बस्तर की धरती, बस्तर के युवाओं का अधिकार

अनुसूचित क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत डोंगरीगुड़ा कुमार मारेंगा में संचालित NMDC Limited की परियोजना के रेलवे साइडिंग, क्रेशर प्लांट एवं परिवहन कार्यों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने की मांग को लेकर “दंडकारणीय टिप ट्राला संगठन” ने संयुक्त रूप से अपना स्पष्ट और सशक्त पक्ष रखा है।ग्राम पंचायत की सहमति से गठित संगठन के पदाधिकारी — अध्यक्ष: बलराम मौर्य, उपाध्यक्ष: आशीष मिश्रा, उपाध्यक्ष: जीशान कुरैशी, उपाध्यक्ष: समीर खान, सचिव: नवनीत चाँद ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा है कि “बस्तर की धरती से निकलने वाला लोहा देश का भविष्य गढ़ता है, तो उस भविष्य में बस्तर के युवाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित होनी चाहिए। यह केवल रोजगार की मांग नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार और सामाजिक न्याय का प्रश्न है।”

संवैधानिक आधार और स्थानीय अधिकार बस्तर जिला संविधान की पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत अधिसूचित क्षेत्र है, जहाँ Panchayats (Extension to Scheduled Areas) Act, 1996 (PESA) लागू है। इसके तहत ग्राम सभा को स्थानीय संसाधनों और विकास गतिविधियों में परामर्श एवं सहभागिता का अधिकार प्राप्त है साथ ही, खनिज प्रभावित क्षेत्रों के विकास हेतु गठित District Mineral Foundation (DMF) तथा कंपनी अधिनियम 2013 के अंतर्गत CSR प्रावधानों का उद्देश्य भी स्थानीय समुदायों का सामाजिक-आर्थिक उत्थान है।

संगठन की प्रमुख मांगें रेलवे साइडिंग, क्रेशर प्लांट एवं ट्रांसपोर्टेशन कार्यों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता आधारित अवसर। परिवहन (टिप/ट्राला) संचालन में स्थानीय युवाओं के लिए निर्धारित प्रतिशत प्राथमिकता नीति। ग्राम सभा की अनुशंसा के आधार पर पारदर्शी कार्य आवंटन प्रक्रिया। DMF एवं CSR मद से ड्राइविंग प्रशिक्षण, कौशल उन्नयन एवं वाहन वित्तीय सहायता योजना। प्रशासन, परियोजना प्रबंधन एवं संगठन प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक शीघ्र आयोजित की जाए। अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) के समय ग्राम पंचायत से किए गए जनहित के वादों को तत्काल प्रभाव से पूरा किया जाए।

बस्तर के युवाओं के नाम संयुक्त बयान में संगठन पदाधिकारियों ने कहा— “जब हमारी धरती से संपदा निकलती है, तो हमारे घरों में भी उजाला आना चाहिए। बस्तर का युवा केवल दर्शक नहीं रहेगा, बल्कि विकास का भागीदार बनेगा। हम शांति, संवैधानिक मर्यादा और लोकतांत्रिक तरीके से अपना हक मांग रहे हैं।” संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं, बल्कि संवाद, सहभागिता और न्यायोचित समाधान है, ताकि औद्योगिक विकास और स्थानीय हितों के बीच संतुलन बना रहे!

बस्तर राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए यह मांग केवल आर्थिक विषय नहीं, बल्कि सामाजिक स्थायित्व, युवाओं के विश्वास और क्षेत्रीय संतुलन से जुड़ा मुद्दा है। यदि स्थानीय प्राथमिकता नीति लागू होती है तो— बेरोजगार युवाओं को आजीविका के अवसर मिलेंगे, क्षेत्र में सौहार्द्र एवं स्थायित्व बढ़ेगा। औद्योगिक परियोजनाओं के प्रति विश्वास और सहयोग मजबूत होगा अंत में संगठन ने प्रशासन, NMDC Limited प्रबंधन एवं राज्य शासन से आग्रह किया है कि संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप सकारात्मक निर्णय लेकर बस्तर के युवाओं को न्याय दिलाया जाए।

इस दौरान दंडकारणीय टिप ट्राला संघ ग्राम पंचायत डोंगरी गुड़ा कुमार मारेंगा के पदाधिकारी के रूप उपाध्य्क्ष आशीष मिश्रा, जीशान क़ुरैशी,समीर खान सचिव नवनीत चांद, सह सचिव मेहताब सिंग,विक्की राव,कोषाध्यक्ष विमल बिसाई, सह कोषाध्यक्ष संतोष सिंग, कार्यकारणी सदस्य अभिषेक डेविड,तुलसी राम मौर्य,राजमन बघेल,विजेंद्र ठाकुर,गुड्डू राम कश्यप,वनमाली बघेल,नोबि निषाद,नीलांबर भद्रे,गुड्डू कडयामि,गणपति मौर्य, राम मौर्य, धनसिंग गोयल,राजेश कश्यप,लछु राम मौर्य, महादेव गोयल,चुम्बन कश्यप,परदेशी नाग,राजू कश्यप, रमेश कश्यप, परमेश्वर ठाकुर,शोभाराम मौर्य,मनोज सेठिया,गंगा मौर्य,बंशी मौर्य अन्य पदाधिकारी व ग्रामवासी उपस्थित थे!


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