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Uttar Pradesh News कौन है जिसने ‘₹5लाख’ के ‘नजराने’ में ‘सरकारी’ जमीन पर करवा दिया ‘कब्जा’

खागा तहसील के मोहम्मदपुर गौंती में अधिकारियों की मनमानी आई सामने!

ब्यूरो प्रमुख शरद कुमार फतेहपुर, उत्तर प्रदेश

शिकायत के बावजूद सरकारी जमीन पर हो रहे निर्माण को रुकवाने की नहीं उठाई गई जहमत!
मुख्यमंत्री से लेकर उच्चाधिकारियों तक शिकायत के बावजूद रात दिन चला काम,खड़ी हो गई दो मंजिला इमारत!
शिकायतकर्ता से जांच-जांच खेलते रहे जिम्मेदार!
ये हाल तब जब सरकारी जमीनों,तालाबों को खाली कराने को खुद संवेदनशील हैं डीएम!
गुंडों,माफियाओं को मिट्टी में मिलाने की बात कर रहे सीएम पर उनके अफसर ही बन बैठे हैं भू-माफिया!
खागा तहसील में हर काम के दाम फिक्स होने की आम चर्चा,जांच से खुलेंगे राज!

जिन माफियाओं,गुंडो को मिट्टी में मिला सुशासन की बात स्वयं मुख्यमंत्री कर रहे हों उसी भाजपा शासन में उन्हें क्या पता?कि उनके अधिकारी कर्मचारी ही भू-माफिया बन बैठे हैं। पैसों की खनक के आगे ना उनकी कलम चलती है और ना ही कोई आदेश निकलता है। ऐसा ही एक मामला खागा तहसील क्षेत्र के मोहम्मदपुर गौंती गांव का आया जहां सड़क एवं ग्राम समाज की जमीन पर हो रहे अवैध निर्माण को रुकवाने के लिए शिकायतकर्ता अफसरों की चौखटों तक दौड़ा लेकिन हुई बड़ी डील ने सरकारी जमीन पर भी कब्जा करवाने में जिम्मेदारों ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। निर्माण होने से शुरू हुई शिकायत पर अधिकारी आदेश-आदेश ही खेलते रह गए और सरकारी जमीन पर दो मंजिला बड़ा भूखंड बनकर खड़ा हो गया। आखिर वह कौन खागा तहसील का सिंघम अफसर है जिसने ₹05 लाख के नजराने के आगे सरकारी जमीन का सौदा करने में भी हिचक नहीं दिखाई? चर्चा तो यह भी आम है कि खागा तहसील के कुछ सेटर कर्मचारियों ने हर काम का दाम फिक्स कर दिया है। खागा तहसील के हथगांव परगना के मौजा मोहम्मदपुर गौंती में जिस अंकित कुमार ने प्लाट के बैनामें की बात अधिकारियों को बताई। हकीकत में कागजी एवं जमीनी खेल में अफसर जान-बूझकर उलझ गए।गाटा संख्या 5839 के बैनामें में गाटा संख्या 5690 एवं 5691जो सड़क एवं ग्राम समाज की जमीन के नाम से दर्ज है।बैनामा कराने वाले ने सड़क एवं सरकारी जमीन पर निर्माण शुरू करा दिया। शिकायत नासरुल हसन,अनिल सिंह सहित अन्य ने तहसील प्रशासन से की तो सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले अंकित भी सक्रिय हो गए।यहीं से सेटिंग-गेटिंग के शुरू हुए खेल में जिम्मेदारों ने सरकारी जमीन पर हो रहे कब्जे की तरफ से ऐसा मुंह मोड़ा कि ऐसी ही कृपा बनाए रखने के लिए एक के बाद एक उनकी खुशामद होती रही। नतीजा यह रहा कि अधिकारियों ने ना तो जमीन की पैमाइश कराई और ना ही अवैध रूप से हो रहे निर्माण कार्य को रुकवाना ही मुनासिब समझा।यह हालत तब हैं जब मुख्यमंत्री से लेकर शासन के उच्चाधिकारियों तक से सरकारी जमीन पर कब्जे को छुड़वाने की गुहार लगाई जा चुकी है। जिम्मेदारों की मनमानी का ही नतीजा है कि मोहम्मदपुर गौंती में प्रचलित चकबंदी के बावजूद फर्जी तरीके से नाप कराए जाने की बात बताई जा रही है जबकि हकीकत में ना तो काम रुकवाया गया और ना ही मौके पर हकीकत जानने की कोशिश की गई। बढ़े हौसले व तहसील के मिले सहयोग का नतीजा रहा कि अवैध निर्माण करा रहे लोगों ने मजदूरों की संख्या बढ़ा रात-दिन काम करा कर दो मंजिला इमारत खड़ी कर दी।

मामले को लेकर उप जिलाधिकारी एवं चकबंदी अधिकारी अपने-अपने तरीके से शिकायतकर्ताओं को संतुष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन इस बात का उनके पास जवाब नहीं है कि जब मामला सरकारी जमीन पर कब्जे का आया तो फिर काम क्यों नहीं रुकवाया गया? वह भी तब जब सरकारी जमीन के कागजात एवं नक्शे तक शिकायतकर्ता द्वारा जिम्मेदारों को दिए गए।यह हाल तब है जब सरकारी जमीनों,तालाबों के कब्जों को हटवाने के लिए स्वयं जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स संवेदनशील एवं गंभीर हैं।अफसरों को बराबर आदेश दे रहीं हैं लेकिन उन्हें क्या पता कि उन्हीं के मातहत ही पैसों की खनक के आगे अपने कर्तव्यों को भूल शासन की मंशा को धूल धूसरित करने में कोई भी कोर कसर नहीं छोड़ेंगे।अब मामला को डीएम की चौखट तक पहुंचाने की तैयारी है,जांच गड़बड़ झाले की परत खोलेगी लेकिन उच्चाधिकारियों को यह पता लगाने की आवश्यकता होगी कि आखिर वह कौन से कारण रहे कि साक्ष्य,सबूत देने के बावजूद ग्राम समाज की जमीन पर हो रहे अवैध निर्माण को रोकने की जहमत नहीं उठाई गई। हो कुछ भी लेकिन आम चर्चा ₹5 लाख के नज़राने की जोरों पर है!

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