Chhattisgarh News कोरबा में ठेका मजदूरों का शंखनाद: SECL में शोषण के खिलाफ 12 जून को जुटेगी ऐतिहासिक ‘ठेका मजदूर महासभा’

रिपोर्टर मनोज मानिकपुरी कोरबा छत्तीसगढ़
साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की खदानों में काम करने वाले हजारों ठेका श्रमिकों के आर्थिक, मानसिक शोषण और कानूनी अधिकारों के हनन के खिलाफ अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान हो चुका है। राष्ट्रीय कोलरी वर्कर्स फेडरेशन (RCWF) के महामंत्री प्रोफेसर भागवत प्रसाद दुबे ने एक विशेष वक्तव्य जारी कर प्रबंधन और नीतियों पर तीखा हमला बोला है।श्रमिकों को उनके अधिकार दिलाने और नए श्रम कानूनो के तहत स्थायी रोजगार व समान वेतन की मांग को लेकर आगामी 12 जून 2026, शुक्रवार को दोपहर 3:00 बजे से कुसमुंडा के महतारी अंगना में एक विशाल ‘ठेका मजदूर महासभा’ का आयोजन किया जा रहा है।शोषण और नियमों के उल्लंघन के प्रमुख बिंदु:महासभा के आयोजनकर्ताओं ने SECL प्रबंधन पर देश के श्रम कानूनों की सरेआम धज्जियां उड़ाने का आरोप लगाया है, जिसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दे शामिल हैं:12-12 घंटे जबरन काम: खदानों में श्रमिकों से बिना साप्ताहिक अवकाश और बिना किसी ओवर-टाइम (OT) भुगतान के 12-12 घंटे जबरन काम कराया जा रहा है, जो अमानवीय है।
एम्प्लॉयमेंट कार्ड का न मिलना: कॉन्ट्रैक्ट लेबर एक्ट के अनुसार नियुक्ति के तीन दिनों के भीतर हर श्रमिक को एम्प्लॉयमेंट कार्ड मिलना अनिवार्य है, लेकिन SECL की किसी भी कोलरी में ठेका श्रमिकों को यह कार्ड नहीं दिया गया है। हर एरिया में वेतन की दरें भी अलग-अलग हैं।

HPC वेतन योजना एक छलावा: पूर्व में बनाई गई हाईपावर कमेटी (HPC) वेतन योजना में उच्च कुशल (Highly Skilled) ठेका श्रमिकों का वेतन भी SECL के कैटेगरी-1 के सबसे सामान्य रेगुलर मजदूर से कम रखा गया है। ताज्जुब की बात यह है कि JBCCI के सदस्य यूनियनों ने भी इस विसंगतिपूर्ण योजना पर हस्ताक्षर कर दिए। नए श्रम कानून के तहत प्रमुख मांगें: महासभा के माध्यम से फेडरेशन ने नए कानूनों के तहत श्रमिकों के अधिकारों को सीधे लागू करने की मांग की है: अनिवार्य नियुक्ति पत्र (धारा 6): देश में लागू हुए नए श्रम कानूनों के अंतर्गत प्रत्येक श्रमिक को लिखित नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य है, जिससे प्रबंधन लगातार बच रहा है।
समान कार्य-समान वेतन (धारा 8): नए कानून की धारा 8 के तहत ठेका श्रमिकों को भी नियमित श्रमिकों के समान ही वेतन और सेवा शर्तें पाने का पूरा कानूनी अधिकार है। मुख्य कार्यों में ठेका प्रथा पर प्रतिबंध (धारा 57): कानून के अनुसार किसी भी संस्थान के कोर/मुख्य कार्यों में ठेका श्रमिक नहीं लगाए जा सकते। इसके बावजूद SECL कोयला निकालना, सपोर्ट प्रूफ, वोल्टिंग लाइन बिछाना, ट्रांमओवर बर्डन हटाना, कोयला परिवहन, ड्रिलिंग और डंपर, डोजर, ग्रेडर व पी.सी. ऑपरेटर समेत सभी भारी मशीनों के संचालन जैसे मुख्य कार्यों में पूरी तरह ठेका मजदूरों का इस्तेमाल कर रही है। सीधे समायोजन की मांग राष्ट्रीय कोलरी वर्कर्स फेडरेशन ने स्पष्ट किया है कि अब ठेका श्रमिकों को कोई अंतरिम HPC वेतन या काम की झूठी सुरक्षा नहीं चाहिए। चूंकि SECL का पूरा कोयला उत्खनन इन श्रमिकों पर टिका है और वे मुख्य कार्य कर रहे हैं, इसलिए 2020 की धारा 57 के तहत इन सभी ठेका श्रमिकों को सीधे SECL के नियमित (रेगुलर) कर्मचारी के रूप में समायोजित किया जाए। साथ ही, नियमित कर्मचारियों की भांति ड्रेस कोड, आवास सुविधा और उनके परिवार को मेडिकल सुविधा प्रदान की जाए। श्रमिकों से एकजुट होने की अपील श्रम सेवा भूविस्थापित कामगार संगठन, जिला-कोरबा (छ.ग.) द्वारा विनीत इस महासभा में देश और प्रदेश के सभी ठेका मजदूरों को जागने, एक होने और संगठित होने का आह्वान किया गया है। संगठन ने अपील की है कि यदि कोई भी कंपनी ईपीएफ, सुरक्षा उपकरण, पेमेंट स्लिप, मेडिकल सुविधा एवं पेमेंट में भ्रष्टाचार या मजदूरों का शोषण कर रही है, तो श्रमिक साथी लिखित आवेदन के साथ इस महासभा में भारी से भारी संख्या में पहुंचकर इसे सफल बनाएं।
संपर्क एवं समन्वयकर्ता:
कुसमुंडा: रामकुमार (9098146492), विष्णु प्रसाद (9926848450)
गेवरा: देवनाथ (9340873308), राजू (8251007603)
दीपका: कान्हा (7987080284), दीपक (9111100151)
मानिकपुर: सुरेश (7770879588), नितेश (9340672484)




Subscribe to my channel