गाजर घास के उन्मूलन को लेकर विद्यार्थियों को किया जागरूक
गाजर घास के उन्मूलन को लेकर विद्यार्थियों को किया जागरूक

मनकापुर, गोण्डा। राष्ट्रीय खरपतवार विज्ञान संस्थान, जबलपुर के निर्देशानुसार आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र मनकापुर द्वारा गाजर घास जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को पूर्व माध्यमिक विद्यालय दिनकरपुर, विकासखंड मनकापुर में गाजर घास जागरूकता दिवस का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र मनकापुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक शस्य विज्ञान डॉ. राम लखन सिंह ने अध्यापकों एवं विद्यार्थियों को गाजर घास की पहचान, इससे होने वाले नुकसान तथा इसके उन्मूलन एवं प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि गाजर घास का अंग्रेजी नाम पार्थेनियम तथा वैज्ञानिक नाम पार्थेनियम हिस्ट्रोफोरस है। इसका बीज मैक्सिको से गेहूं के बीज के साथ भारत आया था तथा वर्ष 1956 में इसे पहली बार पुणे में देखा गया। गाजर घास मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य एवं पर्यावरण के लिए अत्यंत हानिकारक खरपतवार है।
डॉ. सिंह ने बताया कि गाजर घास का एक पौधा अपने जीवनकाल में करीब 1,000 से 50,000 तक बीज पैदा कर सकता है। इसका जीवनकाल लगभग तीन से चार महीने होता है। इसके संपर्क में आने से त्वचा संबंधी रोग, दमा एवं अस्थमा जैसी समस्याएं हो सकती हैं। उन्होंने फूल आने से पहले गाजर घास को उखाड़कर उसका उन्मूलन एवं प्रबंधन करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि फूल आने से पहले गाजर घास से कंपोस्ट खाद भी बनाई जा सकती है। इसके नियंत्रण में मैक्सिकन बीटिल कीट भी उपयोगी है।
कार्यक्रम में प्रधानाध्यापक प्रेमचंद तिवारी, सहायक अध्यापक पूनम सिंह, प्रधानाध्यापक जग प्रसाद, सहायक अध्यापक रिंकी सहित विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। विद्यार्थियों ने गाजर घास के दुष्प्रभावों की जानकारी प्राप्त करने के साथ ही इसके सामूहिक उन्मूलन का संकल्प लिया।



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