Chhattisgarh News : 15 वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आरोपी की गिरफ्तारी के बाद दूसरी FIR, 8 लाख रुपये लेकर मामला दबाने के प्रयास का आरोप
ब्यूरोचीफ राकेश कुमार साहू जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़
अंबिकापुर/सरगुजा। 15 वर्षीय नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के मामले में आरोपी तरुण कुमार जायसवाल की गिरफ्तारी के बाद अब इस प्रकरण को कथित रूप से दबाने के प्रयास को लेकर पुलिस ने एक अलग अपराध दर्ज किया है। यह मामला नाबालिग से जुड़े गंभीर अपराध के बाद कथित तौर पर पीड़िता के परिवार पर दबाव बनाने और समझौते के प्रयास से संबंधित है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 20 जुलाई 2026 की रात करीब 10 बजे 15 वर्षीय नाबालिग बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म की घटना हुई। घटना के संबंध में 22 जुलाई 2026 को आरोपी तरुण कुमार जायसवाल के विरुद्ध दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया गया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। 21 जुलाई को कथित समझौते का प्रयास मामले में अब सामने आए आरोपों के मुताबिक, घटना के अगले ही दिन यानी 21 जुलाई 2026 को पीड़िता के पिता पर कथित रूप से आठ लाख रुपये लेकर दुष्कर्म की FIR दर्ज नहीं कराने का दबाव बनाया गया। इसी उद्देश्य से कथित तौर पर एक पंचनामा/समझौता तैयार कराने का प्रयास किए जाने की बात सामने आई है। मामला पुलिस के संज्ञान में आने के बाद इस कथित समझौते और दबाव बनाने की पूरी प्रक्रिया को लेकर अलग से कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है।
सिटी कोतवाली में दूसरी FIR दर्ज कथित समझौते और मामले को दबाने के प्रयास के संबंध में सिटी कोतवाली, अंबिकापुर में अपराध क्रमांक 544/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस ने उपलब्ध जानकारी के अनुसार भारतीय न्याय संहिता की धारा 249(बी), धारा 351(2) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 21(2) के तहत विवेक पेंकरा, अशोक जायसवाल सहित अन्य के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी है। यह प्राथमिकी फिलहाल प्रारंभिक स्तर पर है। विवेचना के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर धाराओं में बढ़ोतरी की जा सकती है तथा यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसे भी मामले में आरोपी बनाया जा सकता है। पॉक्सो मामले को दबाने की कोशिश पर उठे गंभीर सवाल नाबालिग से संबंधित अपराध में कानून का उद्देश्य पीड़िता को सुरक्षा प्रदान करना और अपराध की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति द्वारा आर्थिक लेन-देन या दबाव के माध्यम से पीड़िता के परिवार को FIR दर्ज कराने से रोकने अथवा मामले को दबाने का प्रयास किया गया है, तो यह स्वयं गंभीर कानूनी विषय बन जाता है।

दूसरी FIR दर्ज होने के बाद अब पुलिस की जांच का महत्वपूर्ण बिंदु यह रहेगा कि कथित आठ लाख रुपये की पेशकश किसने की, पीड़िता के पिता पर किस प्रकार दबाव बनाया गया, पंचनामा किसके कहने पर तैयार हुआ और इस पूरी प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका थी। कथित CCTV फुटेज की भी निष्पक्ष जांच की मांग इस पूरे मामले में एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा अग्रिम जमानत के दौरान प्रस्तुत किए गए कथित CCTV फुटेज से जुड़ा है। आरोप है कि प्रस्तुत फुटेज के साथ छेड़छाड़ या टैंपरिंग की गई हो सकती है। ऐसे में मांग है कि संबंधित CCTV फुटेज की स्वतंत्र और तकनीकी जांच कराई जाए। मूल DVR/NVR अथवा डिजिटल स्रोत से फुटेज का मिलान, मेटाडाटा और रिकॉर्डिंग की निरंतरता सहित आवश्यक तकनीकी पहलुओं की जांच की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि फुटेज वास्तविक और पूर्ण है या उसमें किसी प्रकार का परिवर्तन किया गया है। यदि जांच में CCTV फुटेज से छेड़छाड़ या उसे टैंपर करने की बात प्रमाणित होती है, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार अलग से अपराध दर्ज कर कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब जांच की दिशा पर नजर दूसरी FIR दर्ज होने के बाद इस मामले की जांच केवल मुख्य आरोपी तरुण कुमार जायसवाल तक सीमित नहीं रहने वाली है। अब पुलिस को कथित समझौते, आठ लाख रुपये के दबाव, पंचनामा तैयार कराने और कथित CCTV फुटेज समेत प्रत्येक पहलू की जांच करनी होगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी व्यक्ति की भूमिका केवल आरोप के आधार पर तय नहीं की जा सकती। आरोपों की पुष्टि पुलिस विवेचना, दस्तावेजी साक्ष्य, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और संबंधित व्यक्तियों के बयान के आधार पर ही होगी। फिलहाल सिटी कोतवाली पुलिस द्वारा अलग FIR दर्ज कर विवेचना शुरू किया जाना इस बात का संकेत है कि नाबालिग से जुड़े मूल अपराध को कथित रूप से दबाने या समझौते के जरिए प्रभावित करने के आरोपों को भी गंभीरता से लिया जा रहा है। अब देखना होगा कि विवेचना में आठ लाख रुपये के कथित लेन-देन, पंचनामा और CCTV फुटेज को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं और इस पूरे मामले में आगे किन-किन लोगों की भूमिका सामने आती है।


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