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₹5 की ऑनलाइन फीस बनी आफत, डॉक्टर के फर्जी सहायक ने व्यवसायी के खातों से उड़ाए ₹2 लाख

👉गूगल पर डॉक्टर का नंबर खोजना पड़ा महंगा, आधे घंटे में खाते से निकले ₹2 लाख

👉ऑनलाइन अप्वाइंटमेंट के नाम पर साइबर ठगी, छह ट्रांजेक्शन में उड़ा दी लाखों की रकम

👉यूपीआई पिन डालते ही साइबर जाल में फंसे व्यवसायी, बैंक खाते हुए खाली

कतरास/राजगंज। धनबाद जिले के कतरास-राजगंज क्षेत्र में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है। महज पांच रुपये के ऑनलाइन भुगतान के बहाने साइबर अपराधियों ने एक प्रतिष्ठित व्यवसायी को अपने जाल में फंसाकर उनके दो बैंक खातों से करीब दो लाख रुपये की अवैध निकासी कर ली। घटना के बाद क्षेत्र के व्यवसायियों और आम लोगों में दहशत का माहौल है।

जानकारी के अनुसार राजगंज मोड़ निवासी व्यवसायी राम प्रसाद अग्रवाल ने 19 जून को डॉक्टर से अप्वाइंटमेंट लेने के लिए गूगल पर संपर्क नंबर खोजा था। इसी दौरान एक अज्ञात व्यक्ति ने फोन कर स्वयं को डॉक्टर का सहायक बताया और ऑनलाइन अप्वाइंटमेंट बुकिंग के नाम पर मात्र पांच रुपये का भुगतान करने को कहा।

आरोपी ने ऑटो-पे के माध्यम से भुगतान करने की प्रक्रिया समझाई। इस दौरान व्यवसायी ने यूपीआई पिन दर्ज कर दिया। हालांकि उस समय भुगतान सफल नहीं हुआ, लेकिन बाद में उनके मोबाइल पर बैंक खाते को यूपीआई से लिंक किए जाने संबंधी संदेश आने लगे।

सोमवार 22 जून की सुबह 10:52 बजे से 11:22 बजे के बीच महज आधे घंटे में साइबर अपराधियों ने छह अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए दोनों खातों से लगभग दो लाख रुपये निकाल लिए। ठगों ने एक खाते से सीधे एक लाख रुपये अमेजन पे में ट्रांसफर कर दिए, जबकि दूसरे खाते से 19,994.99 रुपये, 19,995.99 रुपये, 19,996.98 रुपये, 19,997.99 रुपये तथा 19,999.84 रुपये की पांच अलग-अलग निकासी की गई।

लगातार ट्रांजेक्शन के संदेश मिलने के बाद व्यवसायी के होश उड़ गए। उन्होंने तत्काल बैंक ऑफ इंडिया की राजगंज शाखा पहुंचकर दोनों खातों को फ्रीज कराया। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। मामले में स्थानीय थाना में प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है।

बैंक ऑफ इंडिया राजगंज शाखा के प्रबंधक अविनाश कुमार ने बताया कि शिकायत मिलते ही संबंधित खातों को सुरक्षा की दृष्टि से फ्रीज कर दिया गया है तथा आगे की तकनीकी प्रक्रिया जारी है। उन्होंने ग्राहकों से अपील की कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर यूपीआई पिन साझा या दर्ज न करें और संदिग्ध लिंक एवं पेमेंट रिक्वेस्ट से सावधान रहें।

पीड़ित व्यवसायी ने बताया कि शिकायत दर्ज कराने के लिए उन्हें राजगंज थाना और धनबाद साइबर थाना के बीच चक्कर लगाने पड़े। साइबर थाना से उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया गया कि दो लाख रुपये से कम की ठगी के मामलों में स्थानीय थाना में ही प्राथमिकी दर्ज की जाती है।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है तथा साइबर अपराधियों की पहचान और राशि की रिकवरी के प्रयास किए जा रहे हैं। यह घटना एक बार फिर लोगों को ऑनलाइन भुगतान और अज्ञात कॉल से सतर्क रहने की सीख दे रही है।

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