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Jharkhand News झारखंड में चार महीने का ‘बालू ब्रेक’, आज से 444 घाटों पर खनन बंद

NGT के आदेश से बालू उत्खनन पर रोक, निर्माण कार्यों पर मंडराया संकट

ब्यूरो चीफ मिथिलेश पांडे धनबाद झारखण्ड

रांची : झारखंड में बुधवार (10 जून) से बालू खनन पर मौसमी प्रतिबंध लागू हो गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के निर्देश के तहत राज्य की नदियों से 15 अक्टूबर तक बालू उत्खनन पूरी तरह बंद रहेगा। इसके साथ ही राज्य के सभी 444 बालू घाटों पर खनन गतिविधियां थम गई हैं, जिससे आने वाले चार महीनों में बालू की उपलब्धता और कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है। प्रतिबंध का सबसे अधिक असर राजधानी रांची समेत उन जिलों में पड़ने की संभावना है, जहां सरकारी और निजी निर्माण कार्य बड़े पैमाने पर चल रहे हैं। निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि मांग के मुकाबले आपूर्ति घटने से बालू के दामों में और तेजी आ सकती है। पहले से बढ़ने लगे हैं दाम प्रतिबंध लागू होने से पहले ही बाजार में बालू की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। रांची और आसपास के क्षेत्रों में कई आपूर्तिकर्ता ऊंची दरों पर बालू बेच रहे हैं। वहीं ठेकेदारों और कारोबारियों ने भविष्य की मांग को देखते हुए बड़े पैमाने पर भंडारण भी शुरू कर दिया है। 35 घाटों की योजना अधूरी राज्य सरकार ने मानसून प्रतिबंध से पहले 35 बालू घाटों को चालू करने की योजना बनाई थी, ताकि पर्याप्त स्टॉक तैयार किया जा सके। हालांकि पर्यावरणीय स्वीकृति और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में देरी के कारण केवल 14 घाटों से ही नियमित रूप से बालू उठाव शुरू हो पाया। खनन विभाग के अनुसार रांची, दुमका, गोड्डा, पूर्वी सिंहभूम, रामगढ़ और हजारीबाग के कुछ घाटों से ही बालू निकासी हो रही थी। राज्य के 444 घाटों में से 299 की बंदोबस्ती हो चुकी है, लेकिन बड़ी संख्या में घाट पर्यावरण मंजूरी के अभाव में शुरू नहीं हो सके। रांची में सबसे ज्यादा असर राजधानी रांची में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में बालू की खपत होती है।

मकान निर्माण, अपार्टमेंट परियोजनाओं, सड़क निर्माण और सरकारी योजनाओं में इसकी लगातार जरूरत पड़ती है। ऐसे में मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ता अंतर कीमतों को और ऊपर ले जा सकता है। निर्माण व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि पर्याप्त वैध स्टॉक उपलब्ध नहीं रहा तो कई परियोजनाओं की रफ्तार प्रभावित हो सकती है। वहीं निजी मकान निर्माण कराने वालों की लागत भी बढ़ सकती है। कालाबाजारी पर प्रशासन की नजर प्रतिबंध अवधि को देखते हुए घाट संचालकों और ठेकेदारों ने पहले से ही बड़े पैमाने पर बालू का भंडारण किया है। इसके बावजूद सीमित उपलब्धता का फायदा उठाकर कुछ क्षेत्रों में कालाबाजारी की शिकायतें सामने आने लगी हैं। इसे देखते हुए रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने खनन विभाग को अवैध उत्खनन, परिवहन और जमाखोरी पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने साफ किया है कि प्रतिबंध अवधि के दौरान अवैध खनन या बिना अनुमति भंडारण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पर्यावरण संरक्षण और मानसून के दौरान नदियों के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखने के उद्देश्य से हर वर्ष यह प्रतिबंध लागू किया जाता है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगामी चार महीनों में बाजार में बालू की उपलब्धता और कीमतें किस दिशा में जाती हैं।

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