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मासूम की आंख में फंसी जीभी, डॉक्टरों की तत्परता से टली बड़ी दुर्घटना

नगरी। नगरी क्षेत्र में गुरुवार सुबह एक बड़ी दुर्घटना होते-होते टल गई, जब खेल-खेल में दो साल के मासूम की आंख में टंग क्लीनर (जीभी) फंस गया। गंभीर हालत में बच्चे को जहां पर स्थिति को देखते हुए उसे बच्चों को जिला अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों की त्वरित कार्रवाई से उसकी आंख सुरक्षित बचा ली गई।

जानकारी के अनुसार नगरी ब्लॉक के कसपुर गांव निवासी दो वर्षीय कृष्ण कुमार नेताम अपनी मां के साथ नहा रहा था। इसी दौरान वह टंग क्लीनर से खेल रहा था, तभी अचानक वह उसकी आंख की पलक में फंस गया। घटना के बाद परिवार में अफरा-तफरी मच गई।

घबराए परिजनों ने तत्काल 108 एम्बुलेंस की सहायता से बच्चे को जिला अस्पताल पहुंचाया। यहां नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. जे.एस. खालसा ने बिना समय गंवाए कुछ ही मिनटों में सफल ऑपरेशन कर जीभी को सावधानीपूर्वक निकाल दिया। डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे की आंख पूरी तरह सुरक्षित है और आवश्यक दवाइयां दे दी गई हैं। लगभग 10 दिनों में बच्चा पूरी तरह स्वस्थ हो जाएगा।

डॉक्टरों के अनुसार समय पर अस्पताल पहुंचने से बड़ी क्षति टल गई। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि छोटे बच्चों के आसपास नुकीली और खतरनाक वस्तुएं बिल्कुल न रखें, क्योंकि जरा सी लापरवाही गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।

माताओं के लिए भी दी अहम सलाह

इस घटना के बाद डॉ. खालसा ने एक और महत्वपूर्ण पहलू पर ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि स्तनपान के दौरान ब्लाउज में लगे हुक या पिन भी नवजात शिशुओं के लिए खतरनाक हो सकते हैं। बच्चे के अचानक सिर हिलाने से हुक आंख या पलक में फंस सकता है, जिससे गंभीर चोट लगने की आशंका रहती है।

डॉ. खालसा के मुताबिक ऐसे लगभग 100 मामलों में उन्होंने बच्चों की पलक फटने जैसी गंभीर चोटें देखी हैं, जिनमें कई बार प्लास्टिक सर्जरी तक करनी पड़ती है।

उन्होंने शिशुवती माताओं से अपील की है कि वे ब्लाउज में हुक की जगह बटन का उपयोग करें, जिससे इस प्रकार की दुर्घटनाओं से बचा जा सके।

फिलहाल मासूम खतरे से बाहर है, लेकिन यह घटना अभिभावकों के लिए एक बड़ी सीख बनकर सामने आई है कि बच्चों की सुरक्षा में थोड़ी सी भी लापरवाही भारी पड़ सकती है।

Indian Crime News

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