कृषि विज्ञान केंद्र मनकापुर में मिट्टी के उत्तम स्वास्थ्य के लिए संतुलित उर्वरकों का प्रयोग जरूरी
जिला रिपोर्टर प्रदीप कुमार वर्मा गोण्डा उत्तर प्रदेश

आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र मनकापुर गोंडा के वरिष्ठ शस्य वैज्ञानिक डॉ. राम लखन सिंह ने मिट्टी के उत्तम स्वास्थ्य के लिए संतुलित उर्वरकों के प्रयोग को जरूरी बताया । उन्होंने बताया कि इस समय रबी फसलों की कटाई के बाद खेत खाली हुए हैं । मृदा नमूना एकत्रित कर मिट्टी की जांच अवश्य करवायें । नमूना लेने हेतु एक खेत में पांच जगह से मिट्टी का नमूना लेकर सभी को एक साथ अच्छी तरह मिलाकर सिर्फ आधा किलो मिट्टी का नमूना कपड़े की थैली में रखें । मृदा नमूना के साथ एक पर्ची में खेत का खसरा नंबर, कृषक का नाम, पता आदि लिखकर नमूना को परीक्षण हेतु संबंधित संस्था को भेज दें । कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र या इफको आदि द्वारा मृदा परीक्षण किया जाता है । संबंधित फसल में मृदा परीक्षण की संस्तुति के आधार पर उर्वरकों का संतुलित प्रयोग करना चाहिए । फसल की आवश्यकतानुसार नाइट्रोजन,फास्फोरस,पोटाश, जिंक सल्फर आदि की पूर्ति के लिए यूरिया, डीएपी, म्यूरेट ऑफ पोटाश, जिंक सल्फेट, सल्फर आदि उर्वरकों का प्रयोग किया जाता है । डीएपी के विकल्प के रूप में सिंगल सुपर फास्फेट, एनपीके ग्रेड मिक्सर का प्रयोग लाभकारी है । जल विलेय उर्वरकों के प्रयोग से उर्वरकों की लगभग शत प्रतिशत मात्रा फसलों द्वारा उपयोग कर ली जाती है । डॉ.एस के वर्मा वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष ने बताया कि जैव उर्वरकों के प्रयोग से फसल की पैदावार में 15 से 20% की वृद्धि होती है । जैव उर्वरकों में एजेटोबैक्टर,राइजोबियम कल्चर, ट्राइकोडर्मा पाउडर, ब्युवेरिया वैसियाना आदि का प्रयोग किया जाता है । पीएसबी कल्चर से बीज उपचारित करने पर मिट्टी में अनुपलब्ध फास्फोरस उपलब्ध अवस्था में परिवर्तित हो जाता है । राइजोबियम कल्चर से बीज उपचारित करने पर दलहनी फसलों की पैदावार में 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि होती है । बिना मिट्टी की जांच कराये उर्वरकों का अंधाधुंध प्रयोग करने से मिट्टी का स्वास्थ्य खराब हो रहा है । फसल अवशेष को जलाने के बजाय उसका प्रबंधन करें । फसल अवशेष सड़कर खाद में परिवर्तित हो जाती है जबकि फसल अवशेष जलाने से खेत में मौजूद लाभदायक सूक्ष्म जीव जलकर नष्ट हो जाते हैं । किसान भाई मृदा परीक्षण की संस्तुति के अनुसार उर्वरकों का संतुलित प्रयोग कर अच्छी पैदावार प्राप्त करें । हरी खाद की पलटाई करने से भूमि की उर्वरा शक्ति में वृद्धि होती है ।
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