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Chhattisgarh News नरियारा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 1:00 बजे के बाद डॉक्टर एवं कर्मचारी नहीं रहते।

ब्यूरोचीफ राकेश कुमार साहू जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़

वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य में सुशासन का महापर्व चल रहा है और इस महापर्व के दौरान में नारियल का सुशासन कार्यक्रम खत्म हो चुका है उसके बाद सरकारी कार्यालय का माहौल इस तरह से है कि कर्मचारी ही नदारत रहते हैं ऐसी स्थिति में अगर मान लो गंभीर दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को अगर हॉस्पिटल प्राथमिक उपचार के लिए ले जाया जाएगा तो वहां पर डॉक्टर नदारत रहते हैं कर्मचारी नदारत रहते हैं और यहां तक के की प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नरियारा में पूर्व में कर्मचारियों की संख्या बड़ी तादाद में रहती थी जिसकी वजह से परेशानी नहीं होती थी जो भी कर्मचारी यहां लापरवाही का कार्य करता है तो उसे प्रशासन के द्वारा अकलतरा में अटैच कर दिया जाता है और अटैक पद्धति खत्म हो चुका है उसके बावजूद भी कर्मचारियों को अटैच में रखा है अकलतरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में खंड चिकित्सा अधिकारी के द्वारा जबरदस्ती सफाई कर्मचारी को भी अटैच मैं रखा हुआ है और जो भी डॉक्टर यहां पोस्टेज है उसे किसी न किसी काम से खंड चिकित्सा कार्यालय में बुला लिया जाता है प्राथमिक उपचार के संबंध में किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं की जाती ऐसी स्थिति है।

पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में दो डॉक्टर का पद स्थापना था मगर आज एक है उसे भी किसी न किसी कार्य की वजह से अकलतरा बुला लिया जाता है जिसकी वजह से मरीज परेशान होते रहते हैं और ऐसी स्थिति रहती है तो बिलासपुर रेफर हो जाता बीमारी ग्रस्त रोगी। जबकि नरियारा सबसे बड़ा गांव है और सबसे बड़े गांव में इस तरह का आलम रहेगा तो कर्मचारियों की मनमानी चल रही है कोई किसी की नहीं सुनता अधिकांश कर्मचारी आना-जाना करके ड्यूटी करते हैं
रात्रि कालीन में भी डॉक्टर नहीं रहता है जिसकी वजह से काफी परेशानी होती है जब दिन है ही डॉक्टर नादराज रहते हैं तो इस स्थिति में रात्रि कालीन डॉक्टर की अगर पद स्थापना कर दी जाती है तो रात्रि कालीन डॉक्टर भी गायब रहते हैं इस तरह की स्थिति है नरियारा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की।

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