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Uttar Pradesh News फतेहपुर टोल प्लाजा बने अवैध कमाई और मनमानी के अड्डे, ओवरलोड वाहनों व मवेशी तस्करी को लेकर उठे सवाल

ब्यूरो प्रमुख शरद कुमार फतेहपुर, उत्तर प्रदेश

फतेहपुर। जनपद के विभिन्न टोल प्लाजा इन दिनों अवैध वसूली, वाहन चालकों के उत्पीड़न और कथित अनियमितताओं को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने टोल प्लाजा पर ओवरलोड वाहनों से कथित अवैध वसूली के आरोपों को फिर से हवा दे दी है। वीडियो सामने आने के बाद टोल संचालन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं। फतेहपुर जनपद में कानपुर-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग पर दो प्रमुख टोल प्लाजा संचालित हैं, जबकि तीसरा टोल प्लाजा बांदा-सागर मार्ग जिंदपुर गांव के पास स्थित है। वाहन चालकों का आरोप है कि टोल कर्मी फास्टैग स्कैन न होने की स्थिति में अभद्र व्यवहार करते हैं और कई बार जबरन नकद भुगतान का दबाव बनाते हैं। इसको लेकर अतीत में कई बार वाहन चालकों और टोल कर्मचारियों के बीच विवाद की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ टोल प्लाजाओं पर ओवरलोड वाहनों को कथित रूप से धनराशि लेकर गुजरने दिया जाता है, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान होता है। हाल ही में वायरल हुए वीडियो को भी इसी आरोप से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि वीडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

इसके अलावा टोल प्लाजाओं पर प्रतिबंधित मवेशियों की तस्करी में सहयोग किए जाने के आरोप भी समय-समय पर लगते रहे हैं। लोगों का कहना है कि गोवंश से भरे ट्रकों का आवागमन आम बात हो गई है। इस संबंध में कुछ लोगों ने स्थानीय पुलिस और टोल कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका भी जताई है, हालांकि इसकी पुष्टि किसी सक्षम जांच एजेंसी द्वारा नहीं की गई है। बताया जाता है कि टोल प्लाजाओं पर कथित अनियमितताओं और अवैध वसूली की शिकायतें जनप्रतिनिधियों तथा प्रभारी मंत्री तक भी पहुंच चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस सुधार दिखाई नहीं दिया है। गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया है। वहीं वाहन चालकों का कहना है कि यदि टोल प्लाजाओं पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई तो ये सुविधा देने के बजाय शोषण और अवैध कमाई के अड्डों के रूप में बदनाम होते रहेंगे। अब लोगों की नजर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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