बजट 2026 बस्तर की बुनियादी जरूरतों के खिलाफ; तरुणा साबे बेदरकर

आम आदमी पार्टी ने हाल ही में पेश किए गए वित्तीय वर्ष 2026 के राज्य बजट को बस्तर की जनता के लिए अत्यंत निराशाजनक और दिशाहीन करार दिया है। संगठन के प्रदेश सचिव व प्रवक्ता तरुणा साबे ने कहा कि बजट में बस्तर के आदिवासियों, किसानों और बेरोजगार युवाओं की अनदेखी की गई है और यह केवल चंद उद्योगपतियों को लाभ पहुँचाने वाला “पूंजीवादी बजट” है। यह बजट बस्तर की जमीनी हकीकत से कोसों दूर है और इसमें केवल कागजी आंकड़ों की बाजीगरी की गई है। यह बजट बस्तर वासियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। बजट 2026 के प्रमुख नकारात्मक बिंदु:
• स्थानीय रोजगार पर चुप्पी: बजट में बड़े उद्योगों और निवेश की बात तो की गई है, लेकिन बस्तर के स्थानीय युवाओं के लिए सीधे रोजगार के किसी ठोस रोडमैप का अभाव है। ‘बस्तर फाइटर्स’ जैसे सुरक्षा केंद्रित पदों के अलावा कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में कोई नया बड़ा निवेश नहीं दिखा है।
• किसानों और वनोपज संग्राहकों की उपेक्षा: कृषि क्षेत्र में आधुनिकीकरण और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए पर्याप्त बजट का प्रावधान नहीं किया गया है। लघु वनोपज के समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि और स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण (Processing) इकाइयों की स्थापना के लिए ठोस फंड का अभाव है, जिससे आदिवासी अर्थव्यवस्था हाशिये पर है।
• बुनियादी ढांचे में असमानता: बजट का एक बड़ा हिस्सा केवल रायपुर और चुनिंदा शहरी क्षेत्रों पर केंद्रित है। बस्तर के अंदरूनी इलाकों में सड़क, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए आवंटित राशि ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।
• महंगाई पर लगाम लगाने में विफल: बजट में आम जनता को महंगाई से राहत देने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं। पेट्रोल-डीजल पर मामूली वैट कटौती के बावजूद, ग्रामीण परिवहन और दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने की कोई योजना नहीं है।
• शिक्षा और स्वास्थ्य का निजीकरण: सरकारी अस्पतालों और स्कूलों की हालत सुधारने के बजाय, पीपीपी (PPP) मॉडल और निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन देने से बस्तर के गरीब परिवारों के लिए स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाएं महंगी और पहुंच से बाहर हो जाएंगी।

आम आदमी पार्टी की प्रवक्ता तरुणा ने कहा कि स्वास्थ्य बजट में वृद्धि का दावा खोखला है क्योंकि बस्तर के जिला अस्पतालों में आज भी विशेषज्ञ डॉक्टरों और वेंटिलेटर सुविधाओं की भारी कमी है। ग्रामीण इलाकों में ‘हाट-बाजार क्लिनिक’ केवल रेफरल केंद्र बनकर रह गए हैं। बस्तर के अंदरूनी क्षेत्रों में बंद पड़े स्कूलों को दोबारा खोलने और वहां शिक्षकों की नियमित नियुक्ति के बजाए सरकार केवल डिजिटल शिक्षा की बात कर रही है। उच्च शिक्षा के लिए बस्तर में नए तकनीकी संस्थानों का अभाव बना हुआ है।सिर्फ सरकार इस बजट मे मुँह मिया मिट्ठू बना हुआ है। आम आदमी पार्टी राज्य सरकार से मांग करता है कि बजट में संशोधन कर बस्तर के लिए विशेष पैकेज की घोषणा की जाए, जो केवल सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर नहीं, बल्कि यहाँ के निवासियों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने पर केंद्रित हो।



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