्रशिक्षण के दौरान पुलिस अधिकारियों ने साइबर अपराध के बदलते स्वरूप और ठगी के नए तरीकों की जानकारी दी। बताया गया कि साइबर अपराधी कभी बैंक अधिकारी बनकर, कभी केवाईसी अपडेट के नाम पर तो कभी फर्जी लिंक, ओटीपी, ऑनलाइन निवेश, लोन और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर लोगों को अपना शिकार बनाते हैं।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका सतर्कता और जागरूकता है। किसी अनजान कॉल, मैसेज, लिंक या ऑनलाइन ऑफर पर तत्काल भरोसा करने के बजाय उसकी सत्यता जांचना जरूरी है। गांव-गांव पहुंचेगा सुरक्षा का संदेश ग्रामीण एसपी ने कहा कि महिला पर्यवेक्षिकाओं और सेविकाओं का ग्रामीण समाज से सीधा संपर्क रहता है। वे लगातार गांवों और घरों तक पहुंचती हैं। ऐसे में उन्हें साइबर सुरक्षा की जानकारी देकर जागरूकता अभियान से जोड़ना ग्रामीण इलाकों में काफी प्रभावी साबित हो सकता है। ‘साइबर सखी’ ग्रामीणों को समझाएंगी कि बैंक खाते से जुड़ी जानकारी, एटीएम या डेबिट कार्ड का विवरण, ओटीपी, पासवर्ड और अन्य गोपनीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। संदिग्ध लिंक, अनजान नंबर से आने वाले वीडियो कॉल और सोशल मीडिया संदेशों से भी सावधान रहने की सलाह दी जाएगी। ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर ठगी से भी सावधान प्रशिक्षण में कथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर की जाने वाली साइबर ठगी को लेकर भी विशेष रूप से जागरूक किया गया। बताया गया कि अपराधी पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बनकर लोगों को भयभीत करते हैं और वीडियो कॉल पर निगरानी या पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाते हैं। ऐसी स्थिति में डरने या किसी के दबाव में रकम भेजने के बजाय तत्काल पुलिस से संपर्क करने की सलाह दी गई।
नौकरी, लोन और सरकारी योजनाओं के नाम पर भी ठगी पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साइबर ठग नौकरी दिलाने, सरकारी योजना का लाभ दिलाने, सस्ता लोन उपलब्ध कराने, ऑनलाइन इनाम अथवा निवेश में भारी मुनाफे का लालच देकर भी लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इन तरीकों के प्रति जागरूकता बढ़ाना पुलिस की प्राथमिकताओं में शामिल है। ठगी होने पर चुप न रहें, तत्काल करें शिकायत प्रशिक्षण के दौरान साइबर ठगी के मामलों के उदाहरण देते हुए बताया गया कि यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन ठगी हो जाती है तो उसे घबराकर चुप नहीं बैठना चाहिए। घटना की तत्काल सूचना देने से ठगी की रकम को रोकने और मामले में आगे की कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है। महिला पर्यवेक्षिकाओं और सेविकाओं को विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों, युवाओं तथा डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले ग्रामीणों तक साइबर सुरक्षा के बुनियादी नियम पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है।

पुलिस की मुहिम को मिला जमीनी आधार प्रशिक्षण में शामिल महिला पर्यवेक्षिकाओं और सेविकाओं ने भी इस पहल को उपयोगी बताया। उनका कहना था कि गांवों में घर-घर जाकर लोगों को साइबर ठगी के नए तरीकों की जानकारी देने से लोगों को सतर्क किया जा सकेगा। धनबाद पुलिस की यह पहल साइबर अपराध के खिलाफ जागरूकता अभियान को शहरी सीमाओं से निकालकर ग्रामीण समाज तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अब ‘साइबर सखी’ गांवों की चौखट तक पहुंचकर लोगों को बताएंगी कि सावधानी ही साइबर ठगों से बचाव का सबसे मजबूत हथियार है।


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