धनबाद में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर उठी आवाज़, जांच की मांग तेज

👉री-एडमिशन फीस और महंगी किताबों पर बवाल, कार्रवाई की मांग
👉शिक्षा में लूट का आरोप, अवैध स्कूलों की जांच की उठी मांग
👉बीएड योग्य शिक्षकों और रजिस्ट्रेशन की होगी जांच? प्रशासन से हस्तक्षेप की अपील
धनबाद:
अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ के जिला अध्यक्ष रत्नेश कुमार ने जिले के प्राइवेट स्कूलों में बढ़ती मनमानी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई निजी स्कूल “री-एडमिशन” के नाम पर अभिभावकों से अतिरिक्त शुल्क वसूल रहे हैं, साथ ही महंगी किताबें खरीदना भी अनिवार्य कर दिया गया है।
रत्नेश कुमार ने कहा कि इस तरह की प्रथाएं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर भारी बोझ डाल रही हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा, “शिक्षा सबके लिए समान और सुलभ होनी चाहिए, लेकिन निजी स्कूलों की मनमानी इस मूल भावना के खिलाफ है।”
उन्होंने प्रशासन और शिक्षा विभाग से इस मामले में जल्द हस्तक्षेप कर कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने जिले के सभी इंग्लिश मीडियम स्कूलों की व्यापक जांच कराने की जरूरत बताई। उनका कहना है कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि स्कूलों में पढ़ाने वाले सभी शिक्षक बीएड योग्यताधारी हों।
इसके अलावा उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि धनबाद में कई प्राइवेट स्कूल बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित हो रहे हैं। ऐसे स्कूलों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त नियामक कार्रवाई जरूरी है, ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए समाज के सभी वर्गों से अपील की है कि वे इस तरह की मनमानी के खिलाफ जागरूक रहें और आवाज़ बुलंद करें।

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