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फूलडोल महोत्सव पर ग्रहण का साया अगले दिन आयोजित किया जाना श्रेष्ठ

नीमकाथाना होलिका दहन को लेकर शास्त्रोंक्त निर्णय बताते हुए पं. विकास शास्त्री ने बताया कि होलिका दहन फाल्गुन शुक्ल की प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा को भद्रा रहित शास्त्रोक्त बताया है इस वर्ष फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी दिनांक 2 मार्च 2026 ई. को सांय 5-56 बजे से पूर्णिमा प्रारंभ होगी जो अगले दिन 3 मार्च मंगलवार को 5:8 बजे तक रहेगी अत : प्रदोष काल में पूर्णिमा 2 मार्च सोमवार को ही प्राप्त होने से होली पर्व इसी दिन मनाया जाएगा किंतु इस दिन भद्रा सांय 5-56 से अंतरात 5:32 बजे तक रहेगी होली का पर्व में यदि भद्रा निशीथ ( अर्धरात्रि ) को पार कर उषा काल तक पहुंच जाती है तो भद्रायुक्त प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा में भद्रा मुख को छोड़कर भद्रा पुच्छ के समय में होलिका दहन करना श्रेष्ठ बताया गया है दिनांक 2 मार्च 2026 ई को भद्रा मुख का समय रात 2-38 से 4-38 बजे तक रहेगा जिसे छोड़कर भद्रा पुच्छे के समय रात 1-26 से 2-38 बजे तक होलिका दहन करना श्रेष्ठ रहेगा। शास्त्रोंक्त प्रमाण देते हुए बताया कि भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा। #श्रावणी नृपति हन्ति ग्रामं दहति फाल्गुनी॥ #निर्णयसिन्धु........ श्रावणी और होलिकादन भद्रा होने पर न करे। भद्रा में श्रावणी से राजहानि तथा होलिकादहन से ग्रामदाह होता है। भद्रायां दीपिता होली राष्ट्रभंगं करोति वै। – पुराणसमुच्चय भद्रा में होली दाह से राष्ट्रभंग होता है। अत्र चेच्चन्द्रग्रहण तदा ततोर्वानिशि भद्रावर्जं पौर्णमास्यां होलिकादीपनम्। अथ #परेऽह्निग्रस्तोदयास्तदा पूर्वदिने भद्रावर्णं रात्रौ चतुर्थयामे विष्टिपुच्छे वा होलिका कार्या।” – निर्णयसिन्धु #जयसिंह कल्पद्रुम में तो प्राचीन #परंपरानुसार... #भविष्योत्तरपुराण के प्रमाण से 'भद्रान्ते सूर्योदयात् पूर्वे' ही सर्वश्रेष्ठ माना है, 'यदा तु प्रदोषे पूर्वदिने भद्रा भवति परदिने चास्तात्पूर्वमेव पंचदशी समाप्यते तदा #सूर्योदयात्पूर्वं भद्रान्तं प्रतीक्ष्य होलिका दीपनीया।' फूल डोल महोत्सव पर ग्रहण का साया खग्रास चंद्र ग्रहण (भारत में ग्रस्तोदय खग्रास व खंडग्रास दृश्य) फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा मंगलवार दिनांक 3 मार्च 2026 को दोपहर बाद से सांय काल तक होने वाला यह खग्रास चंद्र ग्रहण राजस्थान में गुजरात राज्यों के पश्चिमी भाग के कुछ हिस्सों को छोड़कर संपूर्ण भारत में ग्रस्तोदय अर्थात ग्रहण लगा हुआ चंद्रमा उदय होगा के रूप में दिखाई देगा जिससे सुदूरवर्ती उत्तरी पूर्वी स्थित राज्य अरुणाचल प्रदेश,असम नागालैंड व मणिपुर के कुछ भाग में चंद्रोदय सांय 5:33 बजे से पहले होगा वहां चंद्र ग्रहण की खग्रास स्थिति व शेष समस्त भारत में ग्रहण खंड ग्रास स्थिति में उदय होता हुआ दिखाई देगा इस ग्रहण के प्रारंभ व समाप्ति काल निम्न प्रकार से रहेगा ग्रहण प्रारंभ 3:20 बजे खग्रास प्रारंभ 4-35 बजे ग्रहण मध्य 5- 4 बजे खग्रास समाप्त 5- 33 बजे और ग्रहण समाप्त 6-47 बजे तक रहेगा सूतक काल का निर्णय इस ग्रहण का सूतक दिनांक 3 मार्च 2026 को प्रातः सूर्योदय के साथ ही प्रारंभ हो जाएगा सामान्यतः चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण प्रारंभ से 9 घंटे पूर्व माना गया है किंतु ग्रहण यदि ग्रस्तोदय हो तो शास्त्रों में पूर्ववर्ती पूरे दिन अर्थात सूर्योदय से ही सूतक मान्य किए जाने के शास्त्रादेश मिलते हैं अतः धार्मिक जनों को सूतक प्रारंभ हो जाने के बाद बच्चों, वृद्ध, रोगियों को छोड़कर भोजनादी नहीं करना चाहिए इस ग्रहण के कारण सभी मंदिरो के कपाट बंद रहेंगे ग्रहण मोक्ष बाद आरती होगी फूलडोल महोत्सव दिनांक 4 फ़रवरी को मनाया जाना उचित रहेगा। 3 मार्च को प्रदोष काल मे होलिका दहन नहीं हो सकता है क्योंकि नन्दायां नरकं घोरं भद्रायां देशनाशनम्। दुर्भिक्षं च चतुर्दश्यां करोत्येव हुताशनः॥ –विद्याविनोद प्रतिपदा में होलिकादाह से नरक, भद्रा में देशनाश, और चतुर्दशी में करने से दुर्भिक्ष होता है। प्रतिपद्भूतभद्रासु यार्चिता होलिका दिवा। संवत्सरं तु तद्राष्ट्रं पुरं दहति साद्भुतम्॥ – चन्द्रप्रकाश प्रतिपदा, चतुर्दशी, भद्रा और दिन, इनमें होली जलाना सर्वथा त्याज्य है। कुयोगवश यदि जला दी जाए तो वहाँ के राज्य, नगर और मनुष्य अद्भुत उत्पातों से एक ही वर्ष में हीन हो जाते हैं।

Sikar Rajasthan News @ Bureau Chief Kapil Dev sharma

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