जिले में लगातार घटते जलस्तर और संभावित पेयजल संकट को देखते हुए प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी अविनाश मिश्रा ने पूरे धमतरी जिले को जलाभावग्रस्त क्षेत्र घोषित करते हुए बिना अनुमति नलकूप खनन पर पूर्ण रोक लगा दी है।
30 जून तक रहेगा आदेश प्रभावी
जारी आदेश के अनुसार 10 मार्च 2026 से आगामी मानसून आगमन अथवा 30 जून 2026 तक जिले में यह प्रतिबंध प्रभावी रहेगा। इस अवधि में किसी भी व्यक्ति या संस्था को कलेक्टर की पूर्व अनुमति के बिना नलकूप खनन की अनुमति नहीं होगी।
कम वर्षा से बिगड़ी स्थिति
जिले में इस वर्ष औसत से कम वर्षा, अल्पवृष्टि और खण्डवृष्टि के कारण भू-जल स्तर में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। इसके चलते हैंडपंप, नलजल योजनाएं, सिंगल फेस पंप और सोलर पेयजल योजनाओं से जल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। गर्मी के दिनों में यह संकट और गहरा सकता है।
पेयजल को प्राथमिकता, अन्य उपयोग पर रोक
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जलाभावग्रस्त क्षेत्र में जल स्त्रोतों से सिंचन, औद्योगिक या अन्य गैर-जरूरी उपयोग के लिए पानी लेने पर रोक रहेगी। आवश्यकता पड़ने पर कलेक्टर लोकहित में किसी भी जल स्त्रोत के उपयोग पर अस्थायी प्रतिबंध भी लगा सकते हैं, ताकि आम जनता के लिए पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
सरकारी एजेंसियों को छूट
हालांकि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, नगर निगम और नगर पंचायतों को केवल पेयजल आपूर्ति के लिए नलकूप खनन की छूट दी गई है। उन्हें अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी, लेकिन खनन किए गए नलकूपों की जानकारी संबंधित प्राधिकृत अधिकारी को देना अनिवार्य होगा।
उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाई
आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रशासन ने अलग-अलग क्षेत्रों में प्राधिकृत अधिकारियों की नियुक्ति की है। अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) धमतरी, कुरूद और नगरी को उनके-अपने क्षेत्रों में जिम्मेदारी सौंपी गई है। यदि कोई व्यक्ति बिना अनुमति नलकूप खनन करता या जल स्रोतों का दुरुपयोग करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जनहित में जरूरी कदम
प्रशासन का यह फैसला जिले में पेयजल संकट से निपटने और आम लोगों को गर्मी के मौसम में राहत देने के उद्देश्य से लिया गया है। अधिकारियों ने नागरिकों से सहयोग की अपील करते हुए जल संरक्षण और जिम्मेदारी से पानी उपयोग करने का आग्रह किया है।