Chhattisgarh News : धरातल पर खोते दावे: जान जोखिम में डालकर उफनता नाला पार करने को मजबूर क्रोंधा के 50 विद्यार्थी

रिपोर्टर मनोज मानिकपुरी कोरबा छत्तीसगढ़
धरमजयगढ़ (छत्तीसगढ़): एक तरफ जहाँ सरकार ‘सुरक्षित और सुलभ शिक्षा’ के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर धरमजयगढ़ विकासखंड की ग्राम पंचायत क्रोंधा से सामने आई तस्वीरें इन दावों की पोल खोलती नज़र आ रही हैं। यहाँ गाँव के लगभग 50 छात्र-छात्राएं हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुँचने को मजबूर उफनते नाले से होकर गुजरती है पढ़ाई की राह बारिश का मौसम आते ही इन स्कूली बच्चों के लिए परेशानियाँ कई गुना बढ़ जाती हैं। ग्राम पंचायत क्रोंधा के बच्चे धरमजयगढ़ खड़गांव स्थित अपने स्कूल पहुँचने के लिए रोज़ खतरनाक रास्तों से होकर गुज़रते हैं। रास्ते में पड़ने वाले नाले में जब पानी का स्तर बढ़ जाता है, तब भी बच्चों का साहस और पढ़ाई का जज़्बा कम नहीं होता, लेकिन व्यवस्था की नाकामी साफ छलकती है। साइकिल नाले पर छोड़ी, घुटने भर पानी में उतरे कदम
बच्चों का रोज़मर्रा का सफर बेहद संघर्षपूर्ण है: साइकिल किनारे छोड़ना: विद्यार्थी अपने घरों से साइकिल पर निकलते हैं, लेकिन नाला आते ही उन्हें अपनी साइकिलें वहीं किनारे छोड़नी पड़ती हैं। पैदल नाला पार करना: इसके बाद वे जूते-चप्पल हाथों में उठाकर घुटनों तक भरे तेज़ बहाव वाले पानी में उतरते हैं और बेहद सावधानी से नाला पार करते हैं। बड़ा हादसा होने की आशंका: स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि जलस्तर अचानक बढ़ने पर यहाँ कभी भी कोई गंभीर हादसा हो सकता है। प्रशासन की चुप्पी और उठते सवाल सालों से बनी इस स्थिति के बावजूद अब तक यहाँ कोई पक्का पुल या सुरक्षित मार्ग नहीं बनाया गया है। बारिश के दिनों में यह स्थिति और भयावह रूप ले लेती है।

बड़ा सवाल: आखिर कब तक मासूम बच्चों को अपने सुनहरे भविष्य के लिए इस तरह जान की बाज़ी लगानी पड़ेगी? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है या इन बच्चों को जल्द ही एक सुरक्षित पुल की सौगात मिलेगी?



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