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Madhya Pradesh News कुपावली स्थित सती माता मंदिर पर अखंड रामायण पाठ एवं भंडारा सम्पन्न

जिला संवाददाता संतोष सिंह चौहान भिंड मध्य प्रदेश

भिण्ड जिले के कुपावली ग्राम में स्थित सम्भरिया/सांभरिया चौहान वंश की कुल पूज्या सती माता मंदिर पर 21 एवं 22 जून 2026 को श्रद्धा एवं भक्ति के वातावरण में अखंड रामायण पाठ एवं विशाल भंडारे का आयोजन विधिवत सम्पन्न हुआ। आस्था का संगम कार्यक्रम में मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से सम्भरिया/सांभरिया परिवार के बंधु एवं धर्मप्रेमी श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित हुए। दोनों दिन मंदिर परिसर “जय सियाराम” के जयकारों से गूंजता रहा। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि मान्यता के अनुसार चौहान वंश की प्रमुख शाखा सम्भरिया/सांभरिया की कुल पूज्या सती माता, भोजराज सिंह की धर्मपत्नी फूलकुंवर उर्फ चांदकुंवर थीं। ये ग्राम सुररू के भदौरिया वंश की मेनू शाखा के श्री मंगल सिंह भदौरिया की सुपुत्री एवं सुल्तानपुरा के कछवाह वंश की भानेंज थीं। विक्रम संवत 1475 में भोजराज सिंह के स्वर्गवास के पश्चात फूलकुंवर जी सती हो गई थीं। उनकी पावन स्मृति में ग्राम कुपावली वासियों द्वारा सती माता मंदिर का निर्माण कराया गया, जो आज सम्भरिया वंश की आस्था का प्रमुख केंद्र है। कार्यक्रम विवरण 21 जून को विधिवत अखंड रामायण पाठ प्रारंभ हुआ जो देर रात्रि तक चला। 22 जून को हवन-पूजन के उपरांत विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की।


आयोजन में योगदान कार्यक्रम के सफल संचालन में कुपावली के श्री प्रहलाद सिंह राजावत, श्री रमेश सिंह राजावत, श्री रणवीर सिंह राजावत एवं समस्त राजावत परिवार, भदौरिया परिवार तथा ग्रामवासियों का विशेष सहयोग रहा।सम्भरिया परिवार की ओर से यदुनाथ सिंह सम्भरिया ( कौंध) , इंद्रवीर सिंह सांभरिया ( रहावली बीहड़) , योगेंद्र सिंह सम्भरिया ( गोरई),जी.एस. सम्भरिया ( अचलपुरा), ध्रुव सिंह सम्भरिया (गोरई) , वीर सिंह सम्भरिया (कौंध), रामप्रकाश सिंह सम्भरिया ( कौंध), विनोद सिंह सम्भरिया ( रहावली वेहड़) , नरेश सिंह सम्भरिया (गोरई), जितेंद्र सिंह सम्भरिया ‘गुड्डू सर’ ( कौंध) , दीपेंद्र सिंह सम्भरिया (कौंध) सहित अनेक समाजजनों ने व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभाई। विशेष उपस्थिति कार्यक्रम में क्षत्रिय वार्ता के संपादक श्री यदुवीर सिंह पवैया एवं उनकी टीम भी विशेष रूप से उपस्थित रही। कुपावली, चिटावली, सुररू, गुजरख, दैपुरा सहित आसपास के अनेक ग्रामों के श्रद्धालुओं ने भंडारे में प्रसादी ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।यह आयोजन समाज की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपराओं एवं सामाजिक एकता का उत्कृष्ट उदाहरण बना, जिसने दूर-दराज में निवासरत क्षत्रिय बंधुओं को एक सूत्र में जोड़ने का कार्य किया।

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