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लाल बहादुर शास्त्री कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय बलौदा की स्नाकोत्तर विद्यार्थियों ने किए शैक्षणिक भ्रमण।

पुरखौती मुक्तांगन नया रायपुर और शहीद वीर नारायण स्मृति स्मारक स्वतंत्रता सेनानी आदिवासी संग्रहालय का किया भ्रमण।।

लाल बहादुर शास्त्री कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय बलौदा जिला जांजगीर चांपा (छ.ग.)

लाल बहादुर शास्त्री कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय बलौदा के विद्यार्थियों का शैक्षणिक भ्रमण 27 फरवरी को महाविद्यालय प्रांगण से 120 किलोमीटर दूर रायपुर मुक्तांगन और शहीद वीर नारायण आदिवासी संग्रहालय रायपुर की भ्रमण कराया गया। इस भ्रमण में महाविद्यालय के स्नाकोत्तर एमएससी बॉटनी, जूलॉजी, केमिस्ट्री,भूगोल, समाजशास्त्र, हिंदी साहित्य, राजनीतिक शास्त्र, इंग्लिश,समाज कार्य, सभी विगाभ के विद्यार्थियों ने शामिल हुआ।

भ्रमण के लिए महाविद्यालय प्रांगण से सुबह 8:30 बस के माध्यम से रवाना हुआ, बिलासपुर में 11 बजे नाश्ता के बाद बस सीधा अपने भ्रमण स्थल की ओर निकल पड़े, रास्ता में थाली रेस्टोरेंट अमर जवान की कोठी में विद्यार्थियों को भरपेट खाना खिलाया गया और रेस्टोरेंट की जबरस्त स्वाद भरी चाय और कॉफी की चुस्की लेते हुए बस पुनः आगे अपनी मंजिल यानी भ्रमण स्थल मुक्तांगन की ओर गंतव्य हुआ।।लगभग दोपहर 2 बजे मुक्तांगन पहुंच कर बच्चों ने मुक्तांगन नया रायपुर में विभिन्न स्थानों पर फोटोबाजी करते हुए पुरखौती मुक्तांगन की यादों को अपने कैमरा में कैद कर लिए।
ग्रुप फोटो भी लिए और विद्यार्थियों ने अपने अपने पसंदीदा कला आकृतियों के साथ सेल्फी भी लिए। सेल्फी और ग्रुप फोटो लेते समय विद्यार्थियों ने पुरखौती मुक्तांगन की नियमों का भी ध्यान रखा कि यह की कोई भी सांस्कृतिक विरासत और कलाकृतियों को हमारे वजह से कोई नुकसान न हो।
पुरखौती मुक्तांगनरायपुर (नया रायपुर) छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय जीवनशैली को दर्शाने वाला एक प्रमुख 200 एकड़ में फैला खुला (Open-air) संग्रहालय हैजिसका उद्घाटन 2006 में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वारा किया गया था। यहाँ आदिवासी आवासकलाकृतियाँपारंपरिक नृत्य के जीवंत पुतलेऔर शिल्प बाज़ार मुख्य आकर्षण हैंजो राज्य के सभी 33 जिलों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

मुक्तांगन रायपुर की विशेषता

छत्तीसगढ़ी आदिवासी …
पुरखौती मुक्तांगनरायपुर (नया रायपुर) छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय जीवनशैली को दर्शाने वाला एक प्रमुख 200 एकड़ में फैला खुला (Open-air) संग्रहालय हैजिसका उद्घाटन 2006 में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वारा किया गया था। यहाँ आदिवासी आवासकलाकृतियाँपारंपरिक नृत्य के जीवंत पुतलेऔर शिल्प बाज़ार मुख्य आकर्षण हैंजो राज्य के सभी 33 जिलों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
पुरखौती मुक्तांगन की मुख्य विशेषताएं:
जनजातीय संस्कृति का अनूठा प्रदर्शन: यह संग्रहालय छत्तीसगढ़ के बस्तरसरगुजा और अन्य क्षेत्रों की जनजातियों की जीवनशैलीकलावेशभूषाभोजन और आवास को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है।
कलाकृतियाँ और मूर्तिकला: यहाँ विभिन्न आदिवासी कला रूपोंजैसे डोकरा कला (Bell metal art)कास्ट शिल्प और टेराकोटा की उत्कृष्ट मूर्तियाँ और कलाकृतियाँ हैं।
पारंपरिक आवास (Tribal Huts): आगंतुक यहाँ पारंपरिक आदिवासी झोपड़ियों और आवास के वास्तविक आकार के मॉडल देख सकते हैं।
सांस्कृतिक केंद्र: यह स्थान सांस्कृतिक प्रदर्शनोंलोक नृत्यों और शिल्प मेलों के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है।
शैक्षिक भ्रमण (Educational Trip): यह छत्तीसगढ़ के इतिहासधर्मसाहित्य और दर्शन को समझने के लिए एक शिक्षाप्रद स्थान हैजो विशेष रूप से बच्चों और शोधकर्ताओं के लिए ज्ञानवर्धक है।
प्राकृतिक वातावरण: यह एक बड़े हरे-भरे क्षेत्र में स्थित है जो पिकनिक और सैर के लिए उपयुक्त है।
उसके बाद पुरखौती मुक्तांगन से वही कुछ दूर में उपस्थित शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह-जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय में विद्यार्थियों को ले जाया गया।
भारत का पहला डिजिटल आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय है। 50 करोड़ की लागत से बना यह स्मारक अत्याधुनिक तकनीक, 14 डिजिटल गैलरियों और 650 मूर्तियों के माध्यम से 1857 के क्रांतिकारी वीर नारायण सिंह व अन्य जनजातीय नायकों के संघर्ष को जीवंत करता है।
शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक की प्रमुख विशेषताएँ:
भारत का पहला डिजिटल आदिवासी संग्रहालय: यह म्यूजियम पूरी तरह से डिजिटल हैजहाँ आधुनिक तकनीक, VFX और प्रोजेक्शन के द्वारा इतिहास बताया गया है।
14 डिजिटल गैलरियां: इसमें 14 गैलरियां हैंजो छत्तीसगढ़ के विभिन्न आदिवासी विद्रोहों (जैसे हलबासरगुजापरलकोटभूमकाल आदि) और स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष को दर्शाती हैं।
650 मूर्तियां: संग्रहालय में 650 से अधिक मूर्तियां हैंजो आदिवासी संस्कृति और उनके संघर्षपूर्ण जीवन को जीवंत करती हैं।
आधुनिक तकनीक: यहाँ QR-कोड आधारित इंटरैक्टिव अनुभव और डिजिटल स्क्रीन का उपयोग किया गया है।
शहीद वीर नारायण सिंह को समर्पित: यह 1857 की क्रांति के प्रथम शहीद वीर नारायण सिंह के बलिदान को समर्पित है।
कलात्मक निर्माण: संग्रहालय का प्रवेश द्वार लकड़ी का नक्काशीदार हैजो सरगुजा के स्थानीय कारीगरों की कला का प्रतीक है।
विद्यार्थियों ने ऐसे जगह में भ्रमण कर आनंदित हुए और डिजिटल QR को स्कैन कर बुक पढ़ने का नया अनुभव जोड़े।।
REPORTER NILKANTH YADAV Bilaspur,Janjgir Chhattisgarh News

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