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सदर तहसील गोण्डा में व्यवस्था हुई बेपटरी, कार्यस्थल पर सोते मिले बाबू का वीडियो वायरल

सदर तहसील गोण्डा में व्यवस्था हुई बेपटरी, कार्यस्थल पर सोते मिले बाबू का वीडियो वायरल

 

गोण्डा।उत्तर प्रदेश सरकार जहां एक ओर भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी प्रशासन देने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जनपद गोण्डा की सदर तहसील से सामने आई एक तस्वीर सरकारी व्यवस्थाओं की पोल खोलती नजर आ रही है। तहसील के संग्रह विभाग में तैनात एक बाबू का कार्यालय समय में कुर्सी पर आराम फरमाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो वायरल होते ही तहसील प्रशासन की कार्यशैली और अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

स्थानीय लोगों और फरियादियों का आरोप है कि तहसील में आम जनता की समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है। दूर-दराज क्षेत्रों से आने वाले लोग घंटों लाइन में खड़े रहते हैं, लेकिन जिम्मेदार कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों से बेपरवाह नजर आते हैं। वायरल वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि बाबू रितेश कुमार मिश्रा कार्यस्थल पर ही आराम करते दिखाई दे रहे हैं, जबकि फरियादी अपने जरूरी कार्यों के लिए इधर-उधर भटकते नजर आ रहे हैं।

बताया जा रहा है कि तहसील में प्रमाण पत्र, राजस्व संबंधी कार्य, वसूली, दाखिल-खारिज और अन्य जरूरी कामों के लिए रोजाना भारी संख्या में लोग पहुंचते हैं, लेकिन कर्मचारियों की लापरवाही और उदासीन रवैये के चलते लोगों को कई-कई दिनों तक चक्कर लगाने पड़ते हैं। आम जनता का कहना है कि बिना सिफारिश और सुविधा शुल्क के कई काम समय पर नहीं होते, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि कई बार उच्च अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन अब तक किसी प्रकार की सख्त कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का आरोप है कि अधिकारियों की ढिलाई के कारण कर्मचारियों के हौसले बुलंद हैं और सरकारी दफ्तरों में अनुशासन नाम की कोई चीज नहीं बची है।

भाजपा सरकार में सुशासन और जवाबदेही की बात लगातार कही जाती है, लेकिन सदर तहसील गोण्डा की यह तस्वीर उन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। जनता का कहना है कि यदि सरकारी दफ्तरों में इसी तरह लापरवाही होती रही तो आम लोगों का प्रशासन से विश्वास उठ जाएगा।

वायरल वीडियो को लेकर अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। लोगों ने जिलाधिकारी गोण्डा, मंडलायुक्त और शासन स्तर के अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर फरियादियों की समस्याओं से बेखबर ऐसे कर्मचारियों पर कार्रवाई कब होगी?

क्या वायरल वीडियो के बाद प्रशासन जागेगा या फिर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

जनता अब प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार कर रही है।

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