Chhattisgarh News एसईसीएल को झटका: मई में कोयला उत्पादन टारगेट से पिछड़े गेवरा और कुसमुंडा, दीपका एरिया ने मारी बाजी

रिपोर्टर मनोज मानिकपुरी कोरबा छत्तीसगढ़
साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के लिए मई का महीना उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा। वित्तीय वर्ष के दूसरे महीने (मई) में एसईसीएल की दो सबसे बड़ी मेगा परियोजनाएं—गेवरा और कुसमुंडा—अपने कोयला उत्पादन के तय टारगेट को हासिल करने में पीछे रह गई हैं। हालांकि, इस बीच दीपका एरिया ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए अपने लक्ष्य को शत-प्रतिशत (100%) हासिल कर लिया है।मेगा परियोजनाओं में कम उत्पादन होने का सीधा असर SECL के कुल परफॉर्मेंस पर पड़ा है। कंपनी मई माह के कुल टारगेट के मुकाबले लगभग 3 मिलियन टन कम कोयला ही निकाल सकी है।मई माह का प्रदर्शन (आंकड़े मिलियन टन में):एरिया तय लक्ष्य (टारगेट) वास्तविक उत्पादन
गेवरा 5.26 3.49
कुसमुंडा 3.47 2.48
दीपका 3.56 3.56
कोरबा 0.72 0.62
गेवरा और कुसमुंडा का हाल: गेवरा एरिया को मई में 5.26 मिलियन टन का टारगेट मिला था, जिसके मुकाबले केवल 3.49 मिलियन टन उत्पादन हो सका। वहीं, कुसमुंडा को 3.47 मिलियन टन के लक्ष्य के मुकाबले केवल 2.48 मिलियन टन कोयला ही मिला। दीपका ने राहत दी: दीपका एरिया ने अपने 3.56 मिलियन टन के लक्ष्य को पूरी तरह हासिल कर कंपनी को बड़ी राहत दी। छोटे एरिया ने संभाला मोर्चा: जहां बड़ी परियोजनाएं पिछड़ीं, वहीं रायगढ़, जोहिला, सोहागपुर, हसदेव, बैकुंठपुर और चिरमिरी एरिया ने अपने मई माह के लक्ष्य से अधिक कोयला खनन करके कंपनी प्रबंधन की चिंताओं को थोड़ा कम किया। मई महीने में एसईसीएल ने कुल 14.42 मिलियन टन कोयला खनन किया, जबकि लक्ष्य 17.33 मिलियन टन का था।टारगेट घटने के बावजूद नहीं मिला लक्ष्यपिछले वित्तीय वर्ष में एसईसीएल को 212 मिलियन टन का भारी-भरकम लक्ष्य दिया गया था, जिसे हासिल करने में कंपनी नाकाम रही थी (विशेषकर कुसमुंडा का प्रदर्शन खराब था)। इसी को देखते हुए इस साल कंपनी का सालाना लक्ष्य 212 से घटाकर 195 मिलियन टन कर दिया गया है।
इसके तहत कुसमुंडा का सालाना लक्ष्य 50 से घटाकर 39 मिलियन टन और गेवरा का लक्ष्य 63 से घटाकर 59 मिलियन टन किया गया है। इसके बावजूद शुरुआती महीनों में ही बड़ी खदानें टारगेट से पीछे चल रही हैं। आने वाले दिनों में बारिश बनेगी बड़ी चुनौती मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, प्रदेश में 16 जून से मानसून दस्तक दे सकता है। तीन महीने के वर्षा ऋतु के दौरान ओपन कास्ट (खुली खदानों) में पानी भरने की वजह से कोयला उत्पादन की रफ्तार हर साल धीमी पड़ जाती है। फिलहाल खदानों में जलभराव (वाटर लॉगिंग) की स्थिति से निपटने के लिए पानी निकासी की व्यवस्था दुरुस्त की जा रही है और अधिकारी लगातार इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। मानसून आने के बाद कोयला उत्पादन और उसके डिस्पैच (सप्लाई) को बनाए रखना एसईसीएल के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होने वाला है।




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