महाशिवरात्रि पर रविवार को श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना बेलपत्र, शमी पत्र,धतूरा,फूल नारियल आदि पूजन सामग्री को समर्पित कर जलाभिषेक किया।ऐतिहासिक कर्णेश्वर धाम प्रातः काल से ही शिव मय रहा। हर हर महादेव के जय घोष से पूरा परिसर गूंजता रहा।मन्दिर के सामने नारियल, धतूरा के फल फूल,अगरबत्ती, बेलपत्रों की दुकानें सजी रही। परम्परानुसार श्रद्धालुओं ने महानदी व बालका के संगम में डुबकी लगाकर कर्णेश्वर महादेव की पुजा अर्चना की।
महाशिवरात्रि पर ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव के बारह ज्योतिलिंगो का धरती पर प्रकाट्य हुआ था और भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह उत्सव के रूप में मनाने की परम्परा है।ट्रस्ट अध्यक्ष विकल गुप्ता ने बताया कि ऐतिहासिक कर्णेश्वर धाम में छत्तीसगढ़ की जीवन दायिनी महानदी व बालका, अदृश्य स्वर्ण नदी के पवित्र त्रिवेणी संगम में प्रकृति और परमात्मा का अदभुत मिलन होता है।महाशिवरात्रि पर त्रिनेत्र धारी भगवान शिव का आराधना में डूबे श्रद्धालुओं का उत्साह और भक्ति भाव देखते ही बनता है। ट्रस्ट ने सान्ध्य कालीन बेला में विधि विधान से पूजा अर्चना बेल पत्र, घतुरा के फूल व फल, शमी,गंगा जल,दूध,दही,चंदन, कनेर के पुष्प,सहित शिव जी के प्रिय साम्रगियों से कर महारुद्राभिषेक किया। नवनीत मानस परिवार राजनांदगांव व जय हिंद मानस परिवार साकरा द्वारा दोपहर से देर रात तक मधुर भजनों से शिव महिमा का गुण गान किया। इस दौरान ट्रस्ट संरक्षक कैलाश पवार, उपाध्यक्ष रवि ठाकुर,रवि दुबे,सचिव भरत निर्मलकर,कोषाध्यक्ष निकेश ठाकुर,सह सचिव राम भरोसा साहू, मोहन पुजारी,वरिष्ठ ट्रस्टी प्रकाश बैश, नागेंद्र शुक्ला,आनंद अवस्थी, योगेश साहू, छबि ठाकुर,बबलू गुप्ता, दुर्गेश साहू, ईश्वर जांगड़े,डोमार मिश्रा, महेंद्र कौशल रवि भट्ट,हनी कशयप, अनिरुद्ध साहू,गगन नाहटा,अश्विनी निषाद,होरी लाल पटेल, ललित निर्मलकर,संतु साहू मिलेश साहू,प्रमेश निषाद,गौतम चंद्र साहू,टेश्वर ध्रुव ,भूपेंद्र साहू,कुलेश साहू आदि की उपस्थिति रही।
*महाशिवरात्रि की महिमा*
पुजारी विनोद पूरी गोस्वामी ने बताया कि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को भगवान शिव अपने अनादि अनंत शिव लिंग स्वरूप में प्रकट हुए थे इसी कारण यह रात्रि महा शिवरात्रि कहलाती है।