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ग्राम बिटकुला साहू परिवार में श्रीमद भागवत कथा का समापन।
भक्ति, शक्ति, प्रेम का अद्भुत संगम अत्यंत दिव्य है, जिसे श्रवण करने से अज्ञानता का नाश, मन की शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है
सीपत क्षेत्र के ग्राम बिटकुला में साहू परिवार में आयोजित श्रीमद भागवत कथा का समापन।।
सीपत क्षेत्र के ग्राम बिटकुला में साहू परिवार में आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ कथा के अंतिम दिन भगवान श्रीकृष्ण की अष्टदा प्रकृति, 16 हजार 108 पटरानियों के साथ विवाह एवं सुदामा चरित्र कथा का वर्णन किया गया।

कथा वाचक पंडित आशुतोष तिवारी ने कथा का वर्णन करते हुए कहा कि,
रूखमणि जी भगवान श्रीकृष्ण जी से कहती हैं कि, हे प्रभु आप तो अजन्मे, सर्वव्यापी, दयानिधि, करुणा के सागर हैं, आपके रूपों को इस नेत्र से देख पाना असंभव है। कथावाचक ने बताया कि, अपने धर्म व कलयुग में गौमाता की रक्षा का भार हमारे कंधों पर है। उन्होंने कहा, संकट में भगवान भक्तों की रक्षा करने खुद चले आते हैं। कथा के दौरान संपूर्ण वातावरण श्रीकृष्ण नाम, भक्ति, प्रेम और गुरु कृपा से सराबोर हो उठा। आयोजन के तहत प्रतिदिन आकर्षक झांकियां निकाली गईं। श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ
श्रीमद् भागवत कथा का महत्व और लाभ:
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पापों का नाश और मोक्ष:
भागवत कथा को सभी पुराणों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है, जो जन्म-जन्मांतर के पापों को नष्ट कर मुक्ति प्रदान करती है।
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परमात्मा से जुड़ाव: यह कथा केवल कहानी नहीं, बल्कि भगवान कृष्ण की लीलाओं के माध्यम से धर्म, ज्ञान और भक्ति सिखाती है। यह संसार में रहते हुए भी ईश्वर से जुड़ने का मार्ग दिखाती है।
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मन की शांति: कथा सुनने से मन शांत, निर्मल और विकार रहित होता है, जिससे आत्मिक सुख का अनुभव होता है।
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जीवन में सार्थकता: यह अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर जीवन में ज्ञान का प्रकाश लाती है और जीवन को सही दिशा देती है।
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तीर्थों का संगम: भागवत कथा का आयोजन किसी भी स्थान को तीर्थ के समान पवित्र बना देता है।



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