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Uttar Pradesh News : तिरंगा यात्रा के बाद भाजपा में घमासान! जिला महामंत्री के खिलाफ गूंजे मुर्दाबाद के नारे, चौकिया चौराहा बना सियासी अखाड़ा

रिपोर्टर गौरव सक्सेना जिला संवाददाता फर्रुखाबाद

लम्भुआ, सुलतानपुर। सर्वोदय इंटर कॉलेज से निकली तिरंगा यात्रा जहां देशभक्ति के रंग में सराबोर रही, वहीं यात्रा के समापन के बाद सामने आए विरोध ने स्थानीय भाजपा की अंदरूनी खींचतान को खुलकर सड़क पर ला दिया। चौकिया चौराहे पर जिला महामंत्री एवं तिरंगा यात्रा के जिला संयोजक विजय त्रिपाठी के खिलाफ समर्थकों द्वारा मुर्दाबाद के नारे लगाए जाने से सियासी माहौल गरमा गया। तिरंगा हाथों में लिए छात्र-छात्राओं और कार्यकर्ताओं की यात्रा सर्वोदय इंटर कॉलेज से शुरू होकर लम्भुआ बाजार, दियरा रोड होते हुए वापस कॉलेज पहुंची। यात्रा में विधायक सीताराम वर्मा, जिला महामंत्री विजय त्रिपाठी, प्रभारी मनोज श्रीवास्तव, मंडल अध्यक्ष शेर बहादुर सिंह सहित भाजपा कार्यकर्ता, शिक्षक और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा।

शेड्यूल बदला या सियासी समीकरण? उठे बड़े सवाल यात्रा समाप्त होने के बाद चौकिया चौराहे पर हुए विरोध ने पूरे कार्यक्रम पर सवाल खड़े कर दिए। विरोध कर रहे समर्थकों का आरोप है कि निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार तिरंगा यात्रा को चौकिया चौराहा स्थित शहीद वीर अब्दुल हमीद की प्रतिमा पर माल्यार्पण और राष्ट्रगान के बाद कॉलेज लौटना था। समर्थकों का दावा है कि यात्रा को दियरा चौराहे से ही मोड़कर सीधे कॉलेज ले जाया गया, जिससे चौकिया चौराहे पर मौजूद कार्यकर्ताओं और समर्थकों की तैयारियां धरी की धरी रह गईं। आरोप यह भी है कि वहां सैकड़ों कार्यकर्ताओं और स्कूली बच्चों के लिए भोजन तथा फूल-मालाओं की व्यवस्था की गई थी। यात्रा के निर्धारित मार्ग में बदलाव को लेकर उठे सवाल अब महज कार्यक्रम व्यवस्था तक सीमित नहीं दिख रहे हैं। विरोध के दौरान लगे नारे भाजपा के भीतर चल रही असंतुष्टि और गुटबाजी की चर्चा को और हवा दे रहे हैं।

पुरानी चुनावी कहानी फिर चर्चा में विरोध के बीच नगर पंचायत चुनाव की पुरानी सियासी तस्वीर भी फिर सामने आ गई। नगर पंचायत अध्यक्ष अवनीश सिंह अंगद के समर्थकों का कहना है कि चुनाव के दौरान दोनों पक्ष आमने-सामने थे। इसी पुराने राजनीतिक घटनाक्रम को समर्थक मौजूदा विवाद से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, क्या वास्तव में यात्रा का मार्ग किसी राजनीतिक कारण से बदला गया या इसके पीछे कोई प्रशासनिक/कार्यक्रम संबंधी वजह थी, यह स्पष्ट नहीं है। विजय त्रिपाठी की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन सवाल बड़ा है—देशभक्ति के नाम पर निकली तिरंगा यात्रा के बाद भाजपा के ही कार्यकर्ता आखिर अपने ही जिला महामंत्री के खिलाफ सड़क पर मुर्दाबाद के नारे क्यों लगाने लगे? चौकिया चौराहे का यह विरोध अब लम्भुआ की सियासत में नई हलचल का संकेत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद भाजपा के भीतर किस रूप में सामने आता है, इस पर राजनीतिक गलियारों की निगाहें टिक गई हैं।

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