Madhya Pradesh News : बारिश ने वो कर दिखाया, जो जांच एजेंसियां नहीं कर पाईं
राजा शंकर शाह–रघुनाथ शाह शासकीय बालक आश्रम शाला उमरिया में पहली ही बारिश ने खोली निर्माण की पोल, मासूम बच्चों की सुरक्षा पर सवाल

ब्यूरो चीफ इन्द्रमेन मार्को मंडला मध्यप्रदेश
मंडला। आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले के विकासखंड मोहगांव अंतर्गत ग्राम पंचायत उमरिया रैयत में स्थित अनुसूचित जाति एवं जनजातीय राजा शंकर शाह–रघुनाथ शाह शासकीय बालक आश्रम शाला इन दिनों सवालों के घेरे में है। बताया जा रहा है कि आश्रम शाला भवन का निर्माण हुए अभी लगभग एक वर्ष भी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन पहली ही बारिश में भवन की निर्माण गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बारिश के दौरान भवन में पानी पहुंचने के बाद निर्माण कार्य की परतें सामने आने लगीं। जिस भवन को बच्चों के सुरक्षित रहने और अध्ययन के लिए तैयार किया गया था, वहीं अब बारिश के पानी ने जिम्मेदार विभाग और निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नदी के पास बना आश्रम, बारिश में बढ़ी परेशानी ग्रामीणों के अनुसार आश्रम शाला भवन नदी के समीप स्थित है। क्षेत्र में लगातार बारिश होने के दौरान पानी का दबाव बढ़ने से आश्रम परिसर और भवन में पानी पहुंचने की स्थिति सामने आई। ऐसे में यहां रहकर पढ़ाई करने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस आश्रम शाला में कक्षा पहली से आठवीं तक के बच्चे रहकर अध्ययन करते हैं। बड़ी संख्या में मासूम बच्चे भवन में निवास करते हैं, इसलिए भवन की मजबूती और जल निकासी व्यवस्था में किसी भी प्रकार की कमी भविष्य में गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।
पहली ही बारिश में निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल स्थानीय लोगों का कहना है कि भवन नया होने के बावजूद बारिश में जिस तरह की स्थिति सामने आई है, उससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। लोगों का आरोप है कि यदि भवन का निर्माण निर्धारित मापदंडों और गुणवत्तापूर्ण सामग्री से किया गया होता तो इतनी जल्दी इस प्रकार की समस्या सामने नहीं आती। बारिश ने भवन की वास्तविक स्थिति सामने ला दी है। अब सवाल यह है कि आखिर निर्माण के दौरान गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर हुई थी? क्या संबंधित अधिकारियों ने निर्माण कार्य का समय-समय पर निरीक्षण किया था? यदि निरीक्षण किया गया था तो फिर इतने कम समय में भवन में पानी आने जैसी स्थिति कैसे उत्पन्न हुई? बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल सबसे गंभीर विषय आश्रम में रहने वाले मासूम बच्चों की सुरक्षा का है। बारिश के मौसम में यदि भवन में लगातार पानी आता रहा और जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं की गई तो कभी भी अप्रिय घटना घट सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल मौके का निरीक्षण कराना चाहिए। भवन की छत, दीवार, फर्श, नाली एवं जल निकासी व्यवस्था सहित पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच की जानी चाहिए।
जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा है कि भवन में बारिश से उत्पन्न समस्या सामने आने के बावजूद संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी तक नहीं है। यदि ऐसा है तो यह अपने आप में गंभीर लापरवाही का विषय है। सरकारी भवनों का निर्माण आम जनता के पैसे से होता है और आश्रम शाला जैसे भवनों में बच्चों की सुरक्षा सीधे तौर पर जुड़ी होती है। ऐसे में निर्माण के बाद उसकी गुणवत्ता की निगरानी और समय-समय पर निरीक्षण करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी बनती है। जांच की मांग ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि उमरिया रैयत स्थित राजा शंकर शाह–रघुनाथ शाह शासकीय बालक आश्रम शाला भवन का उच्चस्तरीय तकनीकी निरीक्षण कराया जाए। निर्माण में उपयोग की गई सामग्री, स्वीकृत लागत, निर्माण एजेंसी, कार्य की गुणवत्ता, जल निकासी व्यवस्था तथा निर्माण के दौरान किए गए निरीक्षण की भी जांच होनी चाहिए। यदि जांच में निर्माण कार्य में अनियमितता या निर्धारित मापदंडों से समझौता पाया जाता है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल बारिश ने एक नए सरकारी भवन की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार विभाग कब जागता है और मासूम बच्चों की सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।

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