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Jharkhand News जून में ही सूखने लगी दामोदर, सिंदरी पर मंडराया जल संकट

तेनुघाट से पानी छोड़ने की उम्मीद, एक दिन छोड़कर हो रही जलापूर्ति

ब्यूरो चीफ मिथिलेश पांडे धनबाद झारखण्ड

सिंदरी/धनबाद: पूर्वी भारत की जीवन रेखा कही जाने वाली दामोदर नदी इस वर्ष जून महीने में ही सूखती नजर आ रही है। नदी का जलस्तर लगातार गिरने से सिंदरी सहित धनबाद के कई क्षेत्रों में पेयजल संकट गहराने लगा है। हालात ऐसे हैं कि लोगों को सीमित जलापूर्ति के सहारे दिन गुजारने पड़ रहे हैं, जबकि किसान और उद्योग भी पानी की कमी से जूझ रहे हैं। जलस्तर गिरने से प्रभावित हुई पेयजल व्यवस्था सिंदरी के एफसीआईएल क्षेत्र में हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (HURL) दामोदर नदी से पानी उठाकर शुद्धिकरण के बाद लोगों तक पहुंचाता है। लेकिन नदी में पानी की कमी के कारण पंप हाउस का संचालन प्रभावित हुआ है। स्थिति को देखते हुए अब सेटलिंग टैंक में जमा पानी की आपूर्ति एक दिन छोड़कर की जा रही है। खेती और उद्योगों पर भी असर दामोदर नदी के सूखने का असर केवल पेयजल तक सीमित नहीं है। किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है, वहीं कई औद्योगिक इकाइयों की जलापूर्ति भी प्रभावित हो रही है। क्षेत्र की कई जलापूर्ति योजनाओं पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।

प्रशासन ने की पानी बचाने की अपील जल संकट की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने लोगों से पानी का संयमित उपयोग करने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि अनावश्यक पानी की बर्बादी रोककर ही उपलब्ध जल भंडार को अधिक समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। मौसमीय बदलाव बना बड़ी वजह विशेषज्ञों के अनुसार इस वर्ष मौसमीय बदलाव और प्रशांत महासागर में एल नीनो की स्थिति के कारण मानसून पर असर पड़ने की आशंका है। सामान्य से कम बारिश होने की संभावना के चलते नदियों और अन्य जल स्रोतों में पानी का स्तर तेजी से घटा है। तेनुघाट बांध से मिल सकती है राहत दामोदर नदी के जलस्तर को बढ़ाने के लिए तेनुघाट बांध से पानी छोड़े जाने की उम्मीद जताई जा रही है। यदि बांध से पर्याप्त मात्रा में पानी छोड़ा जाता है तो नदी में जलस्तर सुधर सकता है। इससे सिंदरी, बोकारो तथा आसपास के क्षेत्रों की पेयजल और औद्योगिक जरूरतों को राहत मिलेगी।

मानसून पर टिकी लोगों की उम्मीद फिलहाल क्षेत्र के लोगों की निगाहें मानसून की बारिश पर टिकी हैं। प्रशासन भी लोगों से सहयोग की अपील कर रहा है ताकि जल संकट की इस चुनौती से सामूहिक रूप से निपटा जा सके। यदि जल्द पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

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