उत्तरप्रदेश

निष्काम कर्म से ही मुक्ति का मार्ग संभव: आचार्य हरीशंकर अग्निहोत्री

निष्काम कर्म से ही मुक्ति का मार्ग संभव: आचार्य हरीशंकर अग्निहोत्री

भरथना/इटावा

कस्बा के मुहल्ला गली गोदाम स्थित महर्षि दयानन्द मार्ग के आर्य समाज मंदिर में चल रहे पाँच दिवसीय 103वें वार्षिकोत्सव के अंतर्गत विश्व कल्याण महायज्ञ एवं वेद कथा का आयोजन किया जा रहा है।

आचार्य ने बहुत ही सुंदर प्रवचन देकर प्रफुलित किया इस दौरान वैदिक प्रवक्ता आचार्य हरीशंकर अग्निहोत्री ने कहा कि मानव जीवन का उद्देश्य सत्कर्मों के माध्यम से जन्म-मरण के बंधनों से मुक्ति प्राप्त करना है।
उन्होंने बताया कि कर्म दो प्रकार के होते हैं—सकाम और निष्काम। सकाम कर्म में शुभ, अशुभ और मिश्रित कर्म शामिल होते हैं, जबकि निष्काम कर्म वह है जो ईश्वर प्राप्ति और समाज के कल्याण की भावना से किया जाता है। निष्काम भाव से किए गए कर्म से किसी को हानि नहीं होती, बल्कि समाज के हित का मार्ग प्रशस्त होता है।

बहुत ही सुंदर प्रवचन आचार्य ने दिए इस अवसर पर प्रधान अनिल आर्य, मंत्री मोहन आर्य, कोषाध्यक्ष सतेन्द्र आर्य संजू, राजेश आर्य, राजकमल गुप्ता, अजय शर्मा, सत्यभान गुप्ता, रामलखन यादव सहित अनेक आर्य बन्धु उपस्थित रहे।

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