Chhattisgarh कुसमुंडा में जीटीपी कंपनी की दहशतगर्दी, घरों में बुलडोजर चलाने की धमकी, वार्ड पार्षद पर किनारा करने का लगाया आरोप, दूसरे वार्ड के पार्षद ने दिया आश्वासन, मीडिया के सामने लोगों ने लगाई न्याय की गुहार,
निर्माण के नाम पर 'दहशतगर्दी', मुआवजा दिए बिना ग्रामीणों को घर खाली करने और बुलडोजर चलाने की धमकी

रिपोर्टर मनोज मानिकपुरी कोरबा छत्तीसगढ़
कोरबा, छत्तीसगढ़। कोरबा जिले के कुसमुंडा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नगर निगम कोरबा के वार्ड क्रमांक 64 से एक गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ जीटीपी (GTP) कंपनी द्वारा अपने निजी उपयोग (पेट्रोल पंप के बाजू में बाईपास सड़क निर्माण) के लिए स्थानीय ग्रामीणों के घरों को जबरन तोड़ने और विरोध करने पर बुलडोजर चलाने की धमकी दी जा रही है। कंपनी की इस कथित तानाशाही और दहशतगर्दी से प्रभावित गरीब परिवारों के होश उड़े हुए हैं और उन्हें कभी भी बेघर होने का डर सता रहा है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, जीटीपी कंपनी अपने कमर्शियल इस्तेमाल के लिए एक बाईपास सड़क का निर्माण कर रही है। इस निर्माणाधीन सड़क के दायरे में स्थानीय ग्रामीणों के लगभग 4 से 5 मकान आ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी उन्हें बिना किसी उचित मुआवजे या पुनर्वास (वैकल्पिक जमीन) की व्यवस्था किए, जबरन मकान खाली करने का दबाव बना रही है।
पीड़ित महिलाओं और पुरुषों ने बताया:
”हमें तहसीलदार की तरफ से कोई लिखित नोटिस नहीं मिला है, फिर भी कंपनी के अधिकारी और लोग आकर कहते हैं कि अगर घर खाली नहीं किया, तो घरों पर बुलडोजर चला दिया जाएगा। कई लोग आते हैं और हमें डरा-धमका कर चले जाते हैं।”
जनप्रतिनिधियों का रवैया: एक ने फेरा मुंह, दूसरे बने मसीहा
इस संकट की घड़ी में जब पीड़ित परिवारों ने अपने क्षेत्र की वार्ड पार्षद आरती लखन सिंह (वार्ड 64) से मदद की गुहार लगाई, तो आरोप है कि वे सहयोग करने के बजाय पीछे हट गईं और मौके पर आने से भी मना कर दिया।
इसके बाद, पीड़ितों की मदद के लिए वार्ड क्रमांक 65 के पार्षद प्रेम साहू आगे आए। उन्होंने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों का समर्थन किया और कंपनी के इस रवैये पर कड़ा ऐतराज जताया।
पार्षद प्रेम साहू की चेतावनी
वार्ड 65 के पार्षद प्रेम साहू ने मीडिया से बात करते हुए कहा:
”जीटीपी कंपनी अपने निजी स्वार्थ और काम के लिए यहाँ बाईपास रोड बना रही है, जिसके अंतर्गत गरीब लोगों के मकान आ रहे हैं। हमारी कंपनी से साफ मांग है कि इन लोगों को पहले उचित मुआवजा दिया जाए और रहने के लिए व्यवस्थित स्थान (जमीन) दिया जाए, ताकि ये अपना आशियाना बना सकें। अपने स्वार्थ के लिए किसी का मकान जबरन नहीं तोड़ा जा सकता।”
उन्होंने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि कंपनी के इंचार्ज से इस विषय पर बात हुई है, जिन्होंने उच्च अधिकारियों से चर्चा करने की बात कही है। यदि कंपनी इन गरीब परिवारों को उचित न्याय और व्यवस्था नहीं देती है, तो काम को पूरी तरह से बंद करा दिया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी स्वयं कंपनी और प्रशासन की होगी।
फिलहाल, इस मामले के सामने आने के बाद पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने की कुछ उम्मीद जगी है, लेकिन क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है।




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