Chhattisgarh News : तीजन बाई का ऐतिहासिक तमूरा देने से परिवार का इनकार।
ब्यूरोचीफ राकेश कुमार साहू जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़
रायपुर। जांजगीर चांपा । पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई की कला-धरोहर को सग्रहालय में सहेजने की कोशिश फिलहाल अटक गई है। संस्कृति विभाग ने उनका ऐतिहासिक तंबूरा मांगा, लेकिन परिवार ने साफ कह दिया कि यह सिर्फ वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि उनकी आखिरी याद है। परिजनों का कहना है कि तीजन बाई का पोता इसी तंबूरे के साथ पंडवानी की परंपरा आगे बढ़ा रहा है। परिवार ने सुझाव दिया है कि संग्रहालय के लिए तंबूरे की प्रतिकृति बनाई जा सकती है, लेकिन असली तंबूरा और वेशभूषा घर में ही स्मारक के रूप में सुरक्षित रखी जाएगी। वहीं संस्कृति विभाग का कहना है कि परिवार अभी भावुक है और आगे फिर बातचीत की जाएगी।
राज्य सरकार जब तीजन बाई को गंभीर स्थिति में थी तो ध्यान नहीं दिया और जब करने की स्थिति थी तो संस्कृति विभाग उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया और आज करने के बाद उसकी संपत्ति को अर्थात तंबूरा को संग्रहालय में रखने का फरमान जारी कर दिया है शान कह रही है की भावुकता वश अभी तीजन बाई के तमूरा को नहीं दे रहे हैं जब उन्होंने इनकार कर दिया नहीं देने का तो क्यों जबरदस्ती शासन दबाव डाल रही है वह तीजन बाई की व्यक्तिगत संपत्ति है सार्वजनिक संपत्ति नहीं है कि जब चाहो किसी को दे दे ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि परिवार वालों के बीच में वह उनकी यादगार निशानी है तीजन बाई के सारे सोलह सिंगार उनके घर में ही रहेगा सार्वजनिक नहीं रहेगा ना की सरकार की संपत्ति नहीं है आज करने के बाद सरकार को उसके प्रति सहानुभूति दिखाने का अवसर प्राप्त हुआ है जब बीमार थी तो सहानुभूति नहीं दिया राज्य सरकार भूल कर भी ऐसा फरमान जारी न करें क्योंकि अगर दबाव डाला जाएगा तो तीजन बाई के परिवार हाई कोर्ट का शरण भी ले सकता है जिसका फैसला केवल कोर्ट कर सकता है राज्य सरकार नहीं कर सकता किसी की व्यक्तिगत संपत्ति को जबरदस्ती कब्जा नहीं किया जा सकता उसके लिए न्यायालय है न्यायालय के द्वारा जो फैसला होगा वही मानना पड़ेगा राज्य सरकार को भी और तीजन बाई के परिवार वालों को भी मगर अभी यह स्थिति नहीं आ पाई है जिसकी वजह से दोनों पक्षों को परेशानी ना आए।

वर्तमान भारतीय जनता पार्टी की सरकार कलाकारों के प्रति अपनी सहानुभूति नहीं दे पा रही है ना सहयोग कर पा रही है जब कांग्रेस की सरकार थी तो लोक कलाकारों के प्रति अच्छी तरीके के साथ में ध्यान देती थी मगर यह भारतीय जनता पार्टी का मतलब है बिजनेसमैन जनता पार्टी जो की जनता को भी परेशान कर रखी है कलाकारों को भी परेशान कर रखी है लोक कलाकारों को संस्कृति विभाग द्वारा वेतन भुगतान भी नहीं कर पा रही है और वह तीजन बाई की तमूरा को संग्रहालय में रखने के लिए मांग रही है एक मीडिया की सोच यह कहती है की लोक कलाकारों की मृत्यु के बाद उनके जो भी सामग्री है उसे संग्रहालय में रखने के लिए उचित नहीं माना जा सकता यह न्याय हित में गलत फैसला है आज चाहे छत्तीसगढ़ी कलाकार हो चाहे बॉलीवुड के कलाकार खत्म हो जाते हैं मृत्यु हो जाते हैं तो क्या बॉलीवुड के इलाके की राज्य शासन उनकी संगीत की जो सामग्री है पहले में रखने के लिए डिमांड नहीं कर सकती है और नहीं कर रही है राज्य सरकार लोक कलाकारों की जो भी वाद्य यंत्र है उनको संग्रहालय में रखेगी मगर वक्त आने पर उसकी बिक्री भी कर सकती है क्योंकि वर्तमान भारतीय जनता पार्टी की सरकार लूटने वाली सरकार है बनाने वाली सरकार नहीं है।

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