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Chhattisgarh News : सरकारी भवन से बरसात के दिनों में पानी टपकने लगा है

सरकारी कर्मचारी ही सरकार को चूना लगा रहे हैं घोटाला करके शासन के द्वारा निर्मित भवन का यह हाल है

ब्यूरोचीफ राकेश कुमार साहू जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़

सीपत तहसील परिसर में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा लगभग 60 लाख रुपये की लागत से निर्मित नवीन तहसील भवन उद्घाटन से पहले ही निर्माण संबंधी कई गंभीर खामियों को लेकर सवालों के घेरे में आ गया है। सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि इतनी महत्वपूर्ण शासकीय इमारत में छत तक पहुंचने के लिए स्थायी सीढ़ी का ही प्रावधान नहीं किया गया है। ऐसे में भविष्य में छत की मरम्मत, निरीक्षण या रखरखाव के लिए कर्मचारियों को अस्थायी लोहे या लकड़ी की सीढ़ी का सहारा लेना पड़ेगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी भवन के डिजाइन में इतनी बुनियादी सुविधा का अभाव विभागीय इंजीनियरों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। लोगों का कहना है कि यह इंजीनियरिंग की चूक है या फिर लागत बचाने के लिए डिजाइन में ही सीढ़ी का प्रावधान नहीं रखा गया, इसकी तकनीकी जांच होनी चाहिए। उद्घाटन से पहले ही टपकने लगी छत, दीवारों में भी दिखीं दरारें

भवन का निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन पहली ही बारिश में इसकी छत कई स्थानों से टपकने लगी। भवन के विभिन्न कमरों में पानी रिसने के साथ-साथ कई जगह दीवारों में दरारें भी दिखाई दे रही हैं। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो भविष्य में तहसील एवं न्यायालय से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों को भी नुकसान पहुंच सकता है। कलेक्टर के निर्देश भी नहीं हुए प्रभावी बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने 10 जुलाई 2025 को निर्माणाधीन तहसील भवन का निरीक्षण किया था। उस दौरान भी छत से पानी टपकने की शिकायत सामने आने पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए मौके पर उपस्थित हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों को तत्काल वाटरप्रूफिंग कराने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद विभागीय अधिकारियों ने निर्देशों का प्रभावी पालन नहीं किया। नतीजतन इस वर्ष भी बारिश के दौरान भवन की छत कई स्थानों से टपक रही है। इससे यह प्रश्न उठ रहा है कि जिला प्रशासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद आवश्यक सुधार कार्य क्यों नहीं कराया गया।

निर्माण में उठ रहे हैं कई अहम सवाल 60 लाख रुपये की सरकारी इमारत के डिजाइन में छत तक पहुंचने के लिए सीढ़ी का प्रावधान क्यों नहीं किया गया?,कलेक्टर के निर्देश के बावजूद वाटरप्रूफिंग का कार्य क्यों अधूरा रहा?,निर्माण की गुणवत्ता की जिम्मेदारी किसकी है?,क्या पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?, नवीन तहसील भवन में सामने आई इन खामियों ने न केवल निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि विभागीय निगरानी और जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। उद्घाटन से पहले ही भवन की स्थिति ने सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। 5 मई को होना था उद्घाटन, अब 15 अगस्त से पहले होने की तैयारी नवीन तहसील भवन का उद्घाटन 5 मई को केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू एवं अन्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में प्रस्तावित था। उद्घाटन की तैयारियां अंतिम चरण में थीं, टेंट लगाने का कार्य चल रहा था और आमंत्रण पत्र भी छप चुके थे। हालांकि, उद्घाटन से एक दिन पहले शाम को किसी कारणवश कार्यक्रम को अचानक स्थगित कर दिया गया। अब अधिकारियों द्वारा 15 अगस्त से पहले भवन का उद्घाटन कराने की तैयारी की जा रही है। जवाब देने से बचते रहे गृह निर्माण मंडल के अधिकारी पूरे मामले में पक्ष जानने के लिए छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल, बिलासपुर संभाग की कार्यपालन अभियंता जूही श्रीवास्तव से मोबाइल फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।

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