Jharkhand News : बरसात में और बढ़ी मुसीबत, फ्लाई ऐश से चतरा की सड़कें बनीं कीचड़
भीगकर जहर बना एनटीपीसी की राख, फिसलन से हादसों का डर, बीमारी का खतरा दोगुना
रिपोर्टर महेंद्र कुमार यादव चतरा झारखंड
चतरा। चतरा जिले की विभिन्न सड़कों पर गर्मी में धूल बनकर लोगों की सांस रोकने वाला एनटीपीसी का फ्लाई ऐश अब बरसात में कीचड़ बनकर जानलेवा साबित हो रहा है। जिले की सड़कों पर बिना नियम के चल रहे ट्रकों से गिरी राख पानी के साथ मिलकर जहरीली कीचड़ बना रही है। धूल गई, अब कीचड़ और फिसलन ने घेरा पिछले हफ्ते की बारिश के बाद सिमरिया- चतरा सड़क का हाल देखिए। सड़क पर जगह- जगह सफेद-भूरे रंग का चिपचिपा कीचड़ जमा है। दोपहिया वाहन चालक इसे पार करते ही फिसल जा रहे हैं।लोग पहले धूल से बचते थे, अब कीचड़ से डरने लगे। फ्लाई ऐश की कीचड़ से लगातार दुर्घटनाएं हो रही है। एक बाइक सवार डिलीवरी बॉय ने बताया कि बाइक से उसने दो बार गिर चुके हैं। इस कीचड़ में केमिकल है, फ्लाई ऐश की कीचड़ पड़ने से जलन होती है। स्कूली बच्चे भीगकर स्कूल पहुंच रहे हैं। सफेद यूनिफॉर्म कीचड़ से सन गई है। दुकानदारों का कहना है कि कीचड़ पड़ने से दुकानों के समान और ग्राहक परेशान हैं।

सेहत पर दोगुना खतरा स्वास्थ्य कर्मियों के अनुसार भीगा हुआ फ्लाई ऐश और ज्यादा खतरनाक है। सूखी धूल से सांस और आंख की बीमारी होती थी। अब इस गीले कीचड़ के संपर्क से स्किन एलर्जी, फंगल इंफेक्शन और पेट की बीमारियां बढ़ जाएंगी। बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा खतरा है। सड़क किनारे फल-सब्जी की दुकान लगाने वाली मीना देवी परेशान हैं। बारिश का पानी सारा कीचड़ सब्जी पर मार देता है। ग्राहक पूछता है ये कैसी सब्जी है। अब बेचें तो किसे बेचें?

ग्रामीणों का आरोप- समस्या हुई और गंभीर लोगों का कहना है कि गर्मी में तो धूल उड़ती थी, अब बरसात में यही राख- कीचड़ में तब्दील हो गई है। इससे जलजमाव और मच्छरों की समस्या अलग बढ़ गई है। लोगों की मांग कीचड़ और फिसलन से बचने के लिए ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से फ्लाई ऐश ले जाने वाले सभी भारी वाहनों को पूरी तरह तिरपाल से ढंकने, सड़कों पर जमा कीचड़ की तुरंत सफाई करने, पहले सड़क की सफाई सुनिश्चित करने और नियम तोड़ने वाले वाहन मालिकों पर भारी जुर्माना लगाने की तत्काल मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के 3 महीने तक अगर यही हाल रहा तो बीमारियों का प्रकोप तय है। यह सिर्फ प्रदूषण नहीं, बल्कि अब यह जनस्वास्थ्य का इमरजेंसी है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से अविलंब ठोस कदम उठाने की गुहार लगाई है।


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