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Madhya Pradesh News : स्टॉप डायरिया अभियान के तहत पीएचई विभाग द्वारा किए जा रहे जल स्रोतों के क्लोरीनेशन, ग्रामीणों को किया जागरूक

ब्यूरो चीफ राजू जोशी महाराज छतरपुर मध्य प्रदेश

वर्षा ऋतु में जलजनित बीमारियों की रोकथाम के उद्देश्य से लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग द्वारा जिलेभर में “स्टॉप डायरिया अभियान-2026” के अंतर्गत जल स्रोतों का क्लोरीनेशन एवं जनजागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है। यह अभियान कलेक्टर पार्थ जैसवाल के निर्देशन में पीएचई विभाग के कार्यपालन यंत्री प्रहलाद सिंह के नेतृत्व में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में चलाया जा रहा है। अभियान के तहत वर्षा ऋतु में जल स्रोतों के प्रदूषित होने से फैलने वाली जलजनित बीमारियों जैसे डायरिया, हैजा, टाइफाइड, पीलिया एवं हेपेटाइटिस की रोकथाम के लिए विभाग द्वारा स्थापित लगभग 10 हजार हैंडपंपों एवं नल-जल योजनाओं के जल स्रोतों का क्लोरीनेशन किया जा रहा है।

इससे पेयजल स्रोतों को सुरक्षित एवं जीवाणुरहित बनाया जा रहा है। पीएचई विभाग की टीम गांव-गांव पहुंचकर ग्रामीणों को सुरक्षित एवं शुद्ध पेयजल के उपयोग के प्रति जागरूक भी कर रही है। फील्ड टेस्ट किट (एफटीके) के माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्रों पर पांच-पांच महिलाओं को जल गुणवत्ता परीक्षण का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही जैविक प्रदूषण की जांच के लिए एच2एस वायल (शीशी) भी उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे वे स्थानीय स्तर पर पेयजल की गुणवत्ता की जांच कर सकें।


यह अभियान जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार 31 जुलाई 2026 तक पूरे देश में संचालित किया जा रहा है। इसमें स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, ग्रामीण विकास तथा पेयजल एवं स्वच्छता सहित विभिन्न मंत्रालयों के समन्वय से कार्य किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत ग्राम पंचायत बिजासन, ग्राम पड़रिया (सतीश हरदेनिया के पास), ग्राम गुलगंज (पंचमुखी मंदिर के पास) तथा ग्राम पंचायत डिकोली (शंकर मंदिर के पास) स्थित जल स्रोतों का क्लोरीनेशन कर सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की गई एवं ग्राम दिदवारा में आंगनवाड़ी में एफटीके कीट के द्वारा पेयजल परीक्षण कर प्रशिक्षण दिया गया। पीएचई विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे जलजनित बीमारियों से बचाव के लिए पेयजल स्रोतों के आसपास स्वच्छता बनाए रखें, खुले में शौच न करें, जल स्रोतों के समीप कपड़े धोने एवं पशुओं को नहलाने से बचें तथा जल स्रोतों को सदैव ढंककर रखें।

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