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Chhattisgarh News : खदान ब्लास्टिंग से खौफ में नरईबोध: पार्षद अमिला पटेल ने उपमुख्यमंत्री अरुण साव को सौंपा ज्ञापन, SECL की दमनकारी नीति और झूठी FIR का विरोध

रिपोर्टर मनोज मानिकपुरी कोरबा छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ // कोरबा (बांकीमोंगरा): ​SECL की गेवरा कोयला खदान विस्तार के कारण नरईबोध गांव के ग्रामीणों का अस्तित्व और जीवन गंभीर संकट में पड़ गया है। खदान से उड़ते भारी पत्थरों, मकानों में आ रही दरारों और अटकाव भरे पुनर्वास से परेशान ग्रामीणों की आवाज बुलंद करते हुए बांकीमोंगरा नगर पालिका परिषद (वार्ड क्र. 29) की पार्षद व पी.आई.सी. सदस्य अमिला राकेश पटेल ने बड़ा कदम उठाया है। ​पार्षद अमिला पटेल ने छत्तीसगढ़ शासन के उपमुख्यमंत्री व कोरबा जिला प्रभारी मंत्री श्री अरुण साव से मुलाकात कर उन्हें एक विस्तृत और कड़ा ज्ञापन सौंपा है। इसमें SECL प्रबंधन के तानाशाही रवैये, धीमी पुनर्वास प्रक्रिया और हक मांगने वाले ग्रामीणों पर की जा रही दमनकारी कार्रवाई का सिलसिलेवार पर्दाफाश किया गया है। ​50 मीटर की दूरी पर ब्लास्टिंग, खौफ के साए में ग्रामीण ​उपमुख्यमंत्री को सौंपे ज्ञापन में पार्षद ने बताया कि खदान की दूरी अब गांव से 50 मीटर से भी कम रह गई है। रोजाना होने वाली भारी ब्लास्टिंग के कारण ग्रामीणों के घरों की छतें और दीवारें बुरी तरह दरक रही हैं। छतों पर भारी पत्थर गिर रहे हैं, जिससे लोग अपने ही घरों में खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं। इसके बावजूद SECL प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन पुनर्वास की प्रक्रिया को कछुआ गति से चला रहा है।

​आवाज उठाने पर ‘झूठी FIR’ और भारी पेनाल्टी ​पार्षद अमिला पटेल ने आरोप लगाया कि जब भी पीड़ित भू-विस्थापित अपनी सुरक्षा, उचित मुआवजे और सम्मानजनक बसाहट जैसी बुनियादी व जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं, तब SECL प्रबंधन और प्रशासन पुलिस का दुरुपयोग कर उन पर भारी-भरकम पेनाल्टी ठोक देता है और झूठी FIR दर्ज करवा देता है।
​”SECL गेवरा वर्तमान में अपने इतिहास के सबसे काले दौर से गुजर रहा है। वर्तमान GM का रवैया पूरी तरह तानाशाही, दमनकारी और शोषणकारी है। यह वही अधिकारी हैं जो पूर्व में दीपका में पदस्थ रहने के दौरान भी हक मांगने वाले किसानों और ग्रामीणों पर लाखों-करोड़ों की फर्जी पेनाल्टी नोटिस भिजवाकर उन्हें डराते थे। आज वही दमनकारी नीति गेवरा में दोहराई जा रही है।” अमिला राकेश पटेल, पार्षद व PIC सदस्य ​उपमुख्य मंत्री के समक्ष रखी गईं 4 प्रमुख मांगें:
​समयसीमा में हो पुनर्वास: ग्राम नरईबोध के बसाहट/पुनर्वास कार्य की एक निश्चित समयसीमा तय कर प्राथमिकता के आधार पर इसे पूरा करने हेतु SECL को कड़े निर्देश दिए जाएं।

​ब्लास्टिंग पर तुरंत रोक: गांव के पास हो रही जानलेवा भारी ब्लास्टिंग पर तत्काल रोक लगे और सुरक्षा मानकों की उच्च-स्तरीय जांच कराई जाए। ​क्षतिग्रस्त मकानों का मुआवजा: ब्लास्टिंग से टूटे मकानों का निष्पक्ष सर्वे करवाकर प्रभावित ग्रामीणों को उचित मुआवजा प्रदान किया जाए।
​झूठे मुकदमे हों निरस्त: अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले निर्दोष ग्रामीणों पर की गई सभी दंडात्मक कार्रवाई, पेनाल्टी और दर्ज झूठी FIR को अविलंब रद्द किया जाए। ​शीर्ष अधिकारियों और मंत्रियों को भी भेजी गई प्रतिलिपि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इस ज्ञापन की प्रतिलिपियां माननीय मुख्यमंत्री (छ.ग. शासन), श्रम एवं उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन, कटघोरा विधायक श्री प्रेमचंद पटेल, कोरबा जिलाधीश व पुलिस अधीक्षक, (बिलासपुर), खान सुरक्षा महानिदेशक और SECL गेवरा क्षेत्र के मुख्य महाप्रबंधक को भी त्वरित कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई हैं।

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